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Recipe Special : भरतपुर के मेवात क्षेत्र का खास जलेबा इन दिनों लोगों के बीच खासा लोकप्रिय है. जलेबी जैसा दिखने वाला यह जलेबा आकार में बड़ा और स्वाद में बिल्कुल अलग होता है. देसी घी और तेल दोनों में बनने वाली यह मिठाई अपनी अनोखी बनाने की प्रक्रिया और पारंपरिक स्वाद के कारण दूर-दूर से लोगों को आकर्षित कर रही है.

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भरतपुर : राजस्थान के भरतपुर के मेवात क्षेत्र की पहचान सिर्फ अपनी संस्कृति से ही नहीं बल्कि यहां के खास व्यंजनों से भी जुड़ी हुई है. इन्हीं में से एक है, जलेबा जो दिखने में जलेबी जैसा जरूर होती है. लेकिन आकार में उससे काफी बड़ा और स्वाद में बिल्कुल अलग होता है. मेवात इलाके में यह खास मिठाई काफी लोकप्रिय है. और स्थानीय लोगों की पहली पसंद मानी जाती है. अगर इसके बनाने की प्रक्रिया की बात करें तो जलेबा तैयार करने का तरीका भी बेहद खास होता है.

इसे बनाने के लिए सबसे पहले मैदे का घोल एक दिन पहले ही तैयार कर लिया जाता है. जिसे स्थानीय भाषा में लगेज कहा जाता है. इस घोल को अच्छे से उठाने के लिए रातभर रखा जाता है. जिससे इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. अगले दिन इस तैयार लगेज़ में जरूरत के अनुसार अन्य सामग्री मिलाई जाती है. इसके बाद बारी आती है, जलेबा बनाने की जो सामान्य जलेबी से काफी अलग प्रक्रिया है. जलेबा को बड़े आकार में बनाने के लिए इस घोल को कपड़े में भरकर कढ़ाई में डाला जाता है.

देसी घी और तेल में बनता खास जलेबा
खास बात यह है, कि इसे दो तरीकों से तैयार किया जाता है. एक देसी घी में और दूसरा तेल में. देसी घी में बने जलेबा का स्वाद ज्यादा रिच और खुशबूदार होता है. वहीं तेल में बने जलेबा आम लोगों के बजट में आसानी से आ जाते हैं. कढ़ाई में धीमी आंच पर इन्हें तब तक पकाया जाता है. जब तक ये अच्छे से कुरकुरे और सुनहरे न हो जाएं इसके बाद तैयार जलेबा को चाशनी में डाला जाता है. जहां यह कुछ समय तक डूबा रहता है. ताकि इसमें मिठास अच्छी तरह समा जाए फिर इन्हें बाहर निकालकर ठंडा किया जाता है. और इस तरह मेवात का खास जलेबा बनकर तैयार हो जाता है.

मेवात का जलेबा स्वाद और परंपरा की पहचान
कीमत की बात करें तो देसी घी में बने जलेबा की कीमत करीब 300 रुपये प्रति किलो तक होती है. जबकि तेल में बने जलेबा 80 से 100 रुपये प्रति किलो के बीच मिल जाते हैं. मेवात का यह जलेबा सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि यहां की पारंपरिक स्वाद और संस्कृति की पहचान बन चुका है. जिसे खाने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं.

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Rupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at News18 India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें



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