संसद ने पेपर लीक रोकने के लिए बने कठोर बिल को पारित कर दिया। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा। कड़ा कानून तो बन गया लेकिन परीक्षा प्रणाली को अचूक बनाने का काम नंदन नीलेकणि कमेटी करेगी। संसद में पेपर लीक पर अच्छी खासी बहस हुई, लेकिन एक भरोसेमंद और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली कैसे बने, इस पर कोई ठोस सुझाव नहीं आए।

आज मुझे चीन की सालाना कॉलेज एंट्रेंस परीक्षा के बारे में दिलचस्प जानकारी मिली। चीन में हर साल जून में तीन दिन परीक्षा होती है। Undergraduate admissions की इस परीक्षा में एक करोड़ तीस लाख छात्र इम्तिहान देते हैं। वहां इसे Gaokao exam कहते हैं। Gaokao में पेपर सैट करने के लिए 500 शिक्षक चुने जाते हैं। उन्हें 40 दिन तक एक भवन में बंद करके रखा जाता है। पेपर सैटर्स पूरी तरह नजरबंद रहते हैं। उनके लिए जो सुरक्षा स्टाफ और रसोइये होते हैं, वे भी उसी इमारत में बंद रहते हैं। किसी को फोन रखने की इजाजत नहीं है,सेंटर्स तक प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए state secret level की सुरक्षा व्यवस्था होती है।

हर परिवहन वाहन को GPS से ट्रैक किया जाता है और उनके साथ पुलिस एस्कॉर्ट चलता है। लेकिन सवाल सिर्फ पेपर सैट करने का नहीं है। चीन में परीक्षा के दौरान कई कंपनियां छात्रों को मुफ्त टैक्सी सुविधाएं देती है। कई रेस्तरां मुफ्त भोजन देते हैं और कई होटल छात्रों के लिए बिना किराया लिए बैड देते हैं। पूरे देश में परीक्षा के लिए एक माहौल तैयार किया जाता है। शोर कम करने के लिए फैक्ट्रियां बंद कर दी जाती हैं। शहरों और कस्बों में सार्वजनिक उत्सवों और समारोहों  पर बैन लगा दिया जाता है और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर कड़े नियम लागू होते हैं।

पेपर लीक में किसी तरह का निहित स्वार्थ न हो, इसके लिए कोचंग सेंटर्स पर कड़े नियम लागू किये जाते हैं। Gaokao सिस्टम के तहत कोचिंग सेंटर्स अखबारों और दूसरे मीडिया में अपने छात्रों की रैंकिंग के विज्ञापन नहीं दे सकते। उन्हें कमर्शियल मार्केटिंग करने की इजाज़त नहीं दी जाती। नियम ये है कि कोचिंग सेंटर्स अपने मुनाफे के लिए छात्रों पर परीक्षा का दबाव न पैदा करें। पूरी परीक्षा प्रणाली पर नजर रखने के लिए real-time intelligent surveillance सिस्टम लगाया जाता है। AI powered ये सिस्टम किसी भी तरह के असामान्य आचरण को ट्रैक करता है।

हमारे यहां परीक्षा कराने के लिए एक multi layered नेटवर्क है। NEET, JEE और CUET, इन सबके लिए अलग-अलग एंट्रेंस टेस्ट अलग-अलग समय पर, अलग-अलग तरीके से होते हैं। मुझे लगता है कि नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स जब नया सिस्टम बनाने पर विचार करे तो चीन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। चीन में भी परीक्षा देने वालों की तादाद बहुत बड़ी है। कोशिश तो ये होनी चाहिए कि भारत एक ऐसा सिस्टम बनाए जिसका अनुसरण बाकी दुनिया करे।

बंगाल में सरकारी खजाने की लूट कैसे हुई?

पश्चिम बंगाल के वीरभूम में एक रिटायर्ड सरकारी बस ड्राइवर के घर से पुलिस ने 28।5 करोड़ रुपये कैश और 15 किलो सोना बरामद किया। ये ड्राइवर, मिनार मंडल, वहां के एक व्यापारी तुलु मंडल का रिश्तेदार है। तुलु मंडल का असली नाम है, मोहम्मद नजीबुद्दीन, वह पत्थर का बड़ा कारोबारी है, सैंड माफिया है, उसके स्टोन क्रशर्स हैं।

तुलु मंडल का अभी कोई अता-पता नहीं। वह तृणमूल कांग्रेस नेता अणुव्रत मंडल का करीबी माना जाता है। ये सरासर सरकारी खजाने की लूट का साफ सबूत है। नेताओं की कृपा से जनता का पैसा कैसे लूटा जाता है, इसके प्रमाण मिले। चार हजार  रुपये तनख्वाह पाने वाले के पास करोड़ों रुये कैश कैसे मिले, ये सोचने की बात है। पूछने पर मिनार मंडल ने बताया कि ये पैसे तुलु मंडल के हैं। टीएमसी नेता अणुव्रत मंडल पशु तस्करी के केस में फिलहाल ज़मानत पर है।  तुलु मंडल पच्चीस साल पहले बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था। 2014 में वह तृणमूल नेता अणुव्रत मंडल के संपर्क में आया।

अणुव्रत मंडल ने 2016 में तुलु मंडल को बीरभूम में स्टोन माइनिंग का सरकारी टैक्स वसूलने का ठेका दिलवाया। ठेका मिलने के बाद तुलु मंडल के दिन फिरे।  2022 में उसने अपनी बेटी की शादी पर सौ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए। आरोप ये है कि तुलु मंडल ने स्टोन कारोबारियों से सरकारी राजस्व के तौर पर जो पैसा वसूला, उसके बदले में वो नकली रसीद देता था, और करोड़ों रुपये की अवैध वसूली करता था।

तृणमूल नेता कुणाल घोष ने कहा कि अणुव्रत मंडल को पहले ही पार्टी से निकाल दिया गया था। इस मामले में दो बातें हैं। पहली, जो भ्रष्टाचार करते हैं, तोलाबाजी tax वसूलते हैं, सरकारी खजाने की लूट करते हैं, वो सरकार बदलते ही पाला बदल लेते हैं। अणुव्रत मंडल ने वही किया। जब तक ममता की सरकार थी, ममता के साथ रहे, बंगाल में सरकार बदली, तो ममता की पार्टी से अलग हुए ऋतब्रत बनर्जी के साथ हो लिए। हालांकि इसका उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि पशु तस्करी के आरोप में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था, अभी वो जमानत पर है। अब अणुव्रत मंडल के चेलों के घरों पर छापे मारे जा रहे हैं।

दूसरी ध्यान देने वाली बात ये है कि पहले जब बंगाल में तृणमूल सरकार थी, वीरभूम जिले से  खनन राजस्व के रुप में  रोज़ाना 19 लाख रुपये सरकार के खाते में जमा होते थे। लेकिन सरकार बदलने के बाद अब यहां से रोज 83 करोड़ रुपये का खनन राजस्व मिल रहा है। यानी, अगर सरकार को जो सौ रुपये मिलने चाहिए थे, उसमें से सिर्फ कुछ पैसे मिलते थे। साफ है कि सरकारी खजाने से 99 परसेंट तक की लूट हो रही थी। बंगाल में सरकारी खजाने की लूट का एक सिस्टम बना हुआ था। जो पैसा सरकार के पास आना चाहिए था। वो माफिया की जेब में जा रहा था। लूट की छूट थी। अगर सरकार न बदलती, तो ये तोलाबाजी इसी तरह चलती रहती। 

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 30 जुलाई, 2026 का पूरा एपिसोड





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