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Most fragrant mango in Indiaगर्मियों की तपिश अपने साथ फलों के राजा आम की सौगात लेकर आती है. वैसे तो भारतीय बाजारों में लंगड़ा, चौंसा और दशहरी जैसे आमों का दबदबा रहता है, लेकिन एक ऐसी किस्म भी है जो अपनी सुंदरता और सुगंध से सबको पीछे छोड़ देती है. हम बात कर रहे हैं ‘गुलाब खास’ की, जिसकी एक झलक ही किसी को भी अपना दीवाना बनाने के लिए काफी है.
Gulab Khas Mango : इस आम का इतिहास सदियों पुराना है और इसका सीधा संबंध बिहार और बंगाल के नवाबी दौर से है. कहा जाता है कि मुर्शिदाबाद के नवाबों और बिहार के जमींदारों के बागानों में इस खास किस्म को बड़े जतन से पाला गया था. नवाबों को अपनी नजाकत के लिए जाना जाता था और गुलाब खास की भीनी खुशबू उनकी शाही पसंद पर बिल्कुल खरी उतरती थी.
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो ‘गुलाब खास’ गंगा के मैदानी इलाकों की मिट्टी का असली जादू है. बिहार के मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर जिलों में इसकी पैदावार सबसे उत्तम होती है. वहीं, पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद क्षेत्रों में पैदा होने वाले गुलाब खास अपनी विशेष मिठास और सोंधेपन के लिए पूरे देश में मशहूर हैं.
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस आम की सबसे बड़ी खूबी इसकी खुशबू है. जैसे ही यह आम पकना शुरू होता है, इसके आसपास के वातावरण में ताजे गुलाब के फूलों जैसी महक घुलने लगती है. यही कारण है कि इसे अन्य आमों की तुलना में एक प्रीमियम दर्जा प्राप्त है और लोग इसे सूंघकर ही इसकी शुद्धता की पहचान कर लेते हैं.
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दिखावट के मामले में भी यह आम किसी कलाकार की पेंटिंग जैसा लगता है. पकने पर इसके पीले छिलके के ऊपरी हिस्से पर गहरा गुलाबी या सुर्ख लाल रंग उभर आता है, जिसे ‘रोज़ी ब्लश’ कहा जाता है. दूर से देखने पर यह किसी कश्मीरी सेब जैसा भ्रम पैदा करता है, जो इसे टोकरी में रखे अन्य आमों से बिल्कुल जुदा और आकर्षक बनाता है.
स्वाद की बात करें तो गुलाब खास का अनुभव बेहद मखमली होता है. इसका गूदा गहरा केसरिया रंग का और पूरी तरह से रेशारहित (Fiberless) होता है. मुँह में जाते ही यह मक्खन की तरह घुल जाता है. इसकी मिठास बहुत तीखी नहीं होती, बल्कि एक संतुलित और सुखद मिठास होती है जो देर तक जुबान पर टिकी रहती है.
सेहत के लिहाज से भी यह फल गुणों की खान है. विटामिन-A और विटामिन-C से भरपूर होने के कारण यह गर्मियों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. इसके अलावा, इसमें मौजूद नेचुरल शुगर तुरंत एनर्जी प्रदान करती है, जो लू और थकान के मौसम में किसी प्राकृतिक टॉनिक से कम नहीं है.
यह एक ‘अर्ली वैरायटी’ का आम है, जो बाजार में बहुत कम समय के लिए आता है. आमतौर पर मई के दूसरे सप्ताह से लेकर जून के मध्य तक ही इसका असली लुत्फ लिया जा सकता है. अपनी दुर्लभता और कम समय तक उपलब्धता के कारण, आम के शौकीन इसका साल भर बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं.
अंत में, अगर आप आमों के असली पारखी हैं, तो ‘गुलाब खास’ का स्वाद चखना आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है. यह सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति की कलाकारी का अद्भुत मेल है. तो इस सीजन जब आपको यह गुलाब से लाल दिखने वाला आम मिले तो एक बार इसे घर लाना न भूलें.