Salt In Ice Science: गर्मी का मौसम आते ही गलियों में कुल्फी वालों की घंटियों की आवाज माहौल को ठंडा-ठंडा बना देती है. बच्चे हों या बड़े, कुल्फी देखकर हर किसी का मन खुश हो जाता है, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुल्फी वाला अपने बर्फ के डिब्बे में नमक क्यों डालता है? कई लोग इसे मिलावट समझ लेते हैं, जबकि असल में इसके पीछे एक दिलचस्प साइंस छिपा हुआ है. कुल्फी वाला जब बर्फ की सिल्ली तोड़कर उसमें नमक मिलाता है, तब वह सिर्फ बर्फ नहीं जमा रहा होता, बल्कि अपनी कुल्फी को ज्यादा देर तक ठंडा और जमी हुई रखने का तरीका अपना रहा होता है. यही वजह है कि तेज धूप और गर्मी में भी कुल्फी लंबे समय तक नहीं पिघलती.

मजेदार बात ये है कि इस छोटे से ट्रिक से कुल्फी वाले को फायदा भी ज्यादा होता है. बर्फ जल्दी खत्म नहीं होती और कुल्फी भी अच्छी हालत में बनी रहती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर बर्फ और नमक का यह खेल कैसे काम करता है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है.

आखिर बर्फ में नमक क्यों मिलाया जाता है?
कुल्फी वाला जो बर्फ में नमक डालता है, उसका सीधा कनेक्शन साइंस से है. जब साधारण बर्फ में नमक मिलाया जाता है, तब बर्फ का तापमान और नीचे चला जाता है. इससे आसपास का माहौल ज्यादा ठंडा हो जाता है. यही ठंडक कुल्फी को लंबे समय तक जमी हुई रखने में मदद करती है. साधारण बर्फ 0 डिग्री सेल्सियस पर जमती और पिघलती है, लेकिन जैसे ही उसमें नमक मिलाया जाता है, उसका फ्रीजिंग पॉइंट नीचे चला जाता है. मतलब बर्फ को पिघलने के लिए ज्यादा गर्मी चाहिए होती है. इसी वजह से कुल्फी जल्दी नहीं पिघलती.

हिमांक क्या होता है?
साइंस की भाषा में हिमांक यानी Freezing Point उस तापमान को कहते हैं, जहां कोई तरल चीज जमकर ठोस बन जाती है. जैसे पानी 0 डिग्री सेल्सियस पर बर्फ बन जाता है. हर पदार्थ का अपना अलग हिमांक होता है. जब कुल्फी वाला बर्फ में नमक डालता है, तब वह बर्फ के हिमांक को बदल देता है. इससे बर्फ ज्यादा देर तक ठंडी बनी रहती है.

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क्वथनांक का क्या मतलब है?
क्वथनांक यानी Boiling Point वह तापमान होता है, जहां कोई तरल चीज उबलने लगती है. पानी का क्वथनांक 100 डिग्री सेल्सियस माना जाता है. जब पानी इस तापमान तक पहुंचता है, तब वह भाप बनने लगता है. हालांकि कुल्फी वाले के मामले में ज्यादा असर हिमांक पर पड़ता है, लेकिन नमक मिलाने से बर्फ की पूरी प्रक्रिया बदल जाती है. यही वजह है कि बर्फ धीरे-धीरे पिघलती है.

हिमांक में अवनमन क्या होता है?
यह थोड़ा कठिन शब्द जरूर लगता है, लेकिन इसका मतलब बहुत आसान है. जब किसी चीज में नमक जैसा दूसरा पदार्थ मिलाया जाता है, तब उसका जमने का तापमान कम हो जाता है. इसे ही हिमांक में अवनमन कहते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर साफ बर्फ 0 डिग्री पर पिघलती है, तो नमक मिलने के बाद वही बर्फ इससे भी कम तापमान तक ठंडी रह सकती है. यही कारण है कि कुल्फी वाले का डिब्बा ज्यादा देर तक ठंडा बना रहता है.

कुल्फी वाले को कैसे होता है डबल फायदा?
बर्फ में नमक डालने से कुल्फी वाले को दो बड़े फायदे मिलते हैं. पहला फायदा यह कि बर्फ जल्दी खत्म नहीं होती. दूसरा फायदा यह कि कुल्फी लंबे समय तक जमी रहती है और खराब नहीं होती. अगर कुल्फी जल्दी पिघल जाए तो उसका स्वाद और शेप दोनों खराब हो जाते हैं. इससे ग्राहक भी नाराज हो सकते हैं, लेकिन नमक वाली बर्फ कुल्फी को लंबे समय तक सही हालत में रखती है. इससे कुल्फी वाला आराम से ज्यादा समय तक बिक्री कर पाता है.

क्या कुल्फी वाला साइंस जानता है?
दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर कुल्फी वालों को शायद हिमांक, क्वथनांक या साइंस के बड़े-बड़े नियमों के बारे में पता नहीं होता, लेकिन सालों के अनुभव से उन्हें यह समझ आ जाता है कि नमक डालने से बर्फ ज्यादा देर तक चलती है. यही देसी अनुभव आज भी उनके काम आता है.

घर में भी इस्तेमाल होता है यह तरीका
सिर्फ कुल्फी वाले ही नहीं, पुराने समय में लोग घरों में भी इसी तरीके का इस्तेमाल करते थे. जब फ्रिज नहीं हुआ करते थे, तब ठंडी चीजों को ज्यादा देर तक सुरक्षित रखने के लिए बर्फ और नमक का सहारा लिया जाता था. आज भी आइसक्रीम फैक्ट्री और कोल्ड स्टोरेज में तापमान कंट्रोल करने के लिए इसी साइंस का इस्तेमाल किया जाता है.



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