लीची जिन लोगों को पसंद होती है, उन्हें इसका इंतजार जून-जुलाई के महीने में बेसब्री से रहता है. मीठी रसीली लीची को देखते ही मन खाने का कर जाता है. अक्सर लोगों को लगता है कि लीची की कोई वेरायटी नहीं होती है, जिस तरह से आम कई वेरायटी में मिलता है. आप गलत हैं, लीची की भी कई वेरायटी होती है, जो देश के अलग-अलग राज्यों में मिलती है. चलिए जानते हैं लीची की कुछ खास क्षेत्रीय किस्मों के बारे में, जिन्हें आप एक बार जरूर खाएं.

लीची की किस्में और खूबियां

शाही लीची: क्या आप जानते हैं कि बिहार के मुजफ्फरपुर की लीची देशभर में प्रसिद्ध है. लोग इस शाही लीची को खाने के लिए मुजफ्फरपुर तक पहुंच जाते हैं. शाही लीची को जीआई-टैग प्राप्त है. यह स्वाद में बेहद मीठी, रसदार गूदे होते हैं. जब आप इसका छिलका हटाएंगे तो मनमोहक सुगंध से मन खुश हो जाए.

तेजपुर लीची: असम में मिलती है तेजपुर लीची. ब्रह्मपुत्र नदी के उपजाऊ किनारों से आने वाली तेजपुर लीची अपने चमकीले लाल रंग, बेहद सख्त गूदे के लिए जानी जाती है. स्वाद में मीठी-खट्टी होने के साथ ही इसमें भरपूर रस होता है.

बेदाना: बिहार में ही एक और लीची मिलती है, जिसे बेदाना कहा जाता है. ये लीची आकार में थोड़ी छोटी होती है. बेदाना लीची एक प्रीमियम, अत्यधिक मांग वाली लीची की किस्म है, जो अपनी असाधारण मिठास, रसीलेपन और खास तरह की फूलों सी खुशबू के लिए जानी जाती है.खास बात ये है कि इस लीची में बीज या तो नहीं होते या होते भी हैं तो बहुत ही छोटे और सॉफ्ट से होते हैं. शायद इसलिए ही इसका नाम बेदाना है. मलाईदार सफेद गूदे खाने में बेहद ही स्वादिष्ट लगते हैं.

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देहरादून लीची: उत्तराखंड में हिमालय की ठंडी तलहटी में उगाई जाती है देहरादून लीची. यह देर से पकने वाली किस्म है. इसकी त्वचा गहरे लाल रंग की होती है. इसकी बनावट सॉफ्ट, बेहद मीठे गूदे और ताजगी भरे होते हैं विशिष्ट रूप से सुगंधित स्वाद के लिए देहरादून लीची लोकप्रिय है.

चाइना लीची: पश्चिम बंगाल और बिहार में मिलती है चाइना लीची. ये आकार में बड़ी और आकर्षक होती है. यह ग्रीष्म ऋतु में देर से पकती है. इसकी त्वचा थोड़ी मोटी होती है. इसका स्वाद मीठा और मनमोहक होता है.

स्वर्ण रूपा: झारखंड में मिलती है स्वर्ण रूपा लीची. यह भीषण गर्मी सहन करके भी विकसित होती है. काफी मजबूत किस्म की लीची होती है. दिखने में सुंदर, मीडियम साइज के फल देती है. फलने पर गहरे गुलाबी-लाल रंग की हो जाती है.

कलकतिया लीची: मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, पूर्वी राज्यों में Calcuttia Litchi उगाई जाती है. साइज में बड़ी और अंडाकार होती है. इसके छिलके गहरे लाल और हल्के हरे रंग के होते हैं. इसकी सुंगध गाढ़ी, स्वाद में बेहद मीठी, रसीली होती है. इसके बीज छोटे होते हैं. इसमें गूदे भी अधिक होते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)



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