दाल भारतीय भोजन थाली का एक अहम हिस्सा है और लगभग हर घर में रोजाना किसी न किसी रूप में बनाई जाती है. दाल को भिगोने से वह जल्दी पकती है, नरम हो जाती है और पाचन में भी मदद मिल सकती है. इसलिए दाल को बनाने से पहले इसे पानी में भिगोना जरूरी माना जाता है. लेकिन सभी तरह की दालों को भगोकर रखने का समय अलग-अलग होता है. जबकि कई लोग हर दाल को रातभर पानी में छोड़ देते हैं, जो कि जरूरी नहीं होता.

दरअसल, हर दालों की बनावट और आकार अलग होती हैं, इसलिए उन्हें भिगोने का समय भी अलग-अलग होता है. हालांकि, छोटी और छिलका रहित दालों को लंबे समय तक भिगोने की जरूरत नहीं होती, जबकि साबुत और सख्त दालों को ज्यादा समय चाहिए होता है. इसलिए अगली बार दाल भिगोने से पहले यह जानना जरूरी है कि आप कौन-सी दाल इस्तेमाल कर रहे हैं और उसे कितनी देर तक भिगोना चाहिए.

मूंग दाल
पीली धुली मूंग दाल सबसे जल्दी पकने वाली दालों में से एक है. इसे लंबे समय तक भिगोने की जरूरत नहीं पड़ती. वहीं, साबुत हरी मूंग के ऊपर छिलका होता है, इसलिए इसे कुछ घंटों तक भिगोना बेहतर माना जाता है. अंकुरित मूंग बनाने के लिए भी इसे अच्छी तरह भिगोया जाता है.

मसूर दाल
मसूर दाल भी जल्दी पक जाती है और इसे आमतौर पर रातभर भिगोने की जरूरत नहीं होती. यदि आप इसे और नरम बनाना चाहते हैं तो थोड़ी देर के लिए भिगो सकते हैं, लेकिन डेली की कुकिंग में यह जरूरी नहीं है.

चना दाल
चना दाल अन्य कई दालों की तुलना में अधिक सख्त होती है. पकने के बाद भी इसका आकार बना रहता है. इसलिए इसे कुछ घंटों तक भिगोने से यह जल्दी और समान रूप से पकती है. इससे पकाने में लगने वाला समय भी कम हो सकता है.

उड़द दाल
साबुत उड़द दाल का बाहरी छिलका काफी सख्त होता है, इसलिए इसे कई घंटों तक भिगोना फायदेमंद रहता है. इडली और डोसा का बैटर तैयार करने के लिए भी उड़द दाल को पहले भिगोया जाता है, जिससे पीसने और फर्मेंटेशन में आसानी होती है.

क्या हर दाल को भिगोना जरूरी है?
इस सवाल का जवाब है, नहीं. सभी दालों के लिए एक जैसा नियम नहीं है. धुली और छोटी दालें बिना भिगोए भी आसानी से पक जाती हैं, जबकि साबुत और बड़े दाने वाली दालों को अधिक समय तक भिगोना पड़ सकता है. एक आसान नियम याद रखें जितनी बड़ी और सख्त दाल होगी, उसे उतनी ज्यादा देर भिगोने की जरूरत होगी. साथ ही, दाल भिगोने के बाद पकाने के लिए ताजा पानी इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. इससे दाल का स्वाद और गुणवत्ता दोनों बेहतर रहती हैं.



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