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देसी सब्जी का स्वाद है लाजवाब! मिर्ची के साथ बनती है खट्टी-मीठी रेसिपी

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Monsoon Special Recipe: बरसात का मौसम कई दुर्लभ और पारंपरिक देसी सब्जियों का मौसम भी होता है. इन्हीं में से एक ऐसी मौसमी सब्जी है, जो सिर्फ करीब तीन महीने ही बाजार में उपलब्ध रहती है. ग्रामीण इलाकों में इसे हरी मिर्च और पारंपरिक मसालों के साथ खट्टी-मीठी शैली में बनाया जाता है, जिसका स्वाद बेहद खास माना जाता है. यह मौसमी सब्जी पोषक तत्वों से भरपूर होती है और स्थानीय खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. मानसून के दौरान इसका स्वाद सबसे बेहतर माना जाता है, इसलिए इसे मौसम की खास सौगात के रूप में बड़े चाव से खाया जाता है.

बरसात का मौसम आते ही बाजारों में कई ऐसी मौसमी सब्जियां और फल नजर आने लगते हैं, जिनका लोग पूरे साल इंतजार करते हैं. इन्हीं में एक है करोजा. बेर के आकार का दिखने वाला यह छोटा-सा फलनुमा सब्जी रूपी करोंदा स्वाद में इतना खास होता है कि देसी मिर्च के साथ इसकी खट्टी-मीठी सब्जी लोगों की पहली पसंद बन जाती है.

आज भी बड़ी संख्या में लोग इसके स्वाद और उपयोग से पूरी तरह परिचित नहीं हैं. करौली सहित पूर्वी राजस्थान के बाजारों में करोंदा केवल बारिश के मौसम में, लगभग जुलाई से सितंबर तक ही देखने को मिलता है. सीमित समय तक उपलब्ध रहने के कारण इसकी कीमत भी शुरुआत में अधिक रहती है.

सब्जी व्यापारियों के अनुसार करोंदे की सबसे बड़ी खासियत इसका प्राकृतिक खट्टापन है. यही वजह है कि इसे कई व्यंजनों में खटाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. देसी हरी मिर्च के साथ इसकी खट्टी-मीठी सब्जी का स्वाद बेहद लाजवाब होता है. इसके अलावा करोंदे का अचार, चटनी और मुरब्बा भी बड़े चाव से खाया जाता है.

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सब्जी व्यापारी असलम खान बताते हैं कि मौसम की शुरुआत में करोंदा करीब 40 रुपये पाव तक बिकता है. जैसे-जैसे आवक बढ़ती है, कीमत घटकर करीब 20 रुपये पाव तक पहुंच जाती है. हालांकि उत्पादन सीमित होने के कारण यह पूरे सीजन में अन्य मौसमी सब्जियों की तुलना में महंगा ही बना रहता है.

करोंदा केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, जिंक और फाइबर जैसे पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है, जबकि फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर रखने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में सहायक माना जाता है.

बरसात के मौसम में यदि आपको बाजार में करोंदा दिखाई दे, तो देसी मिर्च के साथ इसकी पारंपरिक खट्टी-मीठी सब्जी का स्वाद जरूर लें. यह मौसमी देसी स्वाद आज भी कई लोगों के लिए किसी अनजाने खजाने से कम नहीं है.

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