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सिर्फ चाय नहीं, सुकून का ठिकाना! पूर्वी चम्पारण यहां की वाइब के आगे सब फेल

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East Champaran Best Tea Stall: बिहार के पूर्वी चंपारण में यहां की टी स्पॉट काफी मशहूर है. छपवा से सुगौली और रक्सौल जाने वाले रास्ते में सिकरहना नदी के ऊपर एक पुल बना है. इस पुल के पास हीं चाय की कई दुकानें हैं. बता दें कि यहां की चाय काफी प्रसिद्ध है. आते-जाते राहगीरो के अलावा आस-पास के क्षेत्र कई लोग यहां चाय पीने आते हैं. कुल्हड़ में भैंस के दूध वाली चाय और नदी व मंदिर का नजारा राहगीरों को खास आकर्षित करता है. (आदित्य गौरव/पूर्व चंपारण)

बिहार में चाय पीने वालों की कमी नहीं है. बहुत से लोगों का मानना है कि एक कप चाय पी लेने से उनकी थकावट दूर होती है. उन्हें नई ताजगी महसूस होती है. बहुत से लोग घर पे हीं चाय बना के पीना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग दोस्तों के साथ शहर के टी स्पॉट पर जाकर चाय पीना पसंद करते हैं. बिहार के विभिन्न शहरों में कई टी स्पॉट देखने को मिलते हैं. ऐसा हीं एक विशेष टी स्पॉट पूर्वी चंपारण जिले में भी है. आइए जानते हैं इस विशेष टी स्पॉट के विषय में कई अहम बातें. 

पूर्वी चम्पारण जिले में छपवा से सुगौली और रक्सौल जाने वाले रास्ते में सिकरहना नदी के ऊपर एक पुल बना है. इस पुल के पास हीं चाय की कई दुकानें हैं. बता दें कि यहां की चाय काफी प्रसिद्ध है. आते-जाते राहगीरो के अलावा आस-पास के क्षेत्र कई लोग यहां चाय पीने आते हैं. ऐसा भी कहा जाता है कि यहां कि यहां की चाय और यहां का प्राकृतिक लोकेशन कुछ ऐसा है कि कुछ लोग रोज 50 से 100 रुपये की पेट्रोल जला के 10 रुपये की चाय पीने आते हैं. 

टी स्पॉट के बगल में हीं सिकरहना नदी का खूबसूरत नजारा नजर आता है. बता दें कि सिकरहना नदी चंपारण प्रमुख नदियों में से एक है. बहुत से लोग चाय की चुस्की लेते हुए इस खूबसूरत नजारे को देखना पसंद करते हैं. यहां चाय का मार्केट बनने में इस लोकेशन की खूबसूरत प्राकृतिक माहौल का अहम योगदान है. 

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सिकरहना नदी के पुल के पास जहां टी स्पॉट है, उसके ठीक पीछे हीं एक बड़ा और विशाल मंदिर है. इस मंदिर में कई देवी-देवताओं की मूर्तियां है. लोग यहां भगवान के दर्शन करने और मन्नत मांगने आते हैं. यहां मंदिर पूजा करने आते-जाते लोग भी यहां की चाय पीना खूब पसंद करते हैं.

बता दें कि, ये रास्ता छपवा से सुगौली होते हुए रक्सौल भी जाता है. रक्सौल एक ऐसी जगह है जिसके ठीक बाद नेपाल का क्षेत्र पड़ता है जिस कारण ये रास्ता काफी व्यस्त रहता है. इस रास्ते से रोज हजारों की संख्या में राहगीर गुजरते हैं जो यहां की चाय पीना खूब पसंद करते हैं. तस्वीर में कुछ राहगीरों को चाय का मजा लेते हुए देखा जा सकता है. 

यहां की चाय की कई खास बातें हैं. सबसे पहली बात यहां मिट्टी कप यानि कुल्हड़ में चाय पिलाई जाती है. जो ग्राहकों को काफी पसंद आता है. प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां की चाय भैंस की दूध से तैयार की जाती है जो बेहद स्वादिष्ट भी लगती है. साथ ही इसे बनाने का तरीका खास है. पहले कुल्हड़ को कोयल की आग पर पकाया जाता है. इसके बाद चाय को धीरे-धीरे प्यार के पकाया जाता है. इससे स्वाद काफी यूनिक है. 

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