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Gorakhpur Famous Non-Veg Food Spot: उत्तर प्रदेश का गोरखपुर शहर सिर्फ अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लाजवाब खान-पान के लिए भी मशहूर है. खासकर अगर आप नॉनवेज खाने के शौकीन हैं, तो गोरखपुर की गलियों में स्वादों का एक ऐसा खजाना छिपा है जिसके आप दीवाने हो जाएंगे. यहां कई दशक पुराने ऐसे ठिकाने हैं, जहां आज भी पारंपरिक तरीके से मटन और कीमा-कलेजी तैयार की जाती है. मिट्टी की हांडी में धीमी आंच पर पकने वाले मटन से लेकर 70 साल पुरानी कीमा-कलेजी तक, आइए जानते हैं गोरखपुर की उन 3 सबसे मशहूर जगहों के बारे में जहां का स्वाद चखे बिना आपकी गोरखपुर यात्रा अधूरी है.

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश का गोरखपुर जिला अपनी खास मेहमाननवाजी और ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है. लेकिन इसके साथ ही यहां का जायका भी बेहद बेमिसाल है. अगर आप नॉनवेज खाने के शौकीन हैं, तो गोरखपुर आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है. यहां के पारंपरिक मसालों, धीमी आंच पर पकाने के पुराने तरीकों और सीक्रेट रेसिपी की वजह से यहां के व्यंजनों का स्वाद बिल्कुल अलग होता है. अगर आप कभी भी गोरखपुर घूमने आ रहे हैं, तो शहर की ये तीन जगहें आपकी फूड लिस्ट में जरूर होनी चाहिए.

1. अदालत हांडी मटन: मिट्टी के बर्तन और धीमी आंच का जादू
गोरखपुर के मोहद्दीपुर इलाके में स्थित ‘अदालत हांडी मटन’ अपने बिल्कुल अनोखे अंदाज के लिए पूरे शहर में मशहूर है. यहां मटन को किसी कुकर या स्टील के बर्तन में नहीं, बल्कि मिट्टी की पारंपरिक हांडी में कोयले की धीमी आंच पर पकाया जाता है. इस तरीके से पकाने की वजह से सभी खास मसालों का स्वाद मटन के पीस के अंदर तक अच्छी तरह समा जाता है. जब ग्राहक दुकान पर पहुंचते हैं, तो उनके सामने ही कतार से लगी हांडियों में मटन पकता हुआ दिखाई देता है, जिसे देखकर ही मुंह में पानी आ जाता है. यहां का स्वाद ऐसा है कि लोग एक बार खाने के बाद दोबारा यहां आने की प्लानिंग करने लगते हैं.

2. सिंधी होटल, 70 साल पुराना कीमा-कलेजी का स्वाद
अगर आप असली स्वाद का एक साथ मजा लेना चाहते हैं, तो जिला अस्पताल रोड पर स्थित ‘सिंधी होटल’ जरूर जाएं. स्थानीय लोग इसे ‘दानाराम होटल’ के नाम से भी जानते हैं. यह दुकान लगभग 70 साल पुरानी है और यहां मिलने वाली कीमा-कलेजी का कोई मुकाबला नहीं है. इस दुकान की कमान संभाल रहे प्रीतम दास आहूजा बताते हैं कि यहां आज भी उसी खास पारंपरिक मसाले का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी शुरुआत उनके पिता ने दशकों पहले की थी. मसालों का वही पुराना अंदाज आज भी कायम है, यही वजह है कि गरमा-गरम रोटी के साथ परोसी जाने वाली यह कीमा-कलेजी आज भी दूर-दूर से आने वाले ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई है.
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3. भोला मटन, बड़े भगोने में पकता है असली देसी मटन
विजय चौक पर स्थित ‘भोला मटन’ भी गोरखपुर के सबसे चर्चित नॉनवेज ठिकानों में से एक है. यहां मटन को एक बड़े भगोने में बेहद पारंपरिक और देहाती शैली में पकाया जाता है. इस मटन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे तैयार करते समय बाहर से ज्यादा तेल-घी डालने के बजाय मटन की ही चर्बी का इस्तेमाल किया जाता है. इससे मटन की ग्रेवी बेहद गाढ़ी, तरीदार और एकदम असली देसी स्वाद वाली बनती है. मसालों का सही संतुलन और धीमी आंच पर घंटों भूनने की वजह से यह मटन बेहद सॉफ्ट हो जाता है. शाम होते ही यहां मटन प्रेमियों की भारी भीड़ लग जाती है.

ये तीनों जगहें सिर्फ खाना खिलाने की दुकानें नहीं हैं, बल्कि ये गोरखपुर के पुराने और समृद्ध स्वाद की पहचान हैं. अदालत का हांडी मटन, सिंधी होटल की कीमा-कलेजी और भोला मटन का देसी अंदाज हर नॉनवेज प्रेमी को एक बार जरूर चखना चाहिए.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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