Last Updated:

Ranchi Famous Pakori Stall: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी ग्राउंड के ठीक सामने आपको लकड़ी के चूल्हे पर बड़ी सी कढ़ाई में पकौड़ी तलती हुई वीणा देवी दिखाई देंगी. वीणा देवी कभी पार्क में झाड़ू लगाने का काम करती थीं. लेकिन फिर उन्होंने पकौड़ी बेचना शुरू किया. आज भी वह लकड़ी की आंच पर पकौड़ी बनाती हैं. वे बेसन का 20 किलो एक झोला लेकर ही बैठती हैं, जो 2 से 3 घंटे के अंदर ही खत्म हो जाता है.

100 प्लेट की बिक्री तो आराम से हो जाती है. एक प्लेट की कीमत ₹25 होती है. हर दिन अच्छी खासी कमाई हो रही है. यहां पर आपको बड़ी-बड़ी कारों से आने वाले लोग पकौड़ी का मजा लेते नजर आएंगे. कई बार तो 25 लाख रुपए की कार से केवल ₹25 की पकौड़ी खाने के लिए उतरते हैं.

यहां पर पकौड़ी खा रहे नितेश बताते हैं, मैडम यहां 25 लाख और 30 लाख की गाड़ी से सिर्फ 25-30 रुपए की पकौड़ी खाने के लिए लोग आते हैं, जैसे फॉर्च्यूनर और दूसरी बड़ी लग्जरी गाड़ियों से. यहां का स्वाद ऐसा है, एकदम क्रिस्पी व एकदम क्रंची. लकड़ी की धीमी आंच में पकता है तो इसका स्वाद और निखरकर आता है. हम लोग तो यहां के रेगुलर ग्राहक हैं, हर दूसरे दिन आते हैं.

वीणा देवी बताती हैं, हम लोग बहुत ज्यादा चीजों का इस्तेमाल नहीं करते. केवल बेसन, पत्ता गोभी, थोड़ा सा प्याज, दो-तीन तरह के मसाले और नमक. बस यही चार-पांच चीजों का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने बताया, जितना कम चीजों का इस्तेमाल करिए उतना अच्छा है. लकड़ी की आंच की वजह से यह बहुत अच्छा पकता है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

जब पकौड़ी डालते हैं, उस समय तेल एकदम गरम होना चाहिए और चलाते रहना है, तभी क्रिस्पी होगा. वीणा आगे बताती हैं, यहां पर धनिया की चटनी के साथ परोसते हैं. 20 किलो बेसन तो देखते ही देखते खत्म हो जाता है.

मेरा बेटा इसमें सहयोग करता है, वह परोसने का काम करता है. और मैं बनाती हूं. कभी पार्क में झाड़ू लगाती थी तो दिन का 50 रुपए मिलता था. आज दिन का 2000 तक की बिक्री होती है. देर से ही सही, पर मेरी जिंदगी बदल गई.



Source link

Write A Comment