Last Updated:
Gudhal ki chai ke fayde : क्या आपने कभी गुड़हल के फूलों की चाय पी है. फरीदाबाद के रहने वाले अनुराग जैन लाल और सफेद गुड़हल के फूलों से चाय तैयार करते हैं. लोकल 18 से अनुराग बताते हैं कि चाय बनाने के लिए पहले पानी उबालकर उसमें साफ किए हुए फूल डालें और 2-4 उबाल आने दें. स्वाद के लिए दालचीनी, इलायची, अदरक, आंवला या नींबू भी मिलाया जा सकता है. लाल गुड़हल का फूल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. स्वाद और रंग भी लाल फूल वाली चाय में अच्छा आता है. ज्यादा देर तक फूल को उबालने की जरूरत नहीं. पानी और फूल की मात्रा अपने स्वाद के हिसाब से रखें.
क्या आपने कभी गुड़हल के फूलों की चाय पी है. अगर नहीं तो यह स्टोरी आपके लिए है. जिस तरह अपराजिता के फूलों की चाय बनाकर पी जाती है, उसी तरह गुड़हल के लाल और सफेद फूलों से भी चाय तैयार की जाती है. फरीदाबाद के सेक्टर 37 में रहने वाले अनुराग जैन गुड़हल के फूलों की चाय बनाते हैं. उनका कहना है कि इसके लिए लाल और सफेद दोनों तरह के फूल इस्तेमाल किए जा सकते हैं. हालांकि वह लाल फूल की चाय ज्यादा बनाते हैं.
अनुराग जैन बताते हैं कि गुड़हल के फूलों की चाय इसके लिए लाल और सफेद दोनों फूल इस्तेमाल करता हूं. दोनों फूलों से चाय बनाई जा सकती है. दोनों फूलों में गुण तो होते हैं, लेकिन इनमें थोड़ा फर्क भी माना जाता है. लाल गुड़हल का फूल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, इसलिए मैं ज्यादातर लाल फूल की ही चाय बनाता हूं. स्वाद और रंग भी लाल फूल वाली चाय में अच्छा आता है.
अनुराग जैन के मुताबिक, चाय बनाते समय सबसे पहले पानी को अच्छी तरह उबालता हूं. शुरुआत में पानी के अंदर गुड़हल का फूल नहीं डालना चाहिए. पहले पानी को उबलने देना चाहिए. अगर चाय में हल्की मिठास चाहिए तो उसमें थोड़ी सी दालचीनी डाली जा सकती है. स्वाद के हिसाब से इलायची और अदरक भी डाल सकते हैं. इन चीजों से चाय का स्वाद बदल जाता है और चाय पीने में भी अच्छी लगती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
अनुराग जैन बताते हैं कि फूल डालने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच करता हूं. गुड़हल के फूल के बीच वाले हिस्से को जरूर देख लेना चाहिए कि उसमें कोई कीड़ा या गंदगी तो नहीं है. फूल को साफ करने के बाद उसके पंखुड़ी वाले हिस्से और पुंकेसर वाले हिस्से को पानी में डाला जाता है. फूल को सीधे बिना जांचे पानी में डालने से बचना चाहिए. साफ फूल से ही चाय तैयार करनी चाहिए.
अनुराग जैन के अनुसार, जब पानी में फूल डाल देता हूं तो उसे दो से चार उबाल आने देता हूं. उबाल आने के साथ ही गुड़हल का फूल पानी में अपना रंग छोड़ने लगता है. धीरे-धीरे पानी का रंग भी बदल जाता है और चाय तैयार होने लगती है. ज्यादा देर तक फूल को उबालने की जरूरत नहीं होती है. चाय बनाते समय पानी और फूल की मात्रा अपने स्वाद के हिसाब से रखी जा सकती है.
अनुराग जैन बताते हैं कि अगर घर में आंवला मौजूद है तो उसे भी चाय बनाते समय इस्तेमाल किया जा सकता है. पानी उबलते समय आंवला डाला जा सकता है. अगर आंवला नहीं है तो चाय तैयार होने के बाद इसमें थोड़ा सा नींबू का रस निचोड़ सकते हैं. नींबू डालने से चाय का स्वाद अलग हो जाता है. इसे अपनी पसंद के मुताबिक कम या ज्यादा रखा जा सकता है.
अनुराग जैन बताते हैं कि मैं गुड़हल के फूलों की चाय बनाकर जरूर पीता हूं, लेकिन इसे रोज नहीं पीता. वे कभी-कभी इस चाय को बनाते हैं. चाय बनाने के लिए सबसे जरूरी है कि घर में ताजे और साफ गुड़हल के फूल मौजूद हों. फूल उपलब्ध होने पर इसे आसानी से घर पर तैयार किया जा सकता है. गुड़हल के फूलों की चाय सामान्य चाय से थोड़ी अलग होती है.
अगर आप भी इस देसी ड्रिंक को आजमाना चाहते हैं तो शुरुआत कम मात्रा से करें. पहली बार तैयार करते समय इसका स्वाद देखकर ही इसमें मीठा या खट्टापन बढ़ाएं. बाजार में मिलने वाले सजावटी फूलों की जगह खाने योग्य और बिना रसायन वाले फूल लेना बेहतर रहेगा. किसी खास बीमारी या दवा का सेवन करने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.