चंद्रशेखर आज़ाद भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और अमर क्रांतिकारी थे। उनका पूरा नाम चंद्रशेखर सीताराम तिवारी था। भारतीय स्वाधीनता संग्राम में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है। महज 15 वर्ष की उम्र में असहयोग आंदोलन में भाग लेने पर जब उन्हें ब्रिटिश जज के सामने पेश किया गया, तो उन्होंने अपना नाम ‘आज़ाद’, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और अपना पता ‘जेल की कोठरी’ बताया था। तभी से वे ‘आज़ाद’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और साथियों के बलिदान के बाद उन्होंने ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ को पुनर्गठित कर ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ का रूप दिया। उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अपने सिद्धांतों और देश के प्रति समर्पण से पीछे नहीं हटना चाहिए। ऐसे में आज उनकी जयंती के मौके पर यहां हम उनके कुछ प्रेरिक विचार लेकर आए हैं। यहां पढ़ें उनके मोटिवेशनल कोट्स।
मैं अपने संपूर्ण जीवन की अंतिम सांस तक देश के लिए शत्रु से लड़ता रहूंगा।
दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे।
मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और मेरा घर ‘जेल’ है।
यदि कोई युवा मातृभूमि की सेवा नहीं करता है, तो उसका जीवन व्यर्थ है।
अगर आपके लहू में रोष नहीं है, तो ये पानी है जो आपकी रगों में बह रहा है। ऐसी जवानी का क्या मतलब अगर वो मातृभूमि के काम ना आए।
दूसरों को खुद से आगे बढ़ते हुए मत देखो। प्रतिदिन अपने खुद के कीर्तिमान तोड़ो, क्योंकि सफलता आपकी अपने आप से एक लड़ाई है।
मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।
चिंगारी आजादी की सुलगती मेरे जिस्म में हैं। इंकलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में हैं। मौत जहां जन्नत हो यह बात मेरे वतन में है। कुर्बानी का जज्बा जिंदा मेरे कफन में है।
संघर्ष ही जीवन की सबसे बड़ी सीख है,हिम्मत ही हर जीत की सही राह है। जो मुश्किलों से डरकर रुक जाए, उसके सपनों की मंजिल दूर है।
मिट्टी की खुशबू पहचान बन जाए, देशभक्ति जीवन का अभिमान बन जाए। हर दिल में ऐसा जज्बा जागे, भारत हमेशा सबसे महान बन जाए।