साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार मैसेजिंग ऐप्स की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है. WhatsApp जैसे पॉपुलर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग से न सिर्फ आम लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी सामने आ रही हैं. इन्हीं खतरों को देखते हुए दूरसंचार विभाग (DoT) ने 28 नवंबर को एक अहम निर्देश जारी किया था, जिसमें मैसेजिंग ऐप्स को मोबाइल नंबर यानी SIM से लगातार जोड़े रखने (SIM-Binding) को अनिवार्य किया गया है.
सरकार का मानना है कि यह कदम विदेशी साइबर ठगों और खुफिया एजेंसियों द्वारा भारत से संवेदनशील जानकारी की चोरी को रोकने में मदद करेगा. हालांकि, इस फैसले के बाद मैसेजिंग ऐप कंपनियों की ओर से कुछ आपत्तियां भी सामने आई हैं, खासतौर पर वेब और डेस्कटॉप वर्जन के लिए तय किए गए 6 घंटे के ऑटो-लॉगआउट नियम को लेकर. अब संकेत मिल रहे हैं कि सरकार सुरक्षा से समझौता किए बिना इस नियम में कुछ राहत देने पर विचार कर सकती है.
6 घंटे लॉगआउट सिस्टम मोबाइल के लिए नहीं
फिलहाल DoT के नियमों के अनुसार, WhatsApp जैसे मैसेजिंग ऐप्स के वेब या डेस्कटॉप वर्जन को हर 6 घंटे में अपने आप लॉगआउट होना जरूरी है. इसके बाद यूज़र को दोबारा QR कोड स्कैन करके डिवाइस को लिंक करना होगा. कई मैसेजिंग ऐप्स इसका विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि हर 6 घंटे में लॉगिन करना यूज़र्स के लिए असुविधाजनक होगा. लेकिन यह नियम सिर्फ वेब और डेस्कटॉप वर्जन पर लागू होता है, मोबाइल ऐप पर नहीं.
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह नियम लॉन्ग सेशन खामियों को रोकने के लिए है, जिसका इस्तेमाल अक्सर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग करते हैं. बार-बार री-ऑथेंटिकेशन से यह साबित होता है कि ऐप पर उसी व्यक्ति का कंट्रोल है, जिसके पास वह SIM और डिवाइस मौजूद है. अधिकारियों ने ये भी बताया कि बैंकिंग और UPI ऐप्स पहले से ही इसी तरह के ऑटो-लॉगआउट फीचर का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रहे हैं.
मैसेजिंग ऐप्स का एक और तर्क यह है कि SIM-बाइंडिंग से विदेश यात्रा के दौरान यूज़र्स को महंगा इंटरनेशनल रोमिंग लेना पड़ेगा. इस पर सरकार ने कहा कि जो लोग विदेश यात्रा में फ्लाइट और होटल पर हजारों रुपये खर्च कर सकते हैं, वो रोमिंग खर्च को लेकर शिकायत करना उचित नहीं लगता.
बढ़ सकता है लॉगआउट लिमिट का टाइम
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वेब वर्जन के लिए 6 घंटे की सीमा को 12 या 18 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसे 24 घंटे से ज्यादा नहीं किया जाएगा. एक और आपत्ति यह उठाई गई कि DoT को WhatsApp जैसे ऐप्स को निर्देश देने का अधिकार नहीं है, क्योंकि वे IT एक्ट के तहत आते हैं. सरकार का कहना है कि ये ऐप्स मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के जरिए ही चलते हैं, जो DoT के दायरे में आते हैं.
सरकार का रुख इसलिए भी सख्त है क्योंकि 2024 में साइबर ठगी से नुकसान ₹22,800 करोड़ से ज्यादा हो चुका है, और कुछ मामलों में लोग आत्महत्या तक कर चुके हैं. इसी वजह से सरकार इन नियमों को नागरिकों की सुरक्षा और डिजिटल सिस्टम में भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी मानती है.
सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी के बाद यह फैसला लिया गया. सितंबर 2024 में गृह मंत्रालय (MHA) ने एक तकनीकी समूह बनाया था, जिसमें DoT, दिल्ली पुलिस, MeitY, IB और TRAI शामिल थे. इस समूह ने सोशल मीडिया और OTT ऐप्स को मोबाइल नंबर से जोड़ने की सिफारिश की थी. बाद में अप्रैल 2025 में MHA ने WhatsApp जैसे ऐप्स के लिए SIM-बाइंडिंग और जियो-फेंसिंग जैसे उपाय लागू करने के निर्देश भी दिए.
एक सुरक्षा अधिकारी ने शनिवार को TOI से बातचीत में बताया कि DoT की फील्ड यूनिट्स ने भी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर इन चिंताओं को स्वतंत्र रूप से उठाया था. इसके अलावा, सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी अगस्त 2025 में SIM-बाइंडिंग लागू करने की मांग की थी, ताकि सीमा पार से होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके.