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खस्ता और खुरचन पेड़ा… अयोध्या की इन दुकानों पर टूट पड़ते हैं लोग, देखें

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राम मंदिर नगरी अयोध्या अब सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक स्वाद के लिए भी देशभर में पहचान बना चुकी है. यहां का खुरचन पेड़ा, कुल्हड़ वाली लस्सी और मशहूर छोला-खस्ता श्रद्धालुओं और पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है. राम मंदिर दर्शन के बाद लोग इन देसी स्वादों का आनंद लेना नहीं भूलते.

अगर आप परिवार के साथ सुबह-सुबह दर्शन पूजन के लिए आए हैं और उसके बाद स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लेना चाहते हैं, तो सीधे मौर्य मिष्ठान भंडार पहुंच सकते हैं. यहां की कुल्हड़ वाली दही-जलेबी श्रद्धालुओं को खूब पसंद आती है. करीब 70 वर्षों से यह दुकान कुल्हड़ में दही-जलेबी परोस रही है. इसकी मिठास और स्वाद देखते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. बेहद सात्विक तरीके से कुल्हड़ में दही और गर्मागर्म जलेबी को मिलाकर तैयार किया जाता है, जिसे मात्र 30 रुपए में श्रद्धालुओं को परोसा जाता है. यही वजह है कि यहां आने वाले लोग बड़े आनंद के साथ इसका स्वाद लेते हैं.

मौर्य मिष्ठान भंडार की सबसे खास बात यह है कि यह दुकान साल 1952 से लगातार अपने पारंपरिक स्वाद को बनाए हुए है. करीब 3 से 4 पीढ़ियों से यहां की मशहूर कुल्हड़ दही-जलेबी लोगों के स्वाद में मिठास घोल रही है. इतना ही नहीं, साल 2018 में नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल में भी अयोध्या की कुल्हड़ दही-जलेबी ने खास पहचान बनाई थी. यही वजह है कि आज भी दुकान पर सुबह से ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलती हैं.

खास बात यह है कि खुरचन पेड़ा को धीमी आंच पर घंटों तक दूध पकाकर तैयार किया जाता है, जिससे इसमें प्राकृतिक खुशबू और गाढ़ापन आता है. यही पारंपरिक तरीका इसके स्वाद को बेहद खास बना देता है. त्योहारों, दीपोत्सव और राम मंदिर दर्शन के दौरान इसकी मांग कई गुना बढ़ जाती है. मान्यता है कि अयोध्या की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक यहां का प्रसिद्ध खुरचन पेड़ा चखा न जाए. यही वजह है कि यह मिठाई अब रामनगरी की खास पहचान बन चुकी है.

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राम नगरी अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी मंदिर के ठीक सामने स्थित सरयू स्वीट्स अपनी स्वादिष्ट खस्ता-छोले के लिए काफी प्रसिद्ध है. यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक खस्ता-छोले का स्वाद लेने पहुंचते हैं. दुकान पर मिलने वाले छोले और खस्ते खास पारंपरिक तरीके से तैयार किए जाते हैं और इनमें किसी तरह की मिलावट नहीं की जाती. यही वजह है कि यहां हर दिन लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. सुबह से लेकर शाम तक लोग बड़े चाव के साथ यहां के खस्ता-छोले का आनंद लेते हैं.

इतना ही नहीं, पिछले करीब 40 वर्षों से अयोध्या में छोला-खस्ता लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बना हुआ है. यहां मात्र 15 रुपये की प्लेट में स्वादिष्ट छोला-खस्ता परोसा जाता है, जिसका स्वाद श्रद्धालुओं को खूब पसंद आता है. सुबह होते ही दुकान पर खस्ता खाने वालों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं. दुकानदार के अनुसार, इसे उच्च गुणवत्ता वाले मैदे से तैयार किया जाता है. इसके बाद इसमें खास मसालों के साथ छोले मिलाकर स्वादिष्ट तरीके से परोसा जाता है, जो अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को बेहद आकर्षित करता है.

अयोध्या में बनने वाला खुरचन का पेड़ा अपनी खास मिठास और पारंपरिक स्वाद के लिए बेहद प्रसिद्ध माना जाता है. यह पेड़ा दूध की मलाई और खुरचन से तैयार किया जाता है, जिसकी वजह से इसका स्वाद सामान्य पेड़ों की तुलना में अधिक रिच और अलग होता है. पुराने समय से ही रामनगरी आने वाले श्रद्धालु चंद्रा के मशहूर खुरचन पेड़े को प्रसाद और उपहार के रूप में अपने साथ ले जाते हैं. यही वजह है कि यह मिठाई अयोध्या की खास पहचान बन चुकी है.

अयोध्या में चंद्रा की लस्सी अपने गाढ़े स्वाद और पारंपरिक अंदाज के लिए काफी प्रसिद्ध मानी जाती है. रामनगरी आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहां की मशहूर लस्सी का स्वाद जरूर चखते हैं. मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाने वाली यह लस्सी मलाई, दही और सूखे मेवों के खास मिश्रण से तैयार की जाती है, जिससे इसका स्वाद बेहद अलग और ताजगी भरा लगता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, चंद्रा की लस्सी की पहचान उसकी शुद्धता और पुराने देसी स्वाद से जुड़ी हुई है. गर्मियों के मौसम में यहां लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. राम मंदिर दर्शन के बाद श्रद्धालु अक्सर यहां पहुंचकर ठंडी और स्वादिष्ट लस्सी का आनंद लेते हैं.

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