नई दिल्ली. वाईआरएफ की स्पाई यूनिवर्स का हिस्सा और मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘अल्फा’ से जैसी उम्मीदें की जा रही थीं, वो उस पर बिलकुल भी खरी नहीं उतरी. लेकिन, इस भारी-भरकम मेलोड्रामा के बीच एक्ट्रेस शरवरी वाघ दर्शकों का ध्यान खींचने में कामयाब रहीं. कारगिल युद्ध, अल्फा सीरम और एक चालाक पाकिस्तानी एजेंट के इर्द-गिर्द बुनी गई इस ढीली-ढाली स्क्रिप्ट में आलिया भट्ट का एक्शन अवतार अजीब लगा, लेकिन शरवरी ने अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से फिल्म को संभालने की पूरी कोशिश की. इस भारी-भरकम जासूसी थ्रिलर में भी शरवरी की परफॉर्मेंस फैन्स को पसंद आएगी.

कहानी
‘अल्फा’ की कहानी 1999 के कारगिल युद्ध से शुरू होती है. मुश्किल युद्ध के मैदान में हुई तबाही के बाद, सिर्फ दो बहादुर ऑफिसर (बॉबी देओल और अनिल कपूर) जिंदा बचते हैं. इस जबरदस्त लड़ाई के बाद, बॉबी देओल देश की सुरक्षा के लिए सुपर-सैनिक बनाने का एक बड़ा आइडिया लेकर आते हैं, जिसे ‘अल्फा सोल्जर’ कहा जाता है. इसमें एक खास ‘अल्फा सीरम’ बनाना शामिल है जो सैनिकों को अनलिमिटेड पावर दे सकता है. इस चैलेंजिंग प्रोजेक्ट में अनिल कपूर भी उनके साथ हैं. कहानी तब मोड़ लेती है जब अनिल कपूर चुपके से अपनी बीमार पत्नी को सीरम दे देते हैं, लेकिन इसका उल्टा असर होता है और उनकी मौत हो जाती है. इस खुलेआम धोखे से हालात बिगड़ जाते हैं, जिसके चलते बॉबी देओल अनिल कपूर की एक बेटी को अपने साथ ले जाते हैं. सालों बाद, फिल्म की मेन कहानी बदला, देशभक्ति और फैमिली मेलोड्रामा के आस-पास घूमती है. फिल्म में आलिया भट्ट का मेन टारगेट अनिल कपूर हैं. कहानी तब एक बड़ा मोड़ लेती है जब पता चलता है कि पाकिस्तान ने इंडियन आर्मी में ‘फतेह’ नाम का एक चालाक एजेंट भेजा था. वह सिस्टम में घुस जाता है और खुद ‘अल्फा’ बन जाता है. अनिल कपूर की दूसरी बेटी, शरवरी भी इस पूरी उलझन में शामिल है. कुल मिलाकर, कहानी देशभक्ति के नाम पर एक अजीब फैमिली ड्रामा पेश करती है.

एक्टिंग
यह फिल्म एक्टिंग के मामले में दर्शकों को सबसे ज्यादा निराश करती है. इसमें कोई शक नहीं कि आलिया भट्ट इंडियन सिनेमा की एक बेहतरीन और कल्ट एक्ट्रेस हैं, लेकिन ‘अल्फा’ के रोल में वह पूरी तरह से मिसफिट लगती हैं. ‘राजी’ जैसी सीरियस फिल्मों में उनकी परफॉर्मेंस बेहतरीन थी, लेकिन यहां, वह हैवी एक्शन के साथ ठीक से मैच नहीं कर पाईं. कई सीन में वह ओवरएक्टिंग और अजीब एक्सप्रेशन करती दिखीं, जो उनके लेवल की एक्ट्रेस के लिए ठीक नहीं है. वहीं, फिल्म रिलीज होने से पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा थी कि शरवरी इस फिल्म में आलिया पर भारी पड़ेंगी, और हुआ भी कुछ वैसा ही. भले उन्हें ज्यादा एक्सन सीन करने को मिला, लेकिन जितना भी मिला उसमें वह फिट बैठीं. जब हम बॉबी देओल और अनिल कपूर की बात करते हैं तो विलेन के रोल में बॉबी देओल की स्क्रीन प्रेजेंस दमदार और पावरफुल है, लेकिन मेकर्स ने उन्हें जो हरियाणवी एक्सेंट दिया है, वह उनके कैरेक्टर को पूरी तरह खराब कर देता है. यह एक्सेंट थिएटर में दर्शकों को परेशान करता है. दूसरी तरफ, अनिल कपूर अपने छोटे रोल में ठीक-ठाक लग रहे हैं.

डायरेक्शन
स्पाई यूनिवर्स के नाम पर डायरेक्टर शिव रवैल ने सिर्फ शानदार लोकेशन और बड़ा बजट दिखाया है. फिल्म का डायरेक्शन बहुत जोरदार और कन्फ्यूज करने वाला है. ऐसा लगता है कि मेकर्स हाल की ब्लॉकबस्टर ‘धुरंधर’ की बड़ी सफलता और उसके पाकिस्तान-थीम वाले कॉन्सेप्ट से बहुत ज्यादा इंस्पायर्ड थे, जिसमें हमजा पाकिस्तान जाकर दुश्मन के प्लान को नाकाम कर देता है. लेकिन डायरेक्टर ‘धुरंधर’ जैसा जबरदस्त थ्रिल बनाने या स्पाई यूनिवर्स की रेप्युटेशन बचाने में फेल रहे. स्क्रीन पर सिर्फ स्टाइलिश पोज देते एक्टर्स हैं, जिनके पीछे कोई मजबूत विजन नहीं है.

सिनेमैटोग्राफी
टेक्निकली, फिल्म सिर्फ अपनी शान की वजह से सबसे अलग है. तोजो जेवियर की तरह, यहां कैमरावर्क भी शानदार और क्रिस्प है. एग्जॉटिक लोकेशन्स, पहाड़ों पर तेज बर्फबारी और कारगिल वॉर के शुरुआती सीन बड़े स्केल पर शूट किए गए हैं. लेकिन जब कहानी ही खोखली हो, तो खूबसूरत विजुअल्स भी ऑडियंस को बोरियत से नहीं बचा सकते.

म्यूजिक और कैमियो
फिल्म का म्यूजिक एवरेज है. मेकर्स का पंजाबी गानों और जबरदस्त एक्शन सीन के बैकग्राउंड में तेज लड़ाई की आवाजों का कॉकटेल कुछ जगहों पर काम करता है, लेकिन ज्यादातर समय सिरदर्द बन जाता है. फिल्म का सबसे दमदार और काम का पल ऋतिक रोशन का कैमियो है. जब वह ‘वॉर’ के अपने कल्ट कैरेक्टर कबीर के रूप में स्क्रीन पर आते हैं, तो ऑडियंस जोरदार तालियों से गूंज उठती है, लेकिन यहां ऋतिक का कैमियो भी काफी कमजोर रहा, अगर आप ‘टाइगर 3’ पठान के रूप शाहरुख खान जैसी कैमियो की उम्मीद लगा रहे हैं, तो आपके हाथ मायूसी लगेगी.

कमियां
फिल्म की कहानी में इतने लॉजिकल कमियां हैं कि ऑडियंस को ठगा हुआ महसूस होता है. जिस आसानी से एक पाकिस्तानी एजेंट इंडियन आर्मी में घुसकर ‘अल्फा’ बन जाता है, वह यकीन नहीं होता. स्पाई थ्रिलर में एक्शन रियलिस्टिक होना चाहिए, लेकिन यहां लीड एक्ट्रेस सिर्फ पोज दे रही हैं और मेलोड्रामा में लगी हुई हैं. दर्शक किसी भी कैरेक्टर से इमोशनली कनेक्ट नहीं कर पाते, जिससे देशभक्ति का एंगल डल और बोरिंग लगता है.

अंतिम फैसला
शॉर्ट में, अगर हम इस फिल्म को सही तरीके से एनालाइज करें, तो यशराज फिल्म्स की ‘अल्फा’ अब तक की स्पाई यूनिवर्स की सबसे कमजोर और सबसे स्लोपी फिल्म साबित होती है. लग्जरी लोकेशन और ऋतिक रोशन के दमदार कैमियो के अलावा, फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं है. आदित्य चोपड़ा का आलिया भट्ट को एक टफ स्पाई एक्शन मूवी में इस्तेमाल करने का एक्सपेरिमेंट बॉक्स ऑफिस पर उल्टा पड़ गया. मेरी ओर से इस फिल्म को 5 में 1.5 स्टार.



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