Bharwa Karela Recipe: करेला ऐसी सब्जी है जिसे लोग दो हिस्सों में बांट देते हैं. कुछ लोग इसे बहुत पसंद करते हैं, जबकि कुछ लोग इसका नाम सुनते ही मुंह बना लेते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह इसका कड़वा स्वाद माना जाता है. हालांकि स्वास्थ्य के लिहाज से करेला काफी फायदेमंद माना जाता है और कई लोग इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहते हैं. परेशानी तब आती है जब भरवा करेला बनाने की बात होती है. अक्सर लोगों को लगता है कि इसमें बहुत ज्यादा तेल लगेगा, स्टफिंग बाहर निकल जाएगी या फिर स्वाद बहुत कड़वा रहेगा. यही कारण है कि कई घरों में यह सब्जी कम ही बनती है. लेकिन अगर कुछ आसान बातों का ध्यान रखा जाए तो भरवा करेला इतना स्वादिष्ट बन सकता है कि जो लोग इसे पसंद नहीं करते, वे भी इसे दोबारा खाने की मांग कर सकते हैं. इस तरीके की खास बात यह है कि इसमें कम तेल लगता है, धागा बांधने की जरूरत नहीं पड़ती और स्टफिंग भी पूरी तरह अंदर बनी रहती है.
सही करेला चुनना क्यों है जरूरी
भरवा करेला बनाने की शुरुआत सही करेले के चुनाव से होती है. हमेशा मध्यम आकार के करेले चुनने की कोशिश करें. बहुत बड़े और मोटे करेले अक्सर ज्यादा सख्त होते हैं और उनका स्वाद भी उतना अच्छा नहीं लगता. ताजे और हरे करेले पकने के बाद ज्यादा स्वादिष्ट लगते हैं. अगर करेला बहुत ज्यादा पीला दिखाई दे रहा है तो उसे लेने से बचना चाहिए. सही करेला चुनने से पूरी रेसिपी का स्वाद बेहतर हो जाता है.
करेले की तैयारी कैसे करें
सबसे पहले करेले को अच्छी तरह धो लें. इसके बाद ऊपर और नीचे का हिस्सा हल्का सा काट दें. अब करेले का पतला छिलका निकालें, लेकिन इसे पूरी तरह साफ न करें. फिर बीच में लंबाई में चीरा लगाकर अंदर के बीज निकाल लें. ध्यान रखें कि छिलके और बीजों को फेंकना नहीं है. इन्हें भी मसाले में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे स्वाद बढ़ता है और कोई हिस्सा बेकार भी नहीं जाता.
कड़वाहट कम करने का आसान तरीका
करेले की कड़वाहट कम करने के लिए नमक का इस्तेमाल सबसे आसान तरीका माना जाता है. तैयार किए गए करेले पर अच्छी तरह नमक लगाएं और करीब 10 मिनट के लिए छोड़ दें. कुछ देर बाद करेला पानी छोड़ने लगेगा. अब इसे हल्के हाथों से दबाकर अतिरिक्त पानी निकाल दें. इस प्रक्रिया से कड़वाहट काफी हद तक कम हो जाती है. यही छोटा सा कदम पूरे स्वाद में बड़ा फर्क ला सकता है.
करेले के पानी का भी कर सकते हैं इस्तेमाल
जब नमक लगाने के बाद करेले से पानी निकलता है तो ज्यादातर लोग उसे फेंक देते हैं. लेकिन चाहें तो इसका इस्तेमाल एक हेल्दी ड्रिंक बनाने में भी किया जा सकता है. इसमें थोड़ा पानी, नींबू का रस, काला नमक, भुना जीरा और पुदीना मिलाकर पी सकते हैं. कई लोग इसे सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं.
स्वाद बढ़ाने वाला खास मसाला
भरवा करेले की जान उसकी स्टफिंग में छिपी होती है. इसके लिए जीरा, धनिया, सौंफ, काली मिर्च और अजवाइन को हल्का भून लें. अब इसमें अदरक, लहसुन और हरी मिर्च मिलाकर दरदरा पीस लें. स्वाद को संतुलित करने के लिए अमचूर और थोड़ा सा गुड़ भी मिला दें. यह मिश्रण करेले की कड़वाहट को संतुलित करता है और स्वाद में हल्का खट्टा-मीठा पन जोड़ता है.
स्टफिंग को ऐसे करें तैयार
एक पैन में थोड़ा सा तेल गर्म करें और उसमें बारीक कटा प्याज डालें. प्याज को केवल हल्का नरम होने तक पकाएं. इसे ज्यादा भूरा नहीं करना है. अब तैयार मसाला डालकर कुछ मिनट तक भूनें. जब मसाले से खुशबू आने लगे तो गैस बंद कर दें. स्टफिंग तैयार है.
करेले में मसाला भरने का सही तरीका
अब तैयार मसाले को धीरे-धीरे सभी करेलों में भरें. पहले हर करेले में थोड़ा मसाला डालें और फिर दोबारा सभी में बराबर मात्रा में भर दें. इससे सभी करेलों में स्टफिंग एक जैसी रहेगी. बहुत ज्यादा मसाला ऊपर तक भरने की कोशिश न करें, क्योंकि पकाते समय वह बाहर निकल सकता है.
बिना धागे के भी नहीं निकलेगी स्टफिंग
अक्सर लोग भरवा करेला बनाते समय धागा बांधते हैं ताकि मसाला बाहर न निकले. लेकिन इस रेसिपी में इसकी जरूरत नहीं पड़ती. इसके लिए पकाने की शुरुआत सही तरीके से करनी होती है. कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें और सबसे पहले करेले को स्टफिंग वाली साइड नीचे करके रखें. इससे मसाला अंदर ही सेट हो जाता है और बाहर निकलने की संभावना काफी कम हो जाती है.
धीमी आंच पर पकाने का फायदा
भरवा करेला हमेशा धीमी आंच पर पकाना चाहिए. कड़ाही को ढक दें और बीच-बीच में करेलों को पलटते रहें. तेज आंच पर पकाने से मसाला जल सकता है और करेला बाहर से पककर अंदर से कच्चा रह सकता है. धीमी आंच पर पकने से मसाले का स्वाद अंदर तक पहुंचता है और करेला भी मुलायम बनता है.
तैयार भरवा करेले का स्वाद कैसा होगा
जब करेला पूरी तरह पक जाएगा तो उसका स्वाद काफी संतुलित हो जाएगा. कड़वाहट पहले के मुकाबले बहुत कम महसूस होगी. मसालों, अमचूर और गुड़ की वजह से इसमें हल्का खट्टा-मीठा और चटपटा स्वाद आएगा. करेला सॉफ्ट रहेगा और स्टफिंग अंदर ही बनी रहेगी. इसे रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ आराम से परोसा जा सकता है.