बॉलीवुड और सिनेमा की दुनिया एक ऐसी जादुई नगरी है, जिसका आकर्षण हर किसी को अपनी ओर खींच ही लेता है। अक्सर हम सुनते हैं कि कोई अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर तो कोई अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़कर अभिनय के सपने पूरे करने मुंबई या हैदराबाद आ गया, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी व्यक्ति ने भारतीय शासन व्यवस्था में उच्च प्रशासनिक पद यानी ज्वाइंट कलेक्टर का रुतबा छोड़कर कैमरे के सामने अभिनय करने का जोखिम उठाया हो? तेलुगु सिनेमा में इन दिनों अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे सीनियर अभिनेता वडलामणि सत्य साईं श्रीनिवास की जीवन यात्रा कुछ ऐसी ही है। उन्होंने अपनी 23 साल की सरकारी सेवा, लग्जरी और प्रशासनिक शक्ति को त्यागकर अभिनय की दुनिया में कदम रखा और आज वे टॉलीवुड के सबसे व्यस्त और लोकप्रिय कैरेक्टर आर्टिस्ट में से एक बन चुके हैं। गौर करने वाली बात ये है कि IAS वडलामणि श्रीनिवास ने पहले ही अटेंप्ट में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली थी और IAS बन गए थे।

कैसा रहा शुरुआती जीवन?

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के नंदांपुडी गांव में एक किसान परिवार में जन्मे वदलामनी सत्य साईं श्रीनिवास ने अपनी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा पढ़ाई-लिखाई में बिताया। उन्होंने अमलापुरम से मैथ्स में BSc की डिग्री पूरी की, उस्मानिया यूनिवर्सिटी से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और कला में MA किया और सोशल हिस्ट्री में PhD भी पूरी की। UPSC और APPSC की परीक्षाओं को पास करने के बाद श्रीनिवास ने आखिरकार डिप्टी कलेक्टर के तौर पर अपना करियर शुरू किया। एक सरकारी अधिकारी के तौर पर अपनी ड्यूटी निभाते हुए, श्रीनिवास ने एक कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर सिनेमा की दुनिया में भी कदम रखा और ‘गीता गोविंदम’, ‘V’, ‘मंची रोजुलोचई’, ‘F2’, ‘खुशी’ जैसी फिल्मों में काम किया।

संयोग से शुरू हुआ नया सफर

IAS वडलामणि श्रीनिवास का पूरा नाम वडलामणि सत्य साईं श्रीनिवास है। बचपन से ही साहित्य, कला और फिल्मों के प्रति उनका गहरा लगाव था, लेकिन उन्होंने कभी पेशेवर अभिनेता बनने की योजना नहीं बनाई थी। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे आंध्र प्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए और विशाखापत्तनम में ज्वाइंट कलेक्टर जैसे प्रतिष्ठित और जिम्मेदारी भरे पद पर आसीन रहे। सरकारी सेवा में रहते हुए ही किस्मत ने उनके लिए एक नया रास्ता खोला। पारिवारिक मित्र और जाने-माने निर्देशक कल्याण कृष्ण ने उन्हें अपनी फिल्म ‘रा रंडोई वेडुका चुद्दाम’ में एक छोटी सी भूमिका निभाने का अवसर दिया। हालांकि यह एक छोटा सा रोल था, लेकिन इसने श्रीनिवास के भीतर छिपे कलाकार को जगा दिया। इसके तुरंत बाद निर्देशक मारुति ने उन्हें ‘महानुभावुडु’ में एक और अच्छा अवसर दिया।

सुपरहिट फिल्मों की झड़ी

ज्वाइंट कलेक्टर का पद संभालते हुए ही श्रीनिवास ने अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों और अभिनय के शौक के बीच संतुलन बनाना शुरू किया। उन्होंने ‘गीत गोविंदम’, ‘प्रतिरोजू पांडगे’ और ‘एफ-2’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में सह-कलाकार के रूप में अभिनय किया। इन फिल्मों की व्यावसायिक सफलता और श्रीनिवास द्वारा निभाए गए सहज और सशक्त किरदारों को दर्शकों तथा निर्देशकों द्वारा खूब सराहा गया। लगातार मिलती प्रशंसा और नए-नए प्रस्तावों के चलते उन्होंने एक बहुत बड़ा फैसला लिया, उन्होंने अपनी 23 सालों की प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र दे दिया और पूरी तरह से फिल्मों के लिए समर्पित हो गए। बहुत ही कम समय में वे लगभग 70 से अधिक फिल्मों में अपनी अदाकारी का जादू बिखेर चुके हैं।

Image Source : VCINEMA.COMवडलामणि श्रीनिवास।

इंडस्ट्री में बनाई अपनी पहचान

इतने कम समय में बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि के इतनी बड़ी सफलता हासिल करने पर जब इंडस्ट्री में तरह-तरह की बातें होने लगीं तो श्रीनिवास ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में बेहद बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने साफ किया कि सिर्फ किसी का छोटा-मोटा प्रशासनिक काम कर देने से फिल्मों में भूमिकाएं नहीं मिल जातीं। उन्होंने कहा, ‘मैं तिरुपति की यात्रा का प्रबंधन करवा सकता था या शूटिंग की अनुमति के लिए पुलिस प्रशासन से बात कर सकता था, इससे ज्यादा मैं क्या मदद करता? ऐसी मदद से केवल निजी संबंध और दोस्ती बन सकती है, फिल्में नहीं मिलतीं।’ हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पूर्व प्रशासनिक अधिकारी होने के कारण उन्हें उद्योग में एक ईजी एक्सेस जरूर मिला। बड़े-बड़े निर्देशकों और निर्माताओं से मिलना उनके लिए आसान हो गया, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा साबित करने का मंच जल्दी मिल गया।

10 हजार के पहले चेक से सालाना करोड़ों की कमाई तक

अपनी वित्तीय यात्रा पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि अपनी पहली फिल्म ‘रा रंडोई वेडुका चुद्दाम’ के लिए उन्हें मात्र 10000 रुपये फीस मिली थी, लेकिन ‘शैलजा रेड्डी अल्लुडु’ तक पहुंचते-पहुंचते उन्हें रोजाना 30000 रुपये मिलने लगे। आज आलम यह है कि वे एक दिन की शूटिंग के लिए 50000 से 60000 रुपये तक चार्ज करते हैं। श्रीनिवास ने खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि आज वे फिल्मों से सालाना लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनेक निर्देशकों और निर्माताओं के सहयोग और विश्वास की बदौलत ही वे टॉलीवुड में अपनी मजबूत जगह बनाने में सफल रहे हैं।

सरकारी रुतबा बनाम ग्लैमर वर्ल्ड का अनुभव

एक प्रशासनिक अधिकारी के जीवन और एक अभिनेता की जीवनशैली की तुलना करते हुए श्रीनिवास ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सरकारी सेवा के दौरान जो सम्मान और सुविधाएं उन्हें मिलती थीं, उसकी तुलना फिल्मी दुनिया से नहीं की जा सकती। त्यागपत्र देने के समय उनके, उनकी पत्नी और बेटी के पास अलग-अलग सरकारी वाहन थे और घर पर 10 नौकर-चाकर तैनात रहते थे। ऐसे विशाल रुतबे और सुविधाओं को छोड़कर एक स्वतंत्र और अनिश्चित जीवनशैली में ढलना शुरुआत में थोड़ा कठिन था, लेकिन इंडस्ट्री की सकारात्मक और सहयोगी माहौल उनके इस बदलाव को आसान और रोमांचक बना गया।

नंदामुरी की फिल्म में निगेटिव रोल

साल 2023 में नंदामुरी बालकृष्ण की सुपरहिट फिल्म ‘भगवंत केसरी’ में नजर आए श्रीनिवास ने फिल्म ‘पेदाकापू 1’ में अपने ग्रे शेड वाले किरदार से सभी को चौंका दिया था। इसके अलावा वो हाल ही में राम चरण की ‘गेम चेंजर’, वेंकेटेश की ‘संक्राति वस्तुनम’ और नंदामुरी की ‘डाकू महाराज’ में नजर आए। वर्तमान में वे सुपरस्टार प्रभास और निर्देशक मारुति की बहुप्रतीक्षित फिल्म और ‘ना सामी रंगा’ सहित लगभग 25 से अधिक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जल्द ही उनका नाम शतक लगाने वाले एक्टर्स की लिस्ट में शामिल हो जाएगा। अब वो जल्द ही ‘वाराणसी’ और ‘कोहीनूर’ जैसी फिल्मों में नजर आएंगे।

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