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मुजफ्फरपुर के मिठनपुर में मिलने की कचरी-चॉप बेहद मशहूर है. यहां पिछले 25 वर्षों से यह स्वाद परोसा जा रहा है. मात्र 30 रुपये में कचरी-चॉप के साथ भुना चूड़ा मिलता है. साथ में तीखी मिर्च और खास चटनी दी जाती है. शाम होते ही यहां खाने वालों की भारी भीड़ जुटती है.
मुजफ्फरपुरः मुजफ्फरपुर शहर आए और आपने मिठनपुर पानी टंकी के पास मिलने वाली कचरी-चप का स्वाद नहीं चखा, तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी. पिछले 25 वर्षों से अपने हाथों के स्वाद से लोगों के दिलों पर राज कर रहे सुबोध साह आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं.
शहर के इस व्यस्त इलाके में शाम होते ही खाने-पीने के शौकीनों की भीड़ जुटने लगती है. जो भी इस रास्ते से गुजरता है या आसपास रुकता है, वह सुबोध जी के ठेले पर रुके बिना आगे नहीं बढ़ता. खासकर उनकी बनाई कचरी (प्याज का पकौड़ा) और चप का स्वाद लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है.
30 रुपये प्लेज नाश्ता
सिर्फ 30 रुपये में मिलने वाली यह प्लेट लोगों के लिए स्वाद और बजट का बेहतरीन मेल है. इसमें कचरी और चॉप के साथ भुना हुआ चूड़ा और तीखी मिर्च परोसी जाती है, जो स्वाद को और भी खास बना देती है. इसके साथ मिलने वाली सरसों और बादाम की चटनी इस व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत है, जो इसे एक अलग पहचान देती है.
सुबोध साह बताते हैं कि उनके स्वाद का राज उनके घर में तैयार किया गया खास मसाला है. वे खुद इस मसाले को बनाते हैं और उसी से कचरी-चप तैयार करते हैं. यही वजह है कि उनका स्वाद वर्षों से एक जैसा और ग्राहकों का पसंदीदा बना हुआ है.
रोजाना 150 प्लेज बिक्री
हर दिन करीब 100 से 150 प्लेट की बिक्री यह बताने के लिए काफी है कि लोगों के बीच उनकी कितनी लोकप्रियता है. उनकी दुकान रोजाना शाम 3 बजे से रात 11 बजे तक लगती है, जहां हर उम्र के लोग स्वाद का आनंद लेने पहुंचते हैं.
स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले यात्री भी इस स्वाद के दीवाने हो जाते हैं. कई लोग तो खासतौर पर यहां की कचरी-चप खाने के लिए ही इस इलाके का रुख करते हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.