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Pinalu Sabji Recipe: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसून आते ही कई पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू घर-घर में फैलने लगती है. इन्हीं में शामिल है पिनालू के गाबे की स्वादिष्ट सब्जी, जिसका स्वाद लेने के लिए लोग बारिश के मौसम का इंतजार करते हैं. मेहनत से तैयार होने वाली यह पहाड़ी डिश स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. जानिए कैसे बनती है पिनालू गाबे की सब्जी.

बागेश्वर: उत्तराखंड के पहाड़ों में रिमझिम बारिश की बौछारों के साथ ही एक ऐसे पारंपरिक जायके की खुशबू महकने लगती है, जिसके लिए खाने के शौकीन पूरे साल इंतजार करते हैं. यह कोई आम पकवान नहीं, बल्कि पहाड़ों का प्रसिद्ध ‘पिनालू के गाबे की सब्जी’ है. स्वाद में लाजवाब और सेहत के गुणों से भरपूर यह मौसमी व्यंजन बारिश के मौसम में उत्तराखंड के हर घर की पहली पसंद बन जाता है. हालांकि, इसे तैयार करने में थोड़ी कड़ी मेहनत जरूर लगती है, लेकिन थाली में सजने के बाद इसका अनोखा स्वाद हर मेहनत को सफल बना देता है. इन दिनों स्थानीय बाजारों से लेकर गांवों तक इस पारंपरिक डिश की डिमांड काफी बढ़ गई है.

क्या होता है पिनालू का गाबा?
स्थानीय जानकार व कुशल गृहणी किरन पांडे बताती हैं कि पिनालू, जिसे कई जगहों पर अरबी के नाम से भी जाना जाता है, उसके डंठल को पहाड़ में ‘गाबा’ कहा जाता है. इसकी सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले ताजे और मुलायम डंठलों को तोड़ा जाता है. इसके बाद उन्हें अच्छी तरह धोकर बाहरी रेशेदार छिलका पूरी तरह से निकाल दिया जाता है. यदि छिलका सही तरीके से न उतारा जाए, तो सब्जी खाते समय गले में खुजली या जलन का एहसास हो सकता है. यही वजह है कि इसकी सफाई को इस रेसिपी का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है.

पहाड़ी मसालों और छाछ का अनोखा मेल
छिलका हटाने के बाद गाबे को पालक की तरह बेहद बारीक काट लिया जाता है. दूसरी ओर, कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म करके उसमें जीरा, जाखिया या राई का तड़का लगाया जाता है. इसके बाद प्याज, लहसुन, अदरक और हरी मिर्च के साथ हल्दी, धनिया और लाल मिर्च जैसे मसाले डालकर अच्छी तरह भून लिए जाते हैं. जब मसाला पूरी तरह तैयार हो जाए, तो कटे हुए पिनालू गाबे को उसमें डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. जब गाबा अच्छी तरह गल जाए, तब इसमें दही या छाछ का पतला पेस्ट मिलाया जाता है. इसके बाद इसे लगातार चलाते हुए करीब 10 से 15 मिनट तक धीमी आंच पर उबाला जाता है. दही या छाछ मिलाने से सब्जी का स्वाद तो बढ़ता ही है, साथ ही इसकी बनावट भी बेहद मुलायम हो जाती है. कई लोग इसमें थोड़ा सा चावल का आटा या बेसन भी मिलाते हैं, जिससे सब्जी और गाढ़ी व लजीज हो जाती है.

स्वाद के साथ सेहत का खजाना
पिनालू गाबे की सब्जी को गर्म-गर्म मंडुवे (रागी) की रोटी, गेहूं की रोटी या भात (चावल) के साथ खाने का एक अलग ही आनंद है. पहाड़ के कई घरों में यह व्यंजन पीढ़ियों से बनाया जा रहा है और यह आज भी पारंपरिक खानपान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि पिनालू के डंठल में फाइबर, कैल्शियम और कई आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. सही तरीके से पकाने पर यह स्वाद के साथ-साथ बेहतरीन पौष्टिकता भी प्रदान करता है. बारिश के मौसम में उत्तराखंड के गांवों से लेकर शहरों तक पिनालू गाबे की सब्जी लोगों की सबसे पसंदीदा पारंपरिक डिशों में शामिल हो जाती है. इसकी अनोखी खुशबू, हल्का खट्टा स्वाद और देसी मसालों का मेल इसे पहाड़ के सबसे लोकप्रिय मौसमी व्यंजनों में एक खास पहचान दिलाता है.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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