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Jethamula Kachori: पाली के सर्राफा बाजार में 80 साल से ज्यादा पुरानी जेठामुला जी की खस्ता कचौरी आज भी लोगों के बीच खास पसंद बनी हुई है. करारी कचौरी के बीच छेद कर उसमें डाली जाने वाली तीखी-मीठी खास चटनी इसका स्वाद और भी लाजवाब बना देती है. पाली आने वाले फूड लवर्स के लिए यह कचौरी एक ऐसी स्वादिष्ट चीज है, जिसे चखे बिना सफर अधूरा माना जाता है.

पाली. अगर आप चटपटे और जायकेदार खाने के शौकीन हैं, तो राजस्थान के पाली शहर का सर्राफा बाजार आपका अगला ठिकाना होना चाहिए. वैसे तो राजस्थान में कचौरी के हजारों प्रशंसक हैं, लेकिन पाली की ‘जेठामूला खस्ता कचौरी’ का अंदाज सबसे जुदा है. पिछले 80 सालों से भी ज्यादा समय से यह दुकान न सिर्फ पाली के लोगों का दिल जीत रही है, बल्कि दूर-दूर से आने वाले फूड लवर्स के लिए भी एक पसंदीदा स्टॉप बनी हुई है. इस कचौरी की सबसे खास बात है इसे परोसने का अनोखा और पारंपरिक तरीका. कचौरी के बीच में एक छोटा-सा होल करके उसमें डाली जाने वाली खास तीखी और मीठी चटनी इसे ऐसा स्वाद देती है कि खाने वाला बस उंगलियां चाटता रह जाए.

80 साल से अधिक पुरानी दुकान
राजस्थान का पाली शहर सिर्फ अपनी संस्कृति और पहनावे के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनूठे और लाजवाब स्वादों के लिए भी पहचाना जाता है. अगर आप पक्के वाले ‘फूड लवर’ हैं, तो पाली के सर्राफा बाजार में स्थित ‘जेठामुला जी की दुकान’ की खस्ता कचौरी के बारे में जरूर सुना होगा. पिछले 80 से अधिक सालों से यह दुकान लोगों के दिलों पर राज कर रही है. इस दुकान की सबसे दिलचस्प बात यह है कि आकार में यह बेहद छोटी है. दुकान के अंदर सिर्फ एक ही व्यक्ति के बैठने की जगह है, लेकिन इसके बावजूद सुबह से ही ग्राहकों का हुजूम इस दुकान को चारों तरफ से घेर लेता है.

क्या बनाता है इसे इतना खास?
रोहट की मशहूर कचौरी के साइज जैसी दिखने वाली यह खस्ता कचौरी अपने अनूठे स्वाद के कारण सबसे अलग है. इसे परोसने का अंदाज भी बिल्कुल अलग और मजेदार है, इसकी खासियत है क्रंची कचौरी और स्पेशल होल, कचौरी के बीचों-बीच एक छोटा सा होल (छेद) किया जाता है. इसी के साथ इसका जादुई चटनी का तड़का, इस होल के अंदर जब इनकी खास चटाकेदार चटनी डाली जाती है, तो कचौरी का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है.

स्वाद ऐसा कि एक की जगह दो कचोरी खा जाते लोग
इसका क्रंच और चटनी का मेल इतना जबरदस्त होता है कि स्वाद के शौकीन एक कचौरी से रुकते नहीं, बल्कि तुरंत दूसरी कचौरी का ऑर्डर दे बैठते हैं. अगर आप पाली शहर से गुजर रहे हैं या सर्राफा बाजार का रुख कर रहे हैं, तो जेठामुला जी की यह 80 साल पुरानी खस्ता कचौरी चखना बिल्कुल न भूलें. इसका हर एक बाइट आपके फूड लवर वाले दिल को खुश कर देगा.

जाने कैसे पहुंचे यहां
जेठामुला जी की यह प्रसिद्ध कचौरी की दुकान पाली शहर के मुख्य सर्राफा बाजार के बीचों-बीच स्थित है. अगर आप पाली रेलवे स्टेशन या पुराना बस स्टैंड उतरते हैं, तो वहां से सर्राफा बाजार के लिए ई-रिक्शा, ऑटो या लोकल ट्रांसपोर्ट आसानी से मिल जाता है. चूंकि यह दुकान सर्राफा बाजार के तंग और व्यस्त इलाके में है, इसलिए यहाँ फोर-व्हीलर ले जाने के बजाय पैदल जाना या टू-व्हीलर से पहुँचना सबसे सुविधाजनक रहता है. बाजार में प्रवेश करते ही आप किसी भी स्थानीय दुकानदार से ‘जेठामुला जी की कचौरी’ पूछेंगे, तो वे आपको सीधे इस ऐतिहासिक दुकान का रास्ता बता देंगे.

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मोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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