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बरसात में बिहार का एक खास पारंपरिक व्यंजन सबका दिल जीत लेता है. इसकी मीठी खुशबू और अनोखा स्वाद हर किसी को दीवाना बना देता है. इसे बनाने के लिए पेड़ से उतारे गए ताड़ के फल के पल्प का इस्तेमाल होता है. फिर एक आसान विधि से इसे झटपट तैयार किया जाता है.
मुजफ्फरपुरः बरसात का मौसम आते ही बिहार में कई तरह के पारंपरिक पकवानों की याद ताजा हो जाती है. इन्हीं में से एक है ताड़ के फल का पकौड़ा, जिसे बिहार के कई इलाकों में तार के फल का गुलगुला या तार का पुआ भी कहा जाता है. स्वाद में मीठा और बनाने में आसान यह पारंपरिक व्यंजन गांव-कस्बों में आज भी लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है.
मुजफ्फरपुर के फूड एक्सपर्ट अजीत कुमार बताते हैं कि इसे बनाने के लिए सबसे पहले ताड़ के फल के पूरी तरह पक जाने के बाद सबसे पहले उसे पेड़ से उतारा जाता है. इसके बाद फल को अच्छी तरह धोकर उसका छिलका हटा दिया जाता है. छिलका निकालने के बाद इसके अंदर मौजूद पके हुए पीले गूदे यानि पल्प को बाहर निकाला जाता है.
फल के रेशे को हटाएं
अब इस पल्प में थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर उसका घोल तैयार किया जाता है. तैयार घोल को छलनी की मदद से छान लिया जाता है, ताकि उसमें मौजूद रेशे या अन्य मोटे हिस्से अलग हो जाएं और मिश्रण अच्छी तरह चिकना हो जाए.
घोल को छानने के बाद इसमें स्वाद के अनुसार चीनी मिलाई जाती है. इसके बाद इसमें केला और नारियल का बुरादा डाला जाता है. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाने के बाद इसमें आटा और सूजी मिलाई जाती है. आटा और सूजी डालने से पतला घोल धीरे-धीरे गाढ़ा हो जाता है और पकौड़े या गुलगुले का मिश्रण तैयार हो जाता है.
धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तलें
इसके बाद कढ़ाई में तेल गर्म किया जाता है. तैयार मिश्रण को हाथ या चम्मच की मदद से छोटे-छोटे आकार में लेकर गर्म तेल में डाला जाता है. इन्हें धीमी या मध्यम आंच पर तब तक तला जाता है, जब तक इनका रंग सुनहरा और सतह हल्की कुरकुरी न हो जाए.
अजीत कुमार के मुताबिक, इसे बनाने का तरीका बिहार में बनने वाले पारंपरिक गुलगुले से काफी मिलता-जुलता है. फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें मुख्य सामग्री के तौर पर तार के फल के पके हुए पीले पल्प का इस्तेमाल किया जाता है. कई जगहों पर लोग इसे आम बोलचाल में तार का पुआ भी कहते हैं.
बरसात में खाने का मजा ही अलग
बरसात के मौसम में तैयार होने वाला यह पकवान स्वाद के साथ-साथ बिहार की पारंपरिक खान-पान संस्कृति की भी झलक देता है. बदलते दौर में जहां कई पारंपरिक व्यंजन धीरे-धीरे लोगों की थाली से दूर हो रहे हैं. वहीं, ताड़ के फल से बनने वाला यह पकौड़ा आज भी अपनी देसी मिठास और अनोखे स्वाद के कारण लोगों को आकर्षित करता है.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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