आपने भी अक्सर बाजार में तेज धूप और गर्मी में खुले में रखे तरबूज को खरीदा होगा. ऐसे तरबूज हमेशा खतरनाक हो सकते हैं. चलिए मान लीजिए कि आपने इसको खरीद भी लिया और जैसे ही इसको काटा तो इसके अंदर से झाग सा निकलना शुरू हो गया या तेज गंध आने लगे तो इसे कतई नहीं खाएं, क्योंकि ये बहुत खतरनाक हो सकता है. एक बात और तरबूज कई दिनों तक भी खुले में रखने के बाद उसे नहीं खाएं. इसकी वजह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

मुंबई में बिरयानी के बाद तरबूज खाने के बाद एक परिवार के चार लोगों की मृत्यु हो गई. डॉक्टरों का कहना है कि तरबूज में कुछ ऐसा विषाक्त पदार्थ था, जिसका उन सभी पर घातक असर हुआ. किडनी फेल हो गई. डॉक्टरों का आंकलन है कि संभव है कि तरबूज में या तो कुछ खतरनाक रसायन पहुंच गए हों या फिर किसी खतरनाक बैक्टीरिया ने उसमें जगह बना ली हो.

दरअसल तरबूज जमीन पर लेटे हुए विकसित होने की वजह से भी बीमारियों को न्योता देता है. जमीन पर पैदा होने की वजह से कुछ बैक्टीरिया उसकी बाहरी सतह पर आ जाते हैं. इसी वजह से कुछ अंदर भी घुस सकते हैं. केमिकल तो खैर हमेशा ही इसके विषाक्त होने की आशंका बना सकते हैं.

तरबूज को कैसे खाएं कैसे नहीं खाएं. कब काफी ऐहतियात रखें. इससे संबंधित सवालों के जवाब यहां हैं.

क्या धूप में घंटों रखे तरबूजों को खाना खतरनाक हो सकता है

– हां, धूप में रखे तरबूजों का सामना तेज गर्मी और सीधी धूप से होता है. तो ऐसे में तरबूज की आंतरिक संरचना में तेजी से बदलाव हो सकता है. ऐसे में इनको काटकर खाना सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है. उसके पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण हैं.
तरबूज में पानी और प्राकृतिक शक्कर की मात्रा बहुत अधिक होती है. जब तरबूज घंटों तक 35°C से 45°C की सीधी धूप में पड़ा रहता है, तो उसके अंदर का तापमान भी बढ़ जाता है. उच्च तापमान तरबूज के भीतर मौजूद प्राकृतिक खमीर को सक्रिय कर देता है. इससे चीनी का किण्वन शुरू हो जाता है. फल के अंदर गैस बनने लगती है. अधिक किण्वित होने पर तरबूज का स्वाद खट्टा या शराब जैसा हो सकता है. इसे खाने से पेट में मरोड़, दस्त और ‘फूड पॉइजनिंग’ का खतरा रहता है.

कई बार गर्मी के कारण तरबूज फट जाता है या झाग निकलने लगता है, क्या ये स्थिति भी खतरनाक है

– कई बार बहुत ज्यादा गर्मी के कारण अंदर इतनी गैस बन जाती है कि तरबूज काटते ही वह झटके से फट जाता है या उससे झाग निकलने लगता है. अगर किसी तरबूज से अपने आप झाग निकल रहा हो, तो इसका मतलब है कि वह पूरी तरह से विषाक्त हो चुका होता है और उसे छूना भी नहीं चाहिए.

क्या ज्यादा गर्मी में तरबूज के छिलकों से भी बैक्टीरिया अंदर घुस जाते हैं

– वैसे तो तरबूज का छिलका उसे बाहरी वातावरण से बचाता है, लेकिन जब ज्यादा गर्मी हो और आपने या तो इसे खुले में रखा हो या फिर धूप में खुले में रखे तरबूज को खरीद रहे हों तो शायद ये खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ज्यादा गर्मी भी तरबूत के बाहरी छिलके की कोशिकाओं को कमजोर कर देती है. इससे फल के अंदर सूक्ष्म दरारें आ सकती हैं, जिनके जरिए बाहर के बैक्टीरिया जैसे साल्मोनेला या ई-कोलाई आसानी से अंदर प्रवेश कर जाते हैं.

वैसे तो कहा तो ये जाता है कि तरबूज खाने से शरीर को ठंडक देता है

– दरअसल तरबूज अगर सीधी धूप और गर्मी में रखा हो तो इसमें मौजूद लाइकोपीन और विटामिन सी नष्ट हो जाते हैं. धूप में तपे तरबूज को खाने से वह शरीर को ठंडक देने के बजाय शरीर का तापमान और बिगाड़ सकता है.

तो बाजार से खरीदते समय प्रभावित हो चुके तरबूज को कैसे पहचानें?

– अगर आप सड़क किनारे धूप में रखे तरबूज खरीद रहे हैं, तो उसे छुएं जरूर, अगर ये छूने पर गर्म लग रहा है, तो खरीदने से बचें. फल का तापमान बाहर के वातावरण से थोड़ा कम होना चाहिए. हाथ से थपथपाने पर अगर आवाज बहुत ज्यादा भभक लगे तो इसका मतलब है कि अंदर का गूदा गर्मी से गलना शुरू हो गया है. धूप में रखे तरबूज की चमक फीकी पड़ जाती है. उसका रंग थोड़ा भूरा या पीला दिखने लगता है. अगर उसकी डंठल वाली जगह से अगर थोड़ी भी चिपचिपी तरल पदार्थ या खट्टी गंध आ रही हो, तो वह खराब हो चुका है.

धूप में रखे तरबूज को हाथ में लेकर छूकर जरूर देखें अगर ये गर्म हो तो बिल्कुल मत खरीदें (news18 ai image)

क्या ज्यादा दिन तक रखने पर भी तरबूज विषाक्त हो सकता है

– तरबूज को अगर बहुत अधिक दिनों तक सामान्य तापमान पर रखा जाए, तो इसके अंदर किण्वन शुरू हो जाता है. अगर तरबूज काटने पर उससे खट्टी गंध आ रही हो या अंदर का हिस्सा झागदार या लसदार हो गया हो, तो वह खराब हो चुका है. ऐसा तरबूज खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है. बिना कटा तरबूज कमरे के तापमान पर 1-2 हफ्ते और कटा हुआ तरबूज फ्रिज में 2-3 दिन तक सुरक्षित रहता है.

अगर तरबूज को काटने पर उसके बीच में गहरे पीले रंग की धारियां या छेद दिखें तो…

-ये जरूरत से ज्यादा रसायनों के उपयोग का संकेत हो सकता है. अक्सर तरबूज को जल्दी बड़ा करने या लाल दिखाने के लिए नाइट्रोजन उर्वरकों या प्रतिबंधित रसायनों जैसे एरिथ्रोसिन डाई का छिड़काव किया जाता है. तरबूज में बहुत अधिक नाइट्रेट जमा होने पर भी फूड प्वाइजनिंग हो सकती है.

अगर आप तरबूज को घर में रख रहे हैं तो कुछ लोग इसको पानी में रख देते हैं तो कुछ फ्रीज में, इन्हें कहां नहीं रखना चाहिए या किन चीजों के साथ रखने से बचना चाहिए.

– आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों में ही तरबूज के साथ कुछ संयोजनों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. पानी के साथ नहीं रखें. तरबूज में खुद 92% पानी होता है. इसे खाने के तुरंत बाद बहुत अधिक पानी पीने से पाचन प्रक्रिया धीमी हो सकती है या पेट फूलने की समस्या हो सकती है.
तरबूज अम्लीय प्रकृति का हो सकता है. अगर इसे फ्रीज में दूध के बगल में रखा है तो भी ठीक नहीं है, ये पाचन तंत्र पर भारी पड़ सकता है. कुछ मामलों में उल्टी या दस्त का कारण बन सकता है.

जमीन पर उगकर फैले हुए तरबूज और उनकी लताएं . जमीन में मिट्टी और बालू के संपर्क में उगने के कारण मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया भी उसको प्रभावित कर सकते हैं. (news18 ai image)

तरबूज जमीन पर उगते हैं, क्या जमीन के बैक्टीरिया भी इसमें प्रवेश कर सकते हैं

– चूंकि तरबूज जमीन पर उगते हैं, इसलिए इनकी बाहरी सतह पर मिट्टी के बैक्टीरिया हो सकते हैं. अगर बिना धोए तरबूज काटा जाए, तो चाकू के जरिए बैक्टीरिया अंदर जा सकते हैं. इसलिए काटने से पहले इसे अच्छी तरह धोना जरूरी है. तरबूज को हमेशा ताजा काटकर ही खाएं. अगर काटने के बाद फल का रंग असामान्य रूप से गहरा लाल या बनावट बहुत ज्यादा नरम लगे, तो उसे न खाना ही बेहतर है.

जमीन के संपर्क में पैदा होने के कारण तरबूज की फसल में किस तरह के जोखिम हो सकते हैं.

– जमीन के सीधे संपर्क में होने के कारण तरबूज की फसल में कई तरह के जोखिम बढ़ जाते हैं. खेती की भाषा में इसे ग्राउंड स्पॉट या जमीन के संपर्क से होने वाले नुकसान के रूप में देखा जाता है.
मिट्टी में कई तरह के कवक यानि फंगाई और बैक्टीरिया होते हैं. तरबूज का छिलका सख्त तो होता है, लेकिन लगातार नमी के संपर्क में रहने से मिट्टी के कीटाणु छिलके को गला सकते हैं. इससे फ्रूट रॉट यानी फल के सड़ने की समस्या पैदा होती है. जहां से तरबूज जमीन को छूता है, वहां उसे धूप और हवा नहीं मिल पाती. वहां एक पीला या सफेद धब्बा बन जाता है जिसे बेली स्पॉट कहते हैं. अगर खेत में पानी जमा हो जाए, तो यही हिस्सा सबसे पहले नरम पड़ता है और यहीं से कीड़े या बैक्टीरिया फल के अंदर प्रवेश करते हैं.

इससे बचने के लिए किसान क्या करते हैं?

– जमीन पर प्लास्टिक की फिल्म बिछा दी जाती है, जिससे फल मिट्टी और सीधे पानी के संपर्क में नहीं आता. इससे फल साफ और सुरक्षित रहता है. कई अनुभवी किसान समय-समय पर फलों को बहुत सावधानी से थोड़ा घुमा देते हैं, ताकि एक ही तरफ नमी न बनी रहे और फल को चारों तरफ से हवा मिले.पारंपरिक खेती में फलों के नीचे धान का पुआल या सूखी घास रख दी जाती है ताकि वे सूखी सतह पर रहें.



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