देवघर. आमतौर पर खाने-पीने के शौकीन लोग पकौड़े का नाम सुनते ही अलग-अलग तरह का स्वाद याद करने लगते हैं. किसी को गरमा-गरम आलू का पकौड़ा पसंद है, तो किसी को प्याज का पकौड़ा, वहीं कई लोग हरी मिर्च, पालक, बैंगन या गोभी के पकौड़े बड़े चाव से खाते हैं. खासकर बरसात के मौसम में अगर चाय के साथ गरमा-गरम पकौड़ा मिल जाए, तो फिर क्या कहने.
लेकिन झारखंड की धरती पर पकौड़े की एक ऐसी देसी और अनोखी किस्म भी बनती है, जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग जानते होंगे. यह है बांस करील का पकौड़ा. सुनने में नाम थोड़ा अलग जरूर लग सकता है, लेकिन एक बार इसका स्वाद चख लिया जाए तो इसका खट्टा-खट्टा और देसी स्वाद लंबे समय तक जुबान पर बना रहता है.
मात्र दो महीने ही मिलता है यह बांस
दरअसल, झारखंड के जंगल और गांव सिर्फ अपनी हरियाली के लिए ही नहीं, बल्कि यहां मिलने वाले तरह-तरह के देसी खान-पान के लिए भी जाने जाते हैं. जंगल से मिलने वाली कई ऐसी चीजें हैं, जिन्हें यहां के लोग पीढ़ियों से अपने भोजन का हिस्सा बनाते आए हैं. इन्हीं में से एक है बांस का कोपला, जिसे स्थानीय तौर पर कई जगह अलग-अलग नाम से जाना जाता है. देवघर जिले के इलाके में इसे बांस करील के नाम से जाना जाता है.
खास बात यह है कि बांस करील सालभर आसानी से नहीं मिलता, बल्कि बरसात के समय, खासकर अगस्त और सितंबर महीने में जंगल और आसपास के इलाकों में इसके कोपले देखने को मिलते हैं. गांव-देहात के लोग इसे जंगल और स्थानीय बाजार से लाकर अपने तरीके से तैयार करते हैं और इससे सब्जी के साथ-साथ स्वादिष्ट पकौड़ा भी बनाया जाता है.
बनाने के लिए जानिए सामग्री
बांस की करील से पकौड़ा बनाने के लिए ज्यादा महंगे सामान की भी जरूरत नहीं पड़ती है. इसके लिए बांस की करील, बेसन, चावल का आटा, प्याज, हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट, धनिया पत्ती, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, अजवाइन और स्वादानुसार नमक की जरूरत होती है. घर में मिलने वाले सामान्य मसालों के साथ इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है. लेकिन बांस की करील का पकौड़ा बनाने में सबसे जरूरी बात इसकी तैयारी का तरीका है, क्योंकि अगर करील को सही तरीके से तैयार नहीं किया जाए तो इसका असली स्वाद नहीं आ पाता.
जानिए क्या है खास रेसिपी
सबसे पहले बाजार से ताजी और नरम बांस की करील खरीदकर घर लाएं. इसके बाद करील को अच्छी तरह साफ करके पतले-पतले और गोल आकार में काट लें. अब यहां सबसे महत्वपूर्ण काम शुरू होता है. काटी हुई करील को पानी में डालकर करीब एक दिन तक भिगोकर रखना होता है. गृहणी मनोरमा देवी बताती हैं कि पानी में रखने के बाद करील में एक खास तरह का खट्टापन आता है और यही खट्टापन इसके स्वाद को और भी खास बनाता है.
इसलिए बाजार से करील खरीदकर तुरंत पकौड़ा बनाने के बजाय उसे पहले पानी में भिगोकर रखना बेहतर माना जाता है. करील को एक दिन तक पानी में रखने के बाद उसे निकालकर अच्छी तरह तैयार कर लें और फिर मिक्सी में पीसकर इसका पेस्ट बना लें. इसके बाद इस पेस्ट में स्वादानुसार नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, अजवाइन, बेसन, चावल का आटा और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें.
पेस्ट को बहुत पतला न करें
चाहें तो इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और धनिया पत्ती भी मिला सकते हैं. अब सभी चीजों को अच्छी तरह से मिक्स कर एक गाढ़ा और मोटा पेस्ट तैयार कर लें. ध्यान रहे कि मिश्रण ज्यादा पतला नहीं होना चाहिए, क्योंकि पतला पेस्ट होने पर पकौड़ा बनाने में परेशानी हो सकती है. जब पेस्ट अच्छी तरह तैयार हो जाए तो हाथों की मदद से इसके छोटे-छोटे गोल आकार बना लें.
मध्यम आंच पर पकाएं
इसके बाद एक कड़ाही में जरूरत के अनुसार तेल डालकर उसे अच्छी तरह गर्म करें. जब तेल गर्म हो जाए तो तैयार किए गए गोल-गोल पेस्ट को धीरे-धीरे कड़ाही में डालें. अब पकौड़ों को मध्यम आंच पर तब तक तलें, जब तक उनका रंग सुनहरा और बाहर से कुरकुरा न हो जाए. जब पकौड़े अच्छी तरह से पक जाएं तो उन्हें कड़ाही से निकालकर प्लेट में रख लें.
आम पकौड़ों से बिलकुल अलग
गरमा-गरम तैयार बांस की करील का पकौड़ा स्वाद में बिल्कुल अलग होता है. इसमें आने वाला हल्का खट्टापन और मसालों का तीखापन इसे और भी स्वादिष्ट बना देता है. यही वजह है कि झारखंड के कुछ इलाकों में बरसात के मौसम में मिलने वाली बांस की करील का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं. देवघर में भी इसे खास मौसमी खाद्य पदार्थ के रूप में देखा जाता है. साल के सिर्फ कुछ समय के लिए मिलने वाली यह करील जब पकौड़े के रूप में तैयार होती है तो इसका स्वाद इतना अलग होता है कि खाने वाला आलू और प्याज के पकौड़े का स्वाद भी भूल जाए.