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Genhari Saag Recipe: मिथिलांचल के खेतों में उगने वाला गेनहारी साग, जिसे चौलाई या अमरंथ भी कहते हैं. यह सेहत और स्वाद दोनों का खजाना है. यह बहुत जल्दी गल जाता है और ज्यादा मसाले में भी नहीं बनता है. नमक और लहसुन का साथ मिल जाए तो थाली की शान बन जाता है. मिथिला की गृहिणी सपना चौधरी कहती हैं कि गेनहारी को कम तेल, कम मसाला और धीमें आंच में पकाया जाता है. तभी इसका असली स्वाद निखरता है. आइये जानते हैं इसे कैसे बनाएं.

गेनहारी साग बनाने के लिए सबसे पहले इसकी मात्रा 500 ग्राम हो, साफ और बारीक कटी लहसुन 8-10 की कलियां, बारीक कटी हरी मिर्च 3-4, बारीक कटी मेथी दाना आधा छोटा चम्मच, सरसों का तेल 1-2 बड़ा चम्मच, नमक स्वादानुसार होना चाहिए. तभी यह शानदार तरीके से बनकर तैयार होगा.

सफाई और कटाई के बाद साग को 2-3 बार खूब पानी से धोएं ताकि मिट्टी पूरी निकल जाए. डंठल नरम हो तो उन्हें भी काट लें. फिर चाकू से बारीक काट लें. फिर लोहे की कड़ाही में सरसों तेल गरम करें. धुआं उठने पर आंच धीमी करें. मेथी दाना डालें. मेथी चटकते ही कटा लहसुन और हरी मिर्च डालें. लहसुन सुनहरा होते ही खुशबू उठने लगेगी.

अब कटी गेनहारी कड़ाही में डालें. एक बार चला लें. ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर मिनट छोड़ दें. साग अपना पानी छोड़ देगा और गलने लगेगा. ढक्कन हटाकर स्वादानुसार नमक डालें. फिर से ढककर तब तक पकाएं. जब तक पानी सूख न जाए और साग नरम न हो जाए. फिर ढक्कन हटाएं.

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तेज आंच पर 1-2 मिनट चलाते हुए भूनें. इससे बचा हुआ पानी उड़ जाएगा और साग खिलाखिला हो जाएगा. लहसुन खुलकर डालें, गेनहारी का असली स्वाद लहसुन से आता है. कड़वाहट हटाएं: कभी-कभी साग हल्का कड़वा लगता है. काटने के बाद उसे नमक वाले पानी में 5 मिनट भिगो दें, फिर धोकर इस्तेमाल करें. कड़वाहट गायब हो जाएगी.

यह साग जल्दी गलता है, इसलिए 1-2 चम्मच तेल ही काफी है. ज्यादा तेल स्वाद दबा देता है. गरम-गरम गेनहारी साग को भात, मक्के की रोटी या सादी रोटी के साथ परोसें. ऊपर से कच्ची पियाज और हरी मिर्च कुचलकर रख दें. मिथिला की थाली पूरी. कम खर्च, कम मेहनत और सेहत भरपूर होती है. यही है गेनहारी साग की पहचान है.

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