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जमशेदपुर के दालभूमगढ़ मार्ग पर राजू दा का नाश्ता कॉर्नर बेहद प्रसिद्ध है. यहां सिर्फ 5 रुपये में समोसा और 10 रुपये में स्वादिष्ट घुघनी मिलती है. महंगाई के दौर में भी यह किफायती दुकान पिछले चार दशकों से चल रही है. रास्ते से गुजरने वाले लोग यहां रुककर स्वाद का आनंद जरूर लेते हैं.

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जमशेदपुर: झारखंड के लोगों को पारंपरिक और देसी स्वाद हमेशा से पसंद रहा है. खासकर सड़क किनारे मिलने वाले ऐसे व्यंजन, जिनमें घर जैसा स्वाद और अपनापन हो, लोगों को अपनी ओर खींच ही लेते हैं. अगर आप जमशेदपुर से घाटशिला की ओर जाने वाले मार्ग पर दालभूमगढ़ के रास्ते ढाईकुसुम गांव की तरफ बढ़ते हैं, तो आपको एक ऐसी जगह मिलेगी जो न केवल स्वाद के लिए बल्कि अपनी सादगी और किफायती कीमतों के लिए भी प्रसिद्ध है. यह है राजू दा का नाश्ता कॉर्नर, जो पिछले चार दशकों से लोगों की जुबान पर अपना स्वाद छोड़ रहा है.

ढाईकुसुम गांव की ओर जाने वाला यह रास्ता अपने आप में बेहद खूबसूरत है. सड़क के दोनों ओर फैली हरियाली, ऊंचे-ऊंचे पेड़ और शांत वातावरण इसे लॉन्ग ड्राइव के शौकीनों के लिए परफेक्ट बनाते हैं. सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में लोग इस मार्ग पर घूमने निकलते हैं. लेकिन जैसे ही उनकी नजर राजू दा के नाश्ता कॉर्नर पर पड़ती है, वे अपनी गाड़ी रोकने से खुद को रोक नहीं पाते.

₹10 प्लेट घुघनी
इस दुकान की सबसे बड़ी पहचान है यहां मिलने वाली मटर वाली घुघनी. मात्र ₹10 प्रति प्लेट में मिलने वाली यह घुघनी स्वाद और मात्रा दोनों में लोगों का दिल जीत लेती है. उबले हुए मटर में खास मसालों का तड़का लगाया जाता है, फिर ऊपर से बारीक कटा प्याज, मसाला और सेव डालकर इसे परोसा जाता है. स्वाद ऐसा कि एक बार खाने वाला दोबारा जरूर लौटे. कई बार तो यहां ग्राहकों की इतनी भीड़ लग जाती है कि सड़क पर वाहनों की कतार तक लग जाती है.

महंगाई के इस दौर में जहां छोटी-सी चीज भी महंगी हो गई है, वहीं राजू दा आज भी अपने पुराने अंदाज में लोगों को किफायती नाश्ता उपलब्ध करा रहे हैं. यहां मात्र ₹5 में समोसा, पियाजी और आलू बोंडा मिल जाता है. यही वजह है कि आसपास के ग्रामीणों से लेकर शहर से आने वाले लोग भी यहां रुककर नाश्ते का आनंद लेते हैं. शाम के समय यहां मिलने वाली ₹10 की वेजिटेबल चाऊमीन भी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है.

रास्ते से गुजरने वाले जरूर रुकते यहां
स्थानीय निवासी अविनाश बताते हैं कि जब भी वे इस मार्ग से गुजरते हैं, यहां रुककर नाश्ता जरूर करते हैं. उनके अनुसार, कम कीमत में इतना अच्छा स्वाद कहीं और मिलना मुश्किल है. वहीं, राम लखन हंसते हुए कहते हैं कि कई बार घर में सिर्फ रोटी बनानी पड़ती है, क्योंकि मटर की सब्जी यानी घुघनी तो वे यहीं से पैक कराकर ले जाते हैं.

चार दशक पुराना राजू दा का नाश्ता कॉर्नर आज सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि स्वाद और परंपरा की पहचान बन चुका है. जो भी इस मार्ग से गुजरता है, वह यहां के स्वाद को याद रखता है. यही कारण है कि यह छोटा-सा नाश्ता केंद्र आज दालभूमगढ़ क्षेत्र के सबसे चर्चित फूड स्टॉप्स में गिना जाता है.

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Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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