लखनऊः मिशन यूपी के लिए समाजवादी पार्टी ने पूरी तरह से कमर कस ली है। भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर अखिलेश यादव नए लुक में नजर आए। लाल टोपी के साथ गहरे नीले कलर का गमछा लगाकर आए और ऐलान किया कि उनकी सरकार बनी तो लखनऊ रिवर फ्रंट पर भगवान विश्वकर्मा की भव्य मंदिर स्थापना की जाएगी। अखिलेश यादव ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती पर सरकारी छुट्टी दी जाएगी।

पीडीए के फुल फॉर्म में जोड़ा गया मुस्लिम शब्द 

वहीं लखनऊ की सड़कों पर समाजवादी PDA यात्रा लिखा रथ पहुंच गए हैं। 2027 चुनाव में इसी रथ से प्रचार की तैयारी है। 2022 के मुकाबले इन रथों का पोस्टर बदला गया है। पोस्टर पर लिखा है कि PDA सामाजिक आंदोलन है। रथ पर पीडीए का फुल फॉर्म पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक के साथ मुस्लिम शब्द को जोड़ा गया है ताकि अल्पसंख्यक कौन है कोई कन्फ्यूजन न रह जाए। 

जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना

PDA के इसी फुल फॉर्म पर बीजेपी और एनडीए के सहयोगी दल सपा पर निशाना साधा रहे हैं। RLD अध्यक्ष जयंत चौधरी ने इशारों इशारों में कास्ट पॉलिटिक्स को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। जयंत चौधरी ने कहा विपक्षी नेता जाति का चश्मा कब उतारेंगे। हर चीज में जाति ढूंढ़ना सही बात नहीं है। 

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भगवा रंग की बस में क्या है खास

बुधवार को नए डिज़ाइन और किनारों पर ‘समाजवादी PDA यात्रा’ लिखी हुई भगवा रंग की बस सपा हेडक्वार्टर पहुंची। बस के बाईं ओर अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ यह स्लोगन लिखा है: ‘सामाजिक न्याय का परचम लहराएगा, PDA ही परिवर्तन लाएगा’। दाईं ओर सपाके संस्थापक मुलायम सिंह यादव की तस्वीर है और साथ में यह स्लोगन लिखा है: “PDA सामाजिक आंदोलन है, सामाजिक न्याय का संघर्ष है”। बस पर “समाजवादी PDA यात्रा” के नीचे पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक भी लिखा है। बस पर भीमराव अंबेडकर, जनेश्वर मिश्र, राम मनोहर लोहिया और बेनी प्रसाद वर्मा जैसे नेताओं की तस्वीरें भी लगी हैं। अखिलेश यादव ने 2016-17 और 2021 में भी इसी बस का इस्तेमाल किया था।

अक्टूबर में रथ यात्रा निकालेंगे अखिलेश यादव

 समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले अक्टूबर के आखिरी हफ़्ते में राज्यव्यापी अभियान शुरू करने वाले हैं। बुधवार को लखनऊ में सपा दफ़्तर में एक खास तौर पर तैयार की गई कैंपेन बस पहुंची। यह बस पार्टी के ‘PDA रथ यात्रा’ अभियान के लिए है, जो पिछड़े, दलित और मुस्लिम (यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वोटरों को एकजुट करने के पार्टी के फ़ॉर्मूले पर आधारित है।

इसी फ़ॉर्मूले की मदद से SP ने 2024 के राष्ट्रीय चुनावों में उत्तर प्रदेश की 80 में से 37 लोकसभा सीटें जीतकर अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सीटें 2019 में 62 से घटकर 33 रह गईं और 2014 के बाद पहली बार पार्टी की कुल सीटें संसद में बहुमत के आंकड़े से नीचे आ गईं। सपा की सहयोगी कांग्रेस की सीटें भी 2024 में एक से बढ़कर छह हो गईं।

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