Rai ki kanji peene ke fayde: गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा रखने और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए पारंपरिक देसी पेय बेहद फायदेमंद होते हैं. इन्हीं में से एक है राई की कांजी. यह न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है. खास बात यह है कि इसे गर्मियों में ही अधिक बनाया और पिया जाता है.
प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर
राई की कांजी एक प्राकृतिक फर्मेंटेड ड्रिंक है, जिसे प्रोबायोटिक भी कहा जाता है. इसमें ऐसे लाभकारी बैक्टीरिया विकसित होते हैं, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं. यह पाचन शक्ति को बेहतर बनाती है, कब्ज से राहत दिलाती है और शरीर को हल्का व तरोताज़ा महसूस कराती है.
आवश्यक सामग्री और तैयारी
कांजी बनाने के लिए सबसे पहले 1 लीटर पानी को हल्का उबालकर ठंडा कर लें ताकि वह शुद्ध हो जाए. अब मिक्सी में 1 चम्मच राई, 1 चम्मच नमक और 1 चम्मच हल्दी डालकर दरदरा पीस लें. इस मिश्रण को एक बर्तन में निकालकर उसमें 1 छोटा चम्मच दही मिलाएं. दही डालने से फर्मेंटेशन प्रक्रिया तेज और बेहतर होती है.
स्वाद बढ़ाने का खास तरीका
जिस जार या बर्तन में कांजी बनानी है, उसे अच्छी तरह साफ कर लें. अब उसमें तैयार मसाला चारों तरफ फैला दें. फिर एक छोटी कटोरी में जलता हुआ कोयला रखें, उसमें थोड़ा घी और चुटकीभर हींग डालें. इस कटोरी को कुछ मिनट के लिए जार के अंदर रखें, ताकि धुआं कांजी को खास खुशबू और स्वाद दे सके.
फर्मेंटेशन की प्रक्रिया
अब जार में ठंडा किया हुआ पानी डालें और मसाले को अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद ढक्कन बंद करके जार को 3–4 दिन के लिए किसी गर्म स्थान पर रख दें. रोज़ एक बार इसे हिलाना न भूलें, ताकि फर्मेंटेशन समान रूप से हो सके.
तैयार कांजी की पहचान
3-4 दिन बाद कांजी तैयार हो जाती है. इसका रंग थोड़ा बदल जाता है और इसमें हल्की खटास आ जाती है, जो इसके स्वाद को और भी बेहतर बनाती है.
सेहत के लिए राई कांजी के फायदे
राई की कांजी शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ लू से बचाने में मदद करती है. यह इम्युनिटी बढ़ाती है और पेट से जुड़ी कई समस्याओं को दूर रखने में सहायक होती है. इसे दिन में किसी भी समय पिया जा सकता है.