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Marwadi Masala Bati Recipe: मारवाड़ की प्रसिद्ध मसाला बाटी स्वाद और सेहत का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन है. इसे मोटे गेहूं के आटे में घी का मोयन और अजवाइन डालकर सख्त गूंथा जाता है. इसके अंदर उबले आलू, मटर, काजू, किशमिश और चटपटे मसालों की स्टफिंग भरी जाती है. पारंपरिक बाटी ओवन में बिना तेल के धीमी आंच पर सेंकने के बाद इसे शुद्ध देसी घी में डुबोया जाता है. इसे पंचमेल दाल, लहसुन की चटनी और काचरी के अचार के साथ परोसा जाता है, जो साधारण दाल-बाटी से कई गुना ज्यादा स्वादिष्ट लगती है.
जब भी किसी खास दावत या त्योहार की बात होती है तो ‘दाल-बाटी-चूरमा’ का नाम सबसे पहले ज़हन में आता है और वैसे तो सादा बाटी हर घर में रोज़ बनती है लेकिन मारवाड़ के अंचल में एक बेहद खास और ज़ायकेदार डिश तैयार की जाती है जिसे ‘मसाला बाटी’ कहते हैं क्योंकि यह बाटी इतनी लाजवाब और चटपटी होती है कि इसके आगे लोग सादी दाल-बाटी का स्वाद भी भूल जाते हैं और बाहर से एकदम खस्ता तथा अंदर से तीखे व चटपटे आलू-मटर के मसाले से भरी यह बाटी मारवाड़ी मेहमाननवाज़ी की शान मानी जाती है.
मसाला बाटी को एकदम खस्ता और मुंह में घुल जाने वाला बनाने के लिए उसका आटा सही तरीके से गूंथना सबसे जरूरी है, जिसके लिए सबसे पहले एक परात में आवश्यकतानुसार मोटा गेहूं का आटा लेकर उसमें स्वादानुसार नमक, बाटी को अंदर से सॉफ्ट व स्पंजी बनाने के लिए एक चुटकी बेकिंग सोडा और बेहतरीन खुशबू के लिए आधा छोटा चम्मच अजवाइन हाथों से क्रश करके डाली जाती है और फिर इन सभी सूखी सामग्रियों को अच्छे से मिक्स करने के बाद इसमें ‘मोयन’ के लिए शुद्ध देसी घी डालकर तब तक अच्छी तरह रगड़कर मिलाया जाता है जब तक कि आटे की मुट्ठी न बंधने लगे, जिसके बाद गुनगुने पानी की मदद से थोड़ा सख्त आटा गूंथकर इसे 15-20 मिनट कपड़े से ढककर सेट होने के लिए छोड़ दिया जाता है.
जब तक आटा सेट हो रहा है तब तक बाटी के अंदर भरा जाने वाला खास मसाला तैयार करने के लिए सबसे पहले उबले हुए आलुओं को अच्छी तरह मैश कर लें और फिर एक कढ़ाई में एक चम्मच तेल या घी गर्म करके उसमें राई, जीरा, सौंफ, बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक व थोड़ा सा साबुत धनिया दरदरा कूटकर डालने के बाद उबले हुए हरे मटर और मैश किए हुए आलू मिला दें, जिसके बाद ऊपर से हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, अमचूर पाउडर या नींबू का रस, स्वादानुसार नमक और हरा धनिया डालकर मसाले को 5 मिनट तक अच्छे से भून लें तथा मारवाड़ी स्वाद को और समृद्ध करने के लिए इसमें काजू के टुकड़े व किशमिश मिलाकर इसे ठंडा होने के लिए रख दें.
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जिस आटे को आपने गूंथा है उसे एक बार फिर से हल्के हाथों से मलकर उसकी मध्यम आकार की लोइयां तोड़ लें और फिर एक लोई को लेकर हाथों की मदद से किनारे पतले व बीच का हिस्सा थोड़ा मोटा रखते हुए कटोरी जैसा आकार दें, जिसके बीच में तैयार किया गया ठंडा आलू का मसाला रखकर उसे अंगूठे से अंदर की तरफ दबाते हुए आटे के किनारों को ऊपर की ओर लाएं और चारों तरफ से घुमाते हुए अच्छी तरह बंद कर दें ताकि बाटी कहीं से फटी न रहे और सेंकते समय मसाला बाहर न आए, जिसके बाद इसी तरह सभी लोइयों में मसाला भरकर गोल-गोल बाटियां तैयार कर लें.
तैयार मसाला बाटियों को सेंकने के लिए पारंपरिक बाटी ओवन, जिसे देशी भाषा में तंदूर कहते हैं, उसे गैस पर धीमी आंच पर प्री-हीट कर लें और फिर ओवन की जाली पर इन बाटियों को रखकर ढक दें तथा इन्हें मध्यम से धीमी आंच पर अलट-पलट करते हुए चारों तरफ से सुनहरा भूरा और क्रिस्पी होने तक सेकें क्योंकि जब बाटियों के ऊपर हल्के क्रैक्स आने लगें और वे हल्की लगने लगें तो समझें कि आपकी मसाला बाटी अंदर तक पूरी तरह सिक चुकी है और धीमी आंच पर सिकाई करने से ही बाटी का कड़कपन और खस्तापन बहुत ही शानदार निखर कर आता है.
सिखी हुई गरमा-गरम मसाला बाटियों को ओवन से निकालें और हल्का सा दबाकर सीधे पिघले हुए शुद्ध देसी घी के कटोरे में डुबो दें, जिसके बाद जब बाटी अच्छी तरह घी सोख ले तो इसे बाहर निकाल लें क्योंकि इसे पारंपरिक पंचमेल दाल, तीखी लहसुन की चटनी, काचरी के अचार और प्याज के सलाद के साथ परोसा जाता है और यह स्वाद के मामले में तो लाजवाब है ही, साथ ही इसमें उपयोग की गई अजवाइन और सौंफ पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखते हैं.