उदयपुर. राजस्थान अपने पारंपरिक खानपान और शाही व्यंजनों के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है. यहां दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी और लाल मांस जैसे व्यंजनों की चर्चा तो अक्सर होती है, लेकिन गर्मियों के मौसम में एक ऐसी खास डिश भी बनाई जाती है, जो अपने अनोखे स्वाद और हल्के मसालों के कारण लोगों की पसंद बनी हुई है . हम बात कर रहे हैं सफेद चिकन (सफेद मांस) की, जिसे राजस्थानी शाही रसोई की खास पहचान माना जाता है.
सफेद चिकन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लाल मिर्च और हल्दी का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता. यही कारण है कि इसका रंग पूरी तरह सफेद दिखाई देता है और इसका स्वाद भी अन्य मसालेदार नॉनवेज व्यंजनों से अलग होता है. गर्मियों में तीखे मसालों से बचने के लिए लोग इस डिश को खाना ज्यादा पसंद करते हैं.
मेवाड़ और मारवाड़ की शाही रसोई से रहा है संबंध
लाल मिर्च और हल्दी की जगह हरी मिर्च का उपयोग किया जाता है, जिससे व्यंजन में हल्का तीखापन तो आता है, लेकिन इसका रंग सफेद ही बना रहता है. सफेद चिकन को धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे मसालों और ड्राई फ्रूट्स का स्वाद चिकन में अच्छी तरह समा जाता है. इसकी ग्रेवी बेहद क्रीमी और रिच होती है, जो इसे शाही व्यंजनों की श्रेणी में शामिल करती है. आमतौर पर इसे तंदूरी रोटी, रूमाली रोटी या नान के साथ परोसा जाता है.
मसालेदार भोजन पसंद नहीं करने वालों के लिए है परफेक्ट डिश
लजीज डिश के शौकीनों का कहना है कि जो लोग बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन पसंद नहीं करते, उनके लिए सफेद चिकन एक बेहतरीन विकल्प है. गर्मियों में यह डिश न केवल स्वाद का अलग अनुभव देती है, बल्कि हल्के मसालों के कारण आसानी से पच भी जाती है. राजस्थान की समृद्ध पाक परंपरा में सफेद चिकन एक ऐसा व्यंजन है, जो शाही स्वाद, परंपरा और सादगी का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है. यही वजह है कि आज भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है और पर्यटक भी इसे बड़े चाव से चखते हैं.