Last Updated:
Amla Murabba Recipe : भरतपुर जिले के भुसावर का आंवले का मुरब्बा वर्षों से अपने खास स्वाद और स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. अगर आप भी बाजार जैसा स्वाद घर पर पाना चाहते हैं, तो इसे बनाना बेहद आसान है. सबसे पहले ताजे और बड़े आकार के आंवलों को अच्छी तरह धोकर हल्का उबालें, फिर उनमें छोटे-छोटे छेद करें ताकि चाशनी अंदर तक पहुंच सके. इसके बाद चीनी की गाढ़ी चाशनी तैयार कर उसमें आंवले डालें और स्वाद बढ़ाने के लिए काली मिर्च सहित पारंपरिक मसालों का संतुलित मिश्रण मिलाएं. कुछ दिनों तक चाशनी में रखने के बाद मुरब्बा पूरी तरह तैयार हो जाता है. यह न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि पाचन को बेहतर बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को पोषण देने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि भुसावर का यह पारंपरिक मुरब्बा आज भी लोगों के बीच खास पहचान रखता है.
भरतपुर जिले के भुसावर क्षेत्र का आवले का मुरब्बा अपनी खास मिठास और औषधीय गुणों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. अब आप इस पारंपरिक स्वाद को घर पर भी आसानी से तैयार कर सकते हैं. खास बात यह है कि यह मुरब्बा सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. पेट संबंधी समस्याओं से राहत देने के साथ-साथ यह इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है.
घर पर भुसावर जैसा आवले का मुरब्बा बनाने के लिए सबसे पहले अच्छे ताजे और मोटे आकार के आवलों का चयन करना बेहद जरूरी होता है. गुणवत्ता वाला आंवला ही मुरब्बे के स्वाद को बेहतरीन बनाता है. चयन के बाद इन आवलों को साफ पानी में अच्छी तरह धोया जाता है.ताकि उनमें मौजूद धूल-मिट्टी पूरी तरह निकल जाए.
इसके बाद अगला चरण आता है. आवलों को उबालने का आवलों को हल्का सा उबाल लिया जाता है जिससे वे नरम हो जाएं और उनमें मिठास अच्छी तरह समा सके. उबालने के बाद प्रत्येक आवले में हल्के-हल्के छेद किए जाते हैं. यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसी से चाशनी और मसाले आवले के अंदर तक पहुंच पाते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
अब बारी आती है मसालों की जो इस मुरब्बे को खास स्वाद देते हैं. आमतौर पर इसमें काली मिर्च सहित कई पारंपरिक मसालों का उपयोग किया जाता है. ये मसाले न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि इसे स्वास्थ्यवर्धक भी बनाते हैं. सही मात्रा में मसालों का मिश्रण इस मुरब्बे की पहचान है.
इसके बाद तैयार की जाती है चाशनी. चीनी को पानी में डालकर अच्छी तरह पकाया जाता है. जब तक कि गाढ़ी चाशनी तैयार न हो जाए. चाशनी तैयार होने के बाद उबले हुए आवलों को एक-एक करके इसमें डाल दिया जाता है. फिर इसे ढककर कुछ दिनों के लिए रखा जाता है ताकि आवले पूरी तरह चाशनी को सोख लें.
कुछ दिनों बाद यह मुरब्बा पूरी तरह तैयार हो जाता है. इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है और यह लंबे समय तक सुरक्षित भी रहता है. भुसावर का यह पारंपरिक मुरब्बा न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट है बल्कि शरीर के लिए भी लाभकारी माना जाता है. ऐसे में अब आप भी इसे घर पर बनाकर इसके स्वाद और सेहत के फायदों का आनंद ले सकते हैं.