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Desi Mithai Recipe: बघेलखंड का गुड़हा सेव एक पारंपरिक मिठाई है, जिसे गर्मियों में लोग बड़े चाव से कहते हैं. इसे बेसन गुड़ की चाशनी से तैयार किया जाता है. इसकी खासियत इसकी हल्की मिठास और कुरकुरी बनावट है जो अन्य मिठाइयों से अलग पहचान देती है. यह मिठाई पाचन में सहायक और ऊर्जा देने वाली मानी जाती है…

Food Recipe: मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र की पारंपरिक मिठाई गुड़हा सेव लोगों की आज भी खास पसंद बनी हुई है. गुड़ और बेसन से तैयार यह गुड़हा सेव स्वाद के साथ सेहत का भी ख्याल रखती है. स्थानीय भाषा में गुड़हा सेव के नाम से प्रसिद्ध यह मिठाई लंबे समय से घरों और बाजारों में बनाई जाती रही है. गुड़हा सेव की सबसे बड़ी खासियत ये कि यह ज्यादा मीठा नहीं होता, जिससे गर्मी में भी लोग इसे आराम से खा लेते हैं. देसी स्वाद और कुरकुरेपन से भरपूर यह स्नैक शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है.

यही वजह है कि गर्मी की छुट्टियों में जब बच्चे अपने ननिहाल या ददिहाल पहुंचते हैं, तो उनका स्वागत अक्सर लाई और गुड़हा सेव से किया जाता है. सीधी की रसोइया प्रियंका सिंह ने बताया कि बघेलखंड में गुड़हा सेव सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि पुराने समय में ऊर्जा का बड़ा स्रोत माना जाता था. लोग इसे खाने के बाद पानी पीते थे, जिससे शरीर को तुरंत ताकत मिलती थी, उन्होंने बताया कि आज भी कई घरों में यह परंपरा उसी तरह निभाई जा रही है. खास बात ये कि इसे लंबे समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है, इसलिए यह सफर और छुट्टियों के लिए भी बेहतरीन स्नैक माना जाता है.

जानें बनाने की विधि
गुड़हा सेव बनाने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है. सबसे पहले बेसन में थोड़ा तेल डालकर उसका मोयन तैयार किया जाता है, फिर उसमें पानी मिलाकर नरम आटा गूंथा जाता है और कुछ देर ढककर रख दिया जाता है. इसके बाद सेव मशीन या हाथों की मदद से इसे गर्म तेल में डालकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तला जाता है. ठंडा होने के बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लिया जाता है.

फिर गुड़ की चाशनी बनाएं
इसके बाद गुड़ की चाशनी तैयार की जाती है. कड़ाही में थोड़ा पानी और गुड़ डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. जब चाशनी सॉफ्ट बॉल कंसिस्टेंसी तक पहुंच जाती है, तब उसमें तैयार सेव डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है ताकि हर टुकड़े पर गुड़ की परत चढ़ जाए, पूरी तरह ठंडा होने के बाद यह कुरकुरा और अलग-अलग हो जाता है.

स्टील या कांच के एयरटाइट कंटेनर में रखने पर गुड़हा सेव एक से तीन महीने तक सुरक्षित रहता है. सेहत के लिहाज से भी यह काफी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि गुड़ आयरन और ग्लूकोज का अच्छा स्रोत होता है. यही वजह है कि बघेलखंड की यह पारंपरिक देसी मिठास आज भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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