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Desi Bhinda Recipe: देसी भिंडा देखने में सामान्य भिंडी जैसा ही नजर आता है, लेकिन इसकी लंबाई काफी छोटी होती है. इसके ऊपर बारीक कांटे होते हैं, जो इसे बाजार में मिलने वाली सामान्य भिंडी से अलग पहचान देते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, कांटेदार होने के बावजूद इसकी सब्जी बेहद स्वादिष्ट बनती है.
सब्जी बाजार में मिलने वाली लंबी और चिकनी भिंडी तो आपने खूब खाई होगी, लेकिन राजस्थान के करौली क्षेत्र में आज भी एक ऐसी देसी सब्जी मिलती है, जो दिखने में भिंडी जैसी है, मगर आकार में छोटी और ऊपर से कांटेदार होती है. स्थानीय लोग इसे देसी भिंडा के नाम से जानते हैं. खास बात यह है कि इसका स्वाद आम भिंडी से बिल्कुल अलग माना जाता है और यें केवल 2 महीने के लिए ही सब्जी बाजारों में आता है.
इन दिनों करौली की सब्जी मंडी में देसी भिंडे की आवक देखने को मिल रही है. ग्रामीण क्षेत्रों से किसान इसे मंडी में लेकर पहुंच रहे हैं. कम समय के लिए मिलने वाली इस सब्जी को खरीदने के लिए स्थानीय लोगों में खासा उत्साह रहता है.कई लोग इसे पुरानी देसी किस्म की सब्जी बताते हैं, जिसका स्वाद आज भी लोगों को अपनी ओर खींचता है.
यह देसी भिंडा देखने में सामान्य भिंडी जैसा ही नजर आता है, लेकिन इसकी लंबाई काफी छोटी होती है. इसके ऊपर बारीक कांटे होते हैं, जो इसे बाजार में मिलने वाली सामान्य भिंडी से अलग पहचान देते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, कांटेदार होने के बावजूद इसकी सब्जी बेहद स्वादिष्ट बनती है.
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करौली सब्जी मंडी में सब्जी खरीदने पहुंचे गोपाल लाल शर्मा बताते हैं कि देसी भिंडा पुराने समय से ग्रामीण क्षेत्रों में खाया जाता रहा है. उनके अनुसार, इसका स्वाद सामान्य भिंडी से अलग और ज्यादा देसी होता है. यही वजह है कि इसे पसंद करने वाले लोग सीजन में इसका इंतजार करते हैं.
स्थानीय सब्जी व्यापारियों के अनुसार, करौली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में आज भी इस देसी भिंडे की खेती पारंपरिक तरीके से की जाती है. किसान इसे स्थानीय देसी बीज से तैयार करते हैं. इसी वजह से इसकी पैदावार सामान्य भिंडी की तुलना में सीमित रहती है.
सब्जी व्यापारी पिंटू सैनी के मुताबिक, देसी भिंडे की आवक कम होने के कारण इसका भाव भी सामान्य भिंडी की तुलना में अधिक रहता है. इन दिनों यह करीब 50 से 60 रुपए किलो तक बिक रहा है. उन्होंने बताया कि इस सब्जी को खासतौर पर बुजुर्ग लोग अधिक पसंद करते हैं और पानी वाली सब्जी के रूप में इसका स्वाद अच्छा माना जाता है.
यह देसी भिंडा करौली शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ही ज्यादा पैदा होता है. इसकी उपलब्धता का समय भी सीमित है. साल में करीब दो महीने ही यह सब्जी मंडियों और स्थानीय बाजारों में नजर आती है. सब्जी व्यापारीयों के अनुसार, सीमित समय के लिए मिलने और स्वाद में अलग होने के कारण इसकी मांग बनी रहती है. सीजन खत्म होते ही बाजार से यह देसी भिंडा भी गायब हो जाता है.