बिहार के गया में इस बार 25 सितंबर से विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला का शुभारंभ होगा। विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले गया में ऑनलाइन पिंडदान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बिहार सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से ई-पिंडदान के लिए पैकेज शुरू किए जाने पर गया के पंडा समाज ने विरोध किया है। बुधवार को विष्णुपद मंदिर परिसर में श्री विष्णु प्रबंधकारिणी समिति के द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। इस दौरान बताया कि पिंडदान जैसी धार्मिक परंपरा ऑनलाइन माध्यम से नहीं, बल्कि व्यक्ति को खुद गया आकर अपने हाथों से करनी चाहिए।

‘ऑनलाइन पिंडदान करवाना धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं’

विष्णुपद मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों ने कहा कि ऑनलाइन पिंडदान का विरोध नया नहीं है। जब से यह व्यवस्था शुरू हुई है, तभी से इसका विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि धार्मिक ग्रंथों में ऑनलाइन पिंडदान का कोई प्रमाण नहीं मिलता। गया में अपने माता-पिता और पूर्वजों का पिंडदान स्वयं करने की परंपरा रही है। ऐसे में किसी दूसरे व्यक्ति से ऑनलाइन माध्यम से पिंडदान करवाना धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं है।

पिंडदान को लेकर क्या है धार्मिक मान्यता?

गया को पिंडदान और श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष और पितृऋण से मुक्ति मिलती है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता ने भी गया में फल्गु नदी के किनारे राजा दशरथ का श्राद्ध और पिंडदान किया था।

ई-पिंडदान से केवल धार्मिक परंपरा ही प्रभावित नहीं होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी पर भी असर पड़ सकता है। पितृपक्ष में देशभर से लाखों श्रद्धालु गया पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु पिंडदान एवं ई-पिंडदान पैकेज उपलब्ध 

बता दें कि पितृपक्ष मेला–2026 के अवसर पर देश-विदेश से गयाजी एवं बिहार आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु पर्यटन विभाग के निदेश पर बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड ने विशेष पिंडदान पर्यटन पैकेज जारी किए  हैं। ये पैकेज 25 सितंबर 2026 से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। इन पैकेजों के माध्यम से श्रद्धालुओं को पिंडदान अनुष्ठान, धार्मिक स्थलों के दर्शन, परिवहन, आवास, भोजन, पंडा-पुजारी की सेवाएँ तथा आवश्यक पूजन सामग्री एकीकृत रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। श्रद्धालु अपनी सुविधा, यात्रा अवधि और बजट के अनुरूप एक-दिवसीय तथा एक रात्रि-दो दिवसीय पैकेजों का चयन कर सकते हैं। श्रद्धालु ऑनलाइन बुकिंग के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट https://bstdc.bihar.gov.in/Pitripaksha/ पर जा सकते हैं। बुकिंग और अधिक जानकारी के लिए संपर्क नंबर 8544418408 और 8294307690 पर भी फोन कर सकते हैं। पितृपक्ष के 5 प्रकार के पैकेज के साथ ऑनलाइन पिंडदान पैकेज उपलब्ध हैं। 

पैकेज-A: पटना–पुनपुन घाट–गयाजी–पटना 

यह एक-दिवसीय पिंडदान पैकेज है। इसमें पटना से श्रद्धालुओं का पिकअप एवं ड्रॉप, पटना शहर के 10 किलोमीटर क्षेत्र, पटना रेलवे स्टेशन अथवा पटना हवाई अड्डे से परिवहन की सुविधा शामिल है। श्रद्धालुओं के लिए सेडान अथवा हैचबैक कार उपलब्ध कराई जाएगी। इस पैकेज में पुनपुन घाट पर पिंडदान, पिंडदान शुल्क और पूजन सामग्री तथा गयाजी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट वृक्ष पर पिंडदान पूजा की सुविधा शामिल है। पैकेज में बजट एसी से लेकर थ्री स्टार होटल में आवासन और शाकाहारी दोपहर का भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस पैकेज की दर होटल श्रेणी सुविधा व एक यात्री से चार यात्री की क्षमता के अनुसार ₹14,550 से शुरू होकर ₹30,650 तक है।  

पैकेज-B: पटना–पुनपुन घाट–गयाजी–नालंदा–राजगीर–पटना

यह एक रात्रि-दो दिवसीय पिंडदान पैकेज है। इसमें पटना से पिकअप एवं ड्रॉप, पुनपुन घाट और गयाजी में पिंडदान संबंधी सेवाएँ, पूजन सामग्री, आवास तथा शाकाहारी नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात्रि भोजन शामिल हैं। इस पैकेज के अंतर्गत राजगीर में विश्व शांति स्तूप तथा नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण कराया जाएगा। स्मारक अथवा पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट पैकेज में शामिल नहीं हैं। इस पैकेज की दर होटल श्रेणी सुविधा व एक यात्री से चार यात्री की क्षमता के अनुसार ₹18,850 से शुरू होकर ₹40,700  तक है।

पैकेज-C: गयाजी एक-दिवसीय पिंडदान पैकेज

गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक-दिवसीय पैकेज है। इसमें गयाजी रेलवे स्टेशन, गयाजी हवाई अड्डे अथवा 15 किलोमीटर क्षेत्र में स्थित पूजा स्थल से पिकअप एवं ड्रॉप की सुविधा दी जाएगी। परिवहन के लिए सेडान अथवा हैचबैक कार उपलब्ध होगी। पैकेज के अंतर्गत फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर में पिंडदान और अक्षयवट वृक्ष पर पिंडदान की व्यवस्था होगी। इसके साथ पंडाजी की सेवाएँ, पिंडदान शुल्क, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी दोपहर का भोजन शामिल है। इस पैकेज की दर होटल श्रेणी सुविधा व एक यात्री से चार यात्री की क्षमता के अनुसार ₹11,250 से शुरू होकर ₹25,250  तक है।    

पैकेज-D: गयाजी एक रात्रि-दो दिवसीय पिंडदान पैकेज

यह पैकेज विशेष रूप से देर रात, प्रातः और संध्या समय पिंडदान अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया गया है। इसमें गयाजी रेलवे स्टेशन, गयाजी हवाई अड्डे अथवा पूजा स्थल से पिकअप एवं ड्रॉप, सेडान अथवा हैचबैक कार, आवास तथा शाकाहारी दोपहर और रात्रि भोजन शामिल है। इस पैकेज में फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट वृक्ष पर पिंडदान पूजा की सुविधा दी जाएगी। इस पैकेज की दर होटल श्रेणी सुविधा व एक यात्री से चार यात्री की क्षमता के अनुसार ₹16,000 से शुरू होकर ₹39,500 तक है।                 

पैकेज-E: गयाजी–राजगीर–नालंदा एक रात्रि-दो दिवसीय पैकेज

यह एक रात्रि-दो दिवसीय गयाजी पिंडदान एवं पर्यटन पैकेज है। इसमें गयाजी रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे अथवा 15 किलोमीटर क्षेत्र के पूजा स्थल से पिकअप एवं ड्रॉप, परिवहन, पिंडदान संबंधी सेवाएँ, पूजन सामग्री और आवास शामिल हैं। श्रद्धालुओं को शाकाहारी नाश्ता, दोपहर का भोजन, अतिरिक्त दोपहर का भोजन तथा रात्रि भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। पैकेज के अंतर्गत राजगीर विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण भी कराया जाएगा। स्मारक एवं पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट पैकेज में शामिल नहीं हैं। इस पैकेज की दर एक यात्री से चार यात्री की क्षमता व होटल की श्रेणी के अनुसार ₹16,550 से शुरू होकर ₹32,850 तक है।    

ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी उपलब्ध 

जो श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से गयाजी नहीं आ सकते, उनके लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने ऑनलाइन ई-पिंडदान पैकेज भी उपलब्ध कराया है। इसकी कुल दर ₹23,000, जीएसटी सहित निर्धारित है। ई-पिंडदान पैकेज में विष्णुपद मंदिर में पिंडदान, अक्षयवट पर पिंडदान, फल्गु नदी पर पिंडदान अथवा तर्पण, पंडित/पुरोहित की सेवाएं, पूजन सामग्री और दक्षिणा, संपूर्ण अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग की पेन ड्राइव उपलब्ध कराना शामिल हैं। पुरोहित द्वारा तीनों प्रमुख स्थलों पर विधि-विधान से पिंडदान अथवा तर्पण कराया जाएगा। मंत्रोच्चार, दान-दक्षिणा और पूजन सामग्री सहित अनुष्ठान की संपूर्ण वीडियो रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

बता दें कि गया में ऑनलाइन (ई-पिंडदान) की सुविधा बिहार सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2024 में पितृ पक्ष मेले के अवसर पर शुरू की गई थी। उस समय भी विरोध किया गया था।

(रिपोर्ट- अजीत कुमार)

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