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भारत में जब भी मिथिलांचल की बात होती है, तो चूड़ा-दही का जिक्र जरूर होता है. पहले यह भोजन मुख्य रूप से पंडितों और साधु-संतों तक सीमित था, क्योंकि वे शुद्धता के कारण किसी के घर का पका हुआ भोजन या नमक नहीं खाते थे. इसी वजह से मिथिलांचल में चूड़ा-दही खाने की परंपरा शुरू हुई. समय के साथ यह परंपरा आम लोगों में भी लोकप्रिय हो गई और आज यहां लोग इसे सुबह से लेकर रात तक कभी भी खाते हैं.
मधुबनी: भारत में जब भी मिथिलांचल की चर्चा होती है, तो ‘चूड़ा-दही’ का जिक्र अपने आप जुड़ जाता है. कभी यह भोजन मुख्य रूप से पंडितों, साधु-संतों और प्रवचन देने वाले महात्माओं तक सीमित था, लेकिन समय के साथ यह हर घर की पसंद बन गया है. आज स्थिति यह है कि मिथिलांचल में लोग इसे सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर के भोजन और रात के खाने तक किसी भी समय बड़े चाव से खाते हैं.
चूड़ा-दही परोसने की परंपरा
मैथिली में एक कहावत प्रचलित है, ‘चूड़ा-दही, चीनी, अचार, ई सब बर नीमन लगै छै’ इसका अर्थ है कि चूड़ा-दही, चीनी और अचार हर समय स्वादिष्ट लगते हैं. यहां मेहमानों के स्वागत में भी चूड़ा-दही परोसने की परंपरा है. चाहे घर हो, धार्मिक आयोजन हो या यात्रा का समय, यह भोजन हर जगह सहजता से शामिल रहता है.
सात्विक और शुद्ध भोजन
मिथिलांचल में चूड़ा-दही को सबसे सात्विक और शुद्ध भोजन माना जाता है. पहले साधु-संत किसी के घर का पका हुआ भोजन या नमक नहीं ग्रहण करते थे, इसलिए उन्हें चूड़ा-दही परोसा जाता था. यह सरल, शुद्ध और आसानी से उपलब्ध भोजन था. उस समय लगभग हर घर में गाय-भैंस होती थी, जिससे ताजा दूध का दही जमाकर चूड़ा के साथ परोसा जाता था.
आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय
धीरे-धीरे यह परंपरा आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो गई और अब यह क्षेत्र की पहचान बन चुकी है. देश के अन्य हिस्सों में भी मिथिलांचल के लोगों को देखकर अक्सर यही कहा जाता है कि उन्हें चूड़ा-दही जरूर पसंद होगा.
खानपान में कई बदलाव
स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह भोजन फायदेमंद माना जाता है. दही पाचन में मदद करता है और चूड़ा पेट को लंबे समय तक भरा रखता है. यही वजह है कि चूड़ा-दही न केवल स्वाद में बल्कि सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है. समय के साथ भले ही खानपान में कई बदलाव आए हों, लेकिन मिथिलांचल में चूड़ा-दही का महत्व आज भी बरकरार है और यह लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें