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छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में सुसकी (सूखी) मछली की सब्जी बेहद पसंद की जाती है. इसे प्याज, लहसुन, टमाटर और देसी मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है. भात या रोटी के साथ इसका स्वाद बेहद लाजवाब लगता है. यह व्यंजन छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई और संस्कृति की खास पहचान है.
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई में ऐसे कई व्यंजन हैं, जिनका स्वाद सिर्फ पेट ही नहीं बल्कि यादों को भी ताजा कर देता है. इन्हीं खास व्यंजनों में से एक है सुसकी (सूखी) मछली की सब्जी, जिसे ग्रामीण अंचलों में बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है. धान की पराली में भूनकर और धूप में सुखाकर तैयार की जाने वाली यह मछली लंबे समय तक सुरक्षित रहती है. जब इसे प्याज, लहसुन, टमाटर और देसी मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है, तो इसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है. यह सिर्फ एक स्वादिष्ट डिश नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, संस्कृति और पारंपरिक खानपान की अनमोल पहचान है.
सुसकी मछली छत्तीसगढ़ के गांव-देहात में बेहद लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है. बरसात और सर्दियों के मौसम में पकड़ी गई मछलियों को धान की पराली में भूनकर और कई दिनों तक धूप में सुखाकर सुरक्षित रखा जाता है. जरूरत पड़ने पर इसी सूखी मछली से स्वादिष्ट सब्जी तैयार की जाती है. ग्रामीण परिवारों में मछली को पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है, फिर उसे भूनकर सुखाया जाता है. पूरी तरह सूखने के बाद इसे डिब्बों में भरकर महीनों तक रखा जा सकता है. यही वजह है कि यह व्यंजन साल भर घरों में आसानी से बनाया जाता है.
ऐसे तैयार होती है चटपटी सुसकी मछली
सबसे पहले सूखी मछली को गर्म पानी में उबालकर साफ किया जाता है. इसके बाद सरसों के तेल में राई, जीरा और हरी मिर्च का तड़का लगाया जाता है. प्याज, लहसुन, अदरक और टमाटर के साथ हल्दी, लाल मिर्च, धनिया और जीरा पाउडर डालकर मसाला भुना जाता है. जब मसाले से खुशबू आने लगे, तब उसमें मछली डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है.
भुंजी और ग्रेवी दोनों का मजा
सुसकी मछली को सूखी भुंजी के रूप में भी बनाया जाता है और हल्की ग्रेवी के साथ भी. स्वाद बढ़ाने के लिए अमचूर या इमली की खटाई डाली जाती है. करीब 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकने के बाद यह स्वादिष्ट डिश तैयार हो जाती है. गरमा-गरम सुसकी मछली का स्वाद भात (चावल) के साथ सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. हालांकि इसे रोटी के साथ भी खाया जाता है. हरी मिर्च की चटनी के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. सुसकी मछली केवल खाने की चीज नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक जीवन शैली और ग्रामीण संस्कृति का हिस्सा है. इसकी खुशबू में गांव की मिट्टी, मेहनत और पुरखों की रसोई की यादें बसती हैं.
कोतरी मछली की सब्जी भी है खास
छत्तीसगढ़ में कोतरी मछली की सब्जी भी काफी लोकप्रिय है. सर्दियों की शुरुआत में खेतों और नरवा से पकड़ी गई छोटी कोतरी मछली को सरसों के तेल और देसी मसालों में पकाकर तैयार किया जाता है. गर्म भात और चटनी के साथ इसका स्वाद हर छत्तीसगढ़िया के दिल के करीब है.
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