मूंग दाल का हलवा भारतीय मिठाइयों में एक खास जगह रखता है. खासतौर पर सर्दियों, त्योहारों और शादी-ब्याह के मौकों पर इसे खूब पसंद किया जाता है. इसका स्वाद जितना लाजवाब होता है, इसे बनाने की प्रक्रिया उतनी ही मेहनत वाली मानी जाती है. अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी तैयारी और सही तरीके से भूनने पर आप घर पर भी बाजार जैसा स्वादिष्ट मूंग दाल हलवा बना सकते हैं.
मूंग दाल हलवा बनाने के लिए सामग्री
धुली मूंग दाल – 1 कप
देसी घी – ½ से ¾ कप
चीनी – ¾ कप
दूध – ½ कप
पानी – 2 कप
मावा/खोया – ½ कप
इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
बादाम – 10 से 12
काजू – 10 से 12
पिस्ता – 1 बड़ा चम्मच
केसर – कुछ धागे
गर्म दूध – 1 बड़ा चम्मच
सबसे पहले दाल को करें तैयार
सबसे पहले मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर करीब 3 से 4 घंटे के लिए पानी में भिगो दें. दाल अच्छी तरह फूल जाए तो उसका अतिरिक्त पानी निकाल दें. अब इसे मिक्सर में डालकर बिना या बहुत कम पानी के दरदरा पीस लें. ध्यान रखें कि दाल का पेस्ट बिल्कुल चिकना न हो, क्योंकि हलवे की अच्छी बनावट के लिए इसका थोड़ा दरदरा रहना जरूरी है.
दाल को अच्छी तरह भूनना है जरूरी
भारी तले वाली कड़ाही गर्म करें और उसमें घी डालें. घी गर्म होने पर पिसी हुई मूंग दाल डाल दें. अब इसे धीमी से मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें. यही मूंग दाल हलवा बनाने का सबसे जरूरी स्टेप है.
दाल को तब तक भूनें, जब तक उसका कच्चापन पूरी तरह खत्म न हो जाए और उसका रंग हल्का सुनहरा होने लगे. अच्छी तरह भुनी दाल से घी अलग नजर आने लगेगा और रसोई में स्वादिष्ट खुशबू आने लगेगी. इस प्रक्रिया में 20 से 30 मिनट तक लग सकते हैं, इसलिए जल्दबाजी न करें.
दूध और पानी डालते समय रहें सावधान
एक अलग पैन में दूध और पानी गर्म कर लें. भुनी हुई दाल में धीरे-धीरे गर्म दूध और पानी डालें और लगातार चलाते रहें. इसे डालते समय छींटे पड़ सकते हैं, इसलिए सावधानी रखें. दाल को तब तक पकाएं, जब तक वह तरल को अच्छी तरह सोख न ले और फिर से गाढ़ी न होने लगे.
अब इसमें चीनी डालें और अच्छी तरह मिलाएं. चीनी डालने के बाद हलवा कुछ देर के लिए फिर पतला होगा. इसे लगातार चलाते हुए पकाते रहें, जब तक अतिरिक्त नमी कम न हो जाए.
मावा और ड्राई फ्रूट्स से बढ़ेगा स्वाद
अब इसमें मावा डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इसके बाद इलायची पाउडर और केसर डाल दें. कटे हुए बादाम, काजू और पिस्ता भी मिला दें. हलवे को कुछ मिनट और पकाएं, जब तक घी किनारों पर दिखाई देने लगे और हलवा मनचाही गाढ़ी कंसिस्टेंसी में आ जाए.