सत्तू भारतीय पारंपरिक खाद्य पदार्थों में से एक है, जो खासकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बहुत लोकप्रिय है. यह गर्मियों में ठंडक देने वाला, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर आहार माना जाता है. सत्तू को अलग‑अलग अनाजों को भूनकर पीसकर बनाया जाता है, जिससे इसके कई प्रकार होते हैं.
सत्तू के प्रकार
1. चने का सत्तू
यह सबसे ज्यादा प्रचलित सत्तू है, जो भुने हुए चने को पीसकर बनाया जाता है.
यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है और शरीर को ताकत देता है.
2. जौ का सत्तू
जौ को भूनकर बनाया गया सत्तू ठंडक देने में बहुत असरदार होता है.
यह पाचन के लिए अच्छा है और गर्मियों में खास तौर पर उपयोगी माना जाता है.
3. गेहूं का सत्तू
भुने हुए गेहूं से तैयार सत्तू ऊर्जा का अच्छा स्रोत होता है.
इसे मीठे पेय या लड्डू बनाने में अधिक प्रयोग किया जाता है.
4. मिक्स सत्तू
कुछ जगहों पर चना, जौ और गेहूं को मिलाकर भी सत्तू तैयार किया जाता है.
इससे पोषण का संतुलन बढ़ जाता है और स्वाद भी बेहतर होता है.
सत्तू बनाने का तरीका
1. अनाज का चयन
सबसे पहले साफ और अच्छी गुणवत्ता वाले चना, जौ या गेहूं लें.
2. भूनना
इन अनाजों को धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनें, जब तक इनमें हल्की खुशबू न आने लगे.
इससे सत्तू लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और स्वाद भी बेहतर होता है.
3. ठंडा करना
भुने हुए अनाज को ठंडा होने दें, ताकि पीसने में आसानी हो.
4. पीसना
अब इन्हें चक्की या मिक्सर में बारीक पीस लें.
ध्यान रखें कि पाउडर बिलकुल महीन हो.
5. छानना और स्टोर करना
पिसे हुए सत्तू को छानकर एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें.
इसे सूखी और ठंडी जगह पर स्टोर करें.
सत्तू का उपयोग
सत्तू का शरबत
सत्तू का पराठा
लड्डू या मीठा सत्तू
नमकीन घोल
फायदे
शरीर को ठंडक देता है.
लंबे समय तक ऊर्जा देता है.
पाचन में मदद करता है.
वजन संतुलित रखने में सहायक.
निष्कर्ष
सत्तू एक सस्ता, पौष्टिक और पारंपरिक सुपरफूड है, जो अलग‑अलग अनाजों से बनाया जा सकता है. सही तरीके से तैयार सत्तू गर्मियों में सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है.