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Meal Maker Making Process: सब्जी, बिरयानी और पुलाव में इस्तेमाल होने वाला मीट जैसा दिखने वाला मील मेकर असल में सोयाबीन से तैयार किया जाता है. इसे सोया चंक्स और सोया नगेट्स के नाम से भी जाना जाता है और सामान्य सोया चंक्स पूरी तरह पौधों से मिलने वाला खाद्य पदार्थ है. इसे बनाने के लिए सोयाबीन से तेल अलग करने के बाद बचे प्रोटीन वाले हिस्से को आटे जैसी शक्ल दी जाती है. इसके बाद खास मशीन में गर्मी और दबाव की मदद से इसकी बनावट बदली जाती है, जिससे इसे स्पंजी और मीट जैसा टेक्सचर मिलता है. तैयार सोया चंक्स को सुखाया जाता है, इसलिए गर्म पानी में डालते ही यह पानी सोखकर फूलने लगता है. सोया चंक्स में प्रोटीन अच्छी मात्रा में मिल सकता है, हालांकि इसकी सही मात्रा ब्रांड और प्रोसेसिंग के अनुसार अलग हो सकती है.

Meal Maker Making Process: बिरयानी में पड़े छोटे-छोटे भूरे सोया चंक्स हों या मसालेदार ग्रेवी में तैयार मील मेकर, इन्हें खाते समय कभी न कभी आपके मन में भी सवाल आया होगा कि आखिर यह चीज बनती किससे है. पकने के बाद इसका टेक्सचर काफी स्पंजी हो जाता है और चबाने पर कई लोगों को यह नॉनवेज की बनावट जैसा महसूस होता है. इसी वजह से कुछ लोगों को यह भ्रम भी रहता है कि इसे बनाने में किसी तरह की नॉनवेज सामग्री तो इस्तेमाल नहीं होती. दरअसल सामान्य सोया चंक्स का मुख्य कच्चा माल सोयाबीन होता है. यह सीधे साबुत सोयाबीन को काटकर तैयार नहीं किया जाता, बल्कि सोयाबीन को कई चरणों में प्रोसेस करने के बाद इससे सोया चंक्स बनाए जाते हैं. (इमेज AI)

इस प्रक्रिया में पहले सोयाबीन को साफ किया जाता है, फिर उसका तेल अलग होता है और तेल निकलने के बाद बचे प्रोटीन वाले हिस्से से एक खास तरह का आटा तैयार किया जाता है. इसी सामग्री को मशीन, गर्मी और दबाव की मदद से वह स्पंजी बनावट दी जाती है जिसे हम मील मेकर या सोया चंक्स के रूप में पहचानते हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि फैक्ट्री में सोयाबीन आखिर मील मेकर में कैसे बदलता है. (इमेज AI)

मील मेकर बनाने की शुरुआत सोयाबीन से होती है. फैक्ट्री में पहुंचने वाले सोयाबीन के साथ धूल, मिट्टी, छोटे पत्थर और दूसरी गंदगी हो सकती है. इसलिए प्रोसेसिंग शुरू करने से पहले मशीनों की मदद से सोयाबीन को साफ किया जाता है. इसके बाद जरूरत के हिसाब से उसकी नमी कम की जाती है और बाहरी छिलके को अलग किया जाता है. यह शुरुआती प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि आगे तैयार होने वाले प्रोडक्ट की क्वालिटी काफी हद तक इस्तेमाल किए गए सोयाबीन और उसकी प्रोसेसिंग पर निर्भर करती है. (इमेज AI)

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यहां से कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है. सोया चंक्स बनाने के लिए आमतौर पर पूरे सोयाबीन को सीधे पीसकर इस्तेमाल नहीं किया जाता. पहले सोयाबीन में मौजूद तेल को अलग किया जाता है. औद्योगिक स्तर पर तेल निकालने के लिए अलग-अलग प्रोसेस इस्तेमाल किए जा सकते हैं. तेल निकलने के बाद जो सोया सामग्री बचती है, उसमें प्रोटीन का हिस्सा काफी महत्वपूर्ण होता है. इसी तेल निकली सोया सामग्री को आगे प्रोसेस करके मील मेकर तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. (इमेज AI)

सोयाबीन से तेल अलग होने के बाद बची सामग्री को बारीक करके आटे जैसी शक्ल दी जाती है. इसे आम तौर पर डिफैटेड सोया फ्लोर कहा जाता है. अब इसी सोया फ्लोर को सही मात्रा में पानी के साथ मिलाया जाता है. पानी मिलाने का उद्देश्य मिश्रण में जरूरी नमी लाना होता है, ताकि अगले चरण में मशीन इसे सही तरीके से प्रोसेस कर सके. अभी तक यह मिश्रण उन गोल या छोटे टुकड़ों जैसा बिल्कुल नहीं दिखता जिन्हें हम बाजार में पैकेट के अंदर देखते हैं. (इमेज AI)

अब आता है सोया चंक्स बनाने का सबसे महत्वपूर्ण चरण. तैयार सोया मिश्रण को एक्सट्रूडर नाम की मशीन से गुजारा जाता है. इस प्रक्रिया को एक्सट्रूजन कहा जाता है. मशीन के अंदर मिश्रण को नियंत्रित गर्मी, दबाव और दूसरी स्थितियों से गुजरना पड़ता है. इस प्रक्रिया के दौरान सोया प्रोटीन की बनावट में बदलाव आता है और एक अलग तरह का टेक्सचर तैयार होता है. यही वह चरण है जो सोया चंक्स को उसकी पहचान वाली स्पंजी और चबाने योग्य बनावट देने में अहम भूमिका निभाता है. यही कारण है कि पकने के बाद कई लोगों को इसका टेक्सचर मीट जैसा महसूस होता है. इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें मीट मिलाया गया है. सामान्य प्लेन सोया चंक्स पौधों से मिलने वाले सोया प्रोटीन से ही तैयार किए जाते हैं. हालांकि किसी पैकेज्ड प्रोडक्ट को खरीदते समय उसके इंग्रेडिएंट्स जरूर पढ़ने चाहिए, क्योंकि अलग-अलग ब्रांड अतिरिक्त सामग्री इस्तेमाल कर सकते हैं. (इमेज AI)

एक्सट्रूजन के बाद सोया सामग्री को अलग-अलग आकार दिया जा सकता है. यही वजह है कि बाजार में आपको छोटे नगेट्स, बड़े चंक्स और दूसरी शेप में टेक्सचर्ड सोया प्रोडक्ट दिखाई देते हैं. शेप मिलने के बाद इन्हें अच्छी तरह सुखाया जाता है. नमी कम होने के कारण पैकेट में मिलने वाला मील मेकर काफी हल्का, सूखा और सख्त दिखाई देता है. इसी सूखे रूप में इसकी पैकिंग करके बाजार में भेजा जाता है. (इमेज AI)

घर पर सोया चंक्स बनाने से पहले जब आप इसे गर्म पानी में डालते हैं, तो कुछ ही देर में इसके आकार में बड़ा बदलाव दिखाई देता है. छोटे और सूखे चंक्स पानी सोखकर काफी बड़े और मुलायम हो जाते हैं. इसकी स्पंजी बनावट पानी को अपने अंदर रोकने में मदद करती है. पानी में भिगोने या उबालने के बाद इसे दबाकर अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाता है. इसके बाद सोया चंक्स को मसाले वाली ग्रेवी, बिरयानी, पुलाव, फ्राई या दूसरी डिश में इस्तेमाल किया जा सकता है. (इमेज AI)

सोया आधारित मील मेकर को खास तौर पर उसके प्रोटीन के लिए जाना जाता है. तेल निकालने के बाद तैयार डिफैटेड सोया सामग्री में प्रोटीन का हिस्सा काफी महत्वपूर्ण होता है. इसके अलावा इसमें कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कम मात्रा में फैट और कुछ मिनरल्स भी मिल सकते हैं. लेकिन हर पैकेट में पोषण की मात्रा बिल्कुल एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है. ब्रांड, इस्तेमाल की गई सामग्री और प्रोसेसिंग के तरीके के अनुसार न्यूट्रिशन वैल्यू बदल सकती है. इसलिए केवल सामान्य दावे पर भरोसा करने के बजाय पैकेट पर दिया पोषण के कारक और इंग्रेडिएंट्स वाला हिस्सा पढ़ना बेहतर है. (इमेज AI)

सोयाबीन महंगा तो मील मेकर सस्ता कैसे मिलता है? यह सवाल भी दिलचस्प है. जब सोयाबीन को प्रोसेस किया जाता है तो उससे सिर्फ मील मेकर ही नहीं बनता. सोयाबीन से तेल भी निकाला जाता है, जिसे अलग प्रोडक्ट के रूप में इस्तेमाल और बेचा जा सकता है. तेल निकालने के बाद बची प्रोटीन वाली सोया सामग्री से सोया चंक्स जैसे खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं. इसलिए साबुत सोयाबीन की कीमत और मील मेकर के पैकेट की कीमत की सीधे तुलना करना सही नहीं होगा. इसके अलावा सूखे सोया चंक्स का वजन और आकार कम दिखाई देता है, लेकिन पानी में भिगोने के बाद यह काफी फूल जाता है. यही वजह है कि थोड़ी मात्रा से भी अच्छी खासी डिश तैयार हो जाती है. (इमेज AI)

अब अगली बार जब घर में मील मेकर की सब्जी या सोया बिरयानी बने, तो आप जानेंगे कि पैकेट में मौजूद ये सूखे स्पंजी टुकड़े सीधे सोयाबीन के टुकड़े नहीं हैं. इनके पीछे सोयाबीन की सफाई, तेल निकालने, सोया फ्लोर तैयार करने, एक्सट्रूजन, शेप देने और सुखाने की पूरी प्रक्रिया होती है. अगर आप बाजार से सोया चंक्स खरीद रहे हैं तो पैकेट पर इंग्रेडिएंट्स, न्यूट्रिशन फैक्ट, एक्सपायरी और स्टोरेज से जुड़ी जानकारी जरूर देखें. इससे आपको पता रहेगा कि आप जो प्रोडक्ट खरीद रहे हैं उसमें वास्तव में क्या-क्या इस्तेमाल किया गया है. (इमेज AI)

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