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इस सतुआ की खासियत है कि इसे कई तरह से डाइट में शामिल किया जा सकता है. इसे शर्बत के अलावा लड्डू, पराठा, चीला, बाटी और मिठाई के रूप में भी खाया जाता है. अगर कोई हाई प्रोटीन डाइट लेना चाहता है तो
Summer Health Tips: गर्मियों की तपती दोपहर में जब शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों की जरूरत होती है, तब बघेलखंडी स्टाइल में बनने वाला सतुआ लोगों की पहली पसंद बन जाता है. यह सिर्फ एक देसी पेय या भोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी खानपान परंपरा का हिस्सा है जो आज के समय में सुपरफूड के रूप में पहचान बना रहा है. खास बात ये कि बघेलखंड का सतुआ, बिहार के सत्तू से स्वाद और बनाने की विधि व उपयोग के तरीके में अलग पहचान रखता है, जो इसे और भी खास बनाता है.
बनाने का तरीका, स्वाद की खासियत
वैसे तो लगभग हर जगह सतुआ तैयार करने का तरीका सेम ही है. लेकिन, बघेलखंड में चने के साथ जौ या मक्के को भूनकर पीसा जाता है, जिससे इसका स्वाद हल्का स्मोकी और देसी फ्लेवर वाला हो जाता है. ग्रामीण इलाकों में इसे घरों में ही पारंपरिक चक्की या सिलबट्टे से तैयार किया जाता है, जिससे इसकी खुशबू और पोषण बरकरार रहता है. यही वजह है कि यहां का सतुआ सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि लोकल पहचान बन चुका है.
पोषण का पावरहाउस, हर उम्र के लिए फायदेमंद
डायटिशियन ममता पांडे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सत्तू प्रोटीन और फाइबर से भरपूर एक न्यूट्रिशियस फूड है. वेजिटेरियंस के लिए प्रोटीन का ये सबसे अच्छा सोर्स होता है. करीब 100 ग्राम सत्तू में 18-20 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है. इसमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर मौजूद होते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने के साथ शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देते हैं. साथ ही इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने की वजह से यह डायबिटीज मरीजों के लिए भी सुरक्षित विकल्प माना जाता है. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के साथ साथ वजन घटाने में भी मदद करता है.
गर्मियों में ठंडक का देसी उपाय
गर्मी के मौसम में सतुआ का शर्बत सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. ठंडे पानी में सत्तू, मिश्री या नमक मिलाकर तैयार किया गया यह पेय शरीर को तुरंत ठंडक देता है और लू से बचाने में मदद करता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग घर से निकलते समय सत्तू का सेवन करना नहीं भूलते. इसके अलावा इसे छाछ, सलाद या सीजनल फलों के साथ मिलाकर स्मूदी के रूप में भी लिया जाता है जो इसे और ज्यादा हेल्दी बना देता है.
डाइट में शामिल करने के कई आसान तरीके
इस सतुआ की खासियत है कि इसे कई तरह से डाइट में शामिल किया जा सकता है. इसे शर्बत के अलावा लड्डू, पराठा, चीला, बाटी और मिठाई के रूप में भी खाया जाता है. अगर कोई हाई प्रोटीन डाइट लेना चाहता है तो इसे दूध या दही के साथ मिलाकर सेवन करने से इसके पोषक तत्व और बढ़ जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार इसका नियमित सेवन दिनभर की प्रोटीन जरूरत का 30-40% तक पूरा कर सकता है।
स्थानीय नाम और सांस्कृतिक जुड़ाव
देश भर में सत्तू को अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे सतुआ, सतुआन, सातु या सतुआइन. आज के दौर में जब लोग महंगे हेल्थ सप्लीमेंट्स की ओर बढ़ रहे हैं ऐसे में बघेलखण्ड का सतुआ एक सस्ता प्राकृतिक और असरदार विकल्प बनकर सामने आया है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि पोषण से भरपूर होकर सेहत का भी ख्याल रखता है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें