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Desi Amchur Recipe: बघेलखंड क्षेत्र में आम का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण महिलाएं देसी तरीके से अमचूर पाउडर बनाकर सालभर के लिए स्टोर कर रही हैं. खास बात ये कि इसमें किसी तरह का प्रिजर्वेटिव या केमिकल नहीं मिलाया जाता. यह बाजार के अमचूर से सस्ता, शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है. जानें विधि…
Desi Amchur Recipe: मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र में गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांवों की रसोई में एक अलग ही खुशबू फैलने लगती है. यह खुशबू किसी महंगे मसाले की नहीं, बल्कि पारंपरिक तरीके से तैयार किए जाने वाले देसी अमचूर की होती है. गांवों में आज भी महिलाएं पुराने घरेलू तरीकों से कच्चे आम का अमचूर बनाती हैं, जिसमें किसी तरह का केमिकल या प्रिजर्वेटिव इस्तेमाल नहीं किया जाता.
यही वजह है कि अब लोग बाजार में मिलने वाले अमचूर की बजाय घर में बने शुद्ध देसी अमचूर को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. बघेलखंड के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों कच्चे आमों से अचार और अमचूर बनाने का काम तेजी से शुरू हो गया है. गांव की महिलाएं अभी से पूरे साल के इस्तेमाल के लिए अमचूर तैयार करने में जुटी हैं. घरों के आंगन और छतों पर सूखते आम के टुकड़े गर्मियों की पारंपरिक पहचान बन गए हैं.
कच्चे आम पहले कटें
सीधी निवासी रसोईया प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को बताया कि आम का मौसम आते ही लोग बगीचों से कच्चे आम बिनकर घर लाते हैं. सबसे पहले आमों को पानी में भिगोकर अच्छी तरह साफ किया जाता है ताकि धूल और गंदगी पूरी तरह निकल जाए, इसके बाद आम का छिलका उतारकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है. कटे आमों को साफ कपड़े या बड़ी थालियों में फैलाकर कई दिनों तक तेज धूप में सुखाया जाता है.
बस चुटकी में तैयार
प्रियंका सिंह के मुताबिक कच्चे आम के टुकड़ों को पूरी तरह सूखने में करीब चार से पांच दिन लग जाते हैं. जब आम पूरी तरह सूख जाता है, तब उसे सिलबट्टे, ओखली या मशीन में पीसकर बारीक पाउडर बनाया जाता है. यही पाउडर देसी अमचूर कहलाता है, जिसका इस्तेमाल पूरे साल रसोई में किया जाता है.
ऐसे रखें, ताकि खूब चले
तैयार अमचूर पाउडर को महिलाएं डिब्बों या प्लास्टिक कंटेनर में सुरक्षित रखती हैं, ताकि उसमें नमी न पहुंचे और वह लंबे समय तक खराब न हो, गांवों में दाल, सब्जी और पारंपरिक व्यंजनों में खट्टापन लाने के लिए इसी अमचूर का इस्तेमाल किया जाता है. एक चम्मच अमचूर खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है.
बिना केमिकल वाला अमचूर
प्रियंका सिंह बताती हैं कि घर में बना अमचूर पूरी तरह शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक होता है. इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं रहती, जबकि बाजार में मिलने वाले कई अमचूर पाउडर में सिट्रिक एसिड, स्टार्च और आर्टिफिशियल रंग मिलाए जाते हैं. देसी अमचूर खाने को टैंगी स्वाद देने के साथ शरीर को विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट भी देता है. यही वजह है कि बघेलखंड में आज भी लोग परंपरागत तरीके से अमचूर बनाकर पूरे साल उसका उपयोग करना पसंद करते हैं और यह परंपरा गांवों की रसोई में आज भी जीवित है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें