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बरसात में तिलक रोड के ‘बत्रा चाट भंडार’ पर चखें पहाड़ी जायके वाली पत्तोड़ चाट

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Dehradun Street Food: उत्तराखंड की हसीन वादियों में जब मानसूनी फुहारें गिरती हैं, तब पहाड़ों की रसोई से उठने वाली पारंपरिक पकवानों की खुशबू हर किसी को अपना दीवाना बना लेती है. रिमझिम बारिश के इस दौर में देहरादून की ऐतिहासिक गलियों में एक ऐसा अनोखा जायका महक रहा है, जिसका इंतजार खाने के शौकीन साल भर करते हैं. तिलक रोड स्थित छह दशक पुरानी एक दुकान पर सिर्फ बरसात के तीन महीनों के लिए तैयार होने वाली अरबी के पत्तों की खास चाट आज शहर से लेकर दूर-दराज के पर्यटकों की पहली पसंद बन चुकी है.

बरसात का मौसम आते ही पहाड़ों में ज़ायके का मिज़ाज पूरी तरह बदल जाता है. रिमझिम बारिश के बीच जहां ज़्यादातर लोग गर्म-गर्म चाट और पकौड़ियों की तलाश में निकलते हैं, वहीं उत्तराखंड की वादियों में ‘पत्यूड’ की महक फ़िज़ाओं में घुलने लगती है. अरबी यानी पीनालू के पत्तों से तैयार होने वाला यह पारंपरिक व्यंजन स्वाद में जितना लाजवाब होता है, इसे बनाने की प्रक्रिया उतनी ही मेहनत भरी होती है.

अगर आप भी इस मानसूनी ज़ायके के शौकीन हैं लेकिन इसे घर पर बनाने के झंझट से बचना चाहते हैं तो देहरादून का तिलक रोड आपका अगला ठिकाना होना चाहिए. यहां आप बिना किसी परेशानी के एकदम ताज़ा और स्वादिष्ट पत्तोड़ का आनंद उठा सकते हैं. चटपटे मसालों, ठंडी दही और तीखी-मीठी चटनी के साथ परोसा जाने वाला यह पत्तोड़ यहां आने वाले हर चटोरी जुबान और फूडी का दिल जीत लेता है.

तिलक रोड पर स्थित ‘बत्रा चाट भंडार’ इस ख़ास मानसूनी दावत का मुख्य केंद्र है. ख़ास बात यह है कि इस बेहतरीन पत्तोड़ चाट का स्वाद आपको साल भर नहीं, बल्कि मानसून के सिर्फ़ 3 महीनों के दौरान ही नसीब होता है. स्वाद में नंबर-वन होने के साथ-साथ यह जेब पर भी भारी नहीं पड़ता है, सिर्फ़ 50 रुपए में आप इस लज़ीज़ पहाड़ी चाट की प्लेट का मज़ा ले सकते हैं.

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इस स्वाद के पीछे एक लंबा इतिहास जुड़ा हुआ है. दुकान के मालिक राजेश बत्रा बताते हैं कि साल 1962 में उनके पिता ने इसी तिलक रोड पर एक छोटी सी रेहड़ी से शुरुआत की थी, जहां वे बन-टिक्की, छोले-भटूरे और चाट बेचा करते थे. राजेश ने भी बहुत छोटी उम्र से ही अपने पिता के इस काम में हाथ बंटाना शुरू कर दिया था और आज भी वे इस परंपरा को पूरे शौक़ से आगे बढ़ा रहे हैं.

राजेश बत्रा का कहना है कि वैसे तो उनकी दुकान पर साल के बारह महीने चाट और चाइनीज़ फ़ूड का ज़ायका उपलब्ध रहता है लेकिन बरसात आते ही मेन्यू में ‘पत्तोड़’ की ख़ास एंट्री होती है. लोग फ़ास्ट फ़ूड तो कभी भी खा सकते हैं लेकिन पत्तोड़ का असली मज़ा केवल बारिश के मौसम में ही आता है क्योंकि अरबी के ताज़ा और मुलायम पत्ते इसी सीज़न में सुलभ होते हैं.

इस दुकान के पत्तोड़ चाट की दीवानगी का आलम यह है कि लोग दूर-दूर से यहां खिंचे चले आते हैं. देहरादून के देहरा ख़ास, राजपुर और मोकमपुर जैसे इलाकों से तो लोग आते ही हैं, साथ ही दिल्ली और शिमला तक के पर्यटक यहां का स्वाद चखकर अपने साथ बंडल के बंडल पत्तोड़ पैक करवाकर ले जाते हैं.

इसे बनाने की विधि भी बेहद ख़ास है. राजेश खेतों से ताज़ा पत्ते लाकर उन्हें अच्छी तरह धोते हैं. फिर बेसन और अपने गुप्त गृह-निर्मित मसालों का लेप हर पत्ते पर लगाकर उन्हें करीने से फ़ोल्ड किया जाता है. इसके बाद इन्हें स्टीम में पकाया जाता है, टुकड़ों में काटा जाता है और फिर क्रिस्पी होने तक तला जाता है. अंत में दही, चटनी, कटे हुए प्याज और ख़ास मसालों से सजाकर ग्राहकों को परोसा जाता है.

आमतौर पर अरबी के पत्तों से बने गर्म पत्तोड़ खाने से गले में हल्की खराश या खुजली महसूस होती है लेकिन राजेश की ख़ास रेसिपी की वजह से यहां के पत्तोड़ में खुजली की शिकायत बिल्कुल नहीं होती है. अगर आप भी इस ज़ायके का स्वाद चखना चाहते हैं तो देहरादून के सहारनपुर चौक से होते हुए सीधा तिलक रोड स्थित बत्रा चाट भंडार का रुख कर सकते हैं.

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