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Butterscotch History Origin : आप जानते हैं बटरस्कॉच का असली स्वाद किससे आता है? जानें इसका नाम ‘बटरस्कॉच’ ही क्यों पड़ा और इसके पीछे छिपी ब्रिटेन की 200 साल पुरानी बेहद दिलचस्प और अनोखी कहानी.
इस नाम का सबसे पहला लिखित रिकॉर्ड साल 1817 में इंग्लैंड के यॉर्कशायर (Yorkshire) के डॉनकास्टर (Doncaster) शहर से मिलता है.
Butterscotch History : चाहे आइसक्रीम हो, केक हो या फिर टेस्टी कस्टर्ड, ‘बटरस्कॉच’ (Butterscotch) एक ऐसा फ्लेवर है जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. इसका वो हल्का सा कैरेमलाइज़्ड स्वाद हर उम्र के लोगों को दीवाना बना देता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बटरस्कॉच को आप इतने चाव से खाते हैं, उसका असली स्वाद आखिर आता किससे है? और इसका नाम ‘बटरस्कॉच’ ही क्यों पड़ा? इसके पीछे स्कॉटलैंड या व्हिस्की (Scotch) का कोई कनेक्शन नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपी है ब्रिटेन की एक सदियों पुरानी और बेहद दिलचस्प कहानी. आइए जानते हैं इसके इतिहास के पन्नों में छिपा इसका असली सच!
बटरस्कॉच का असली स्वाद किससे आता है?
कई लोग बटरस्कॉच और कैरेमल (Caramel) को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा फर्क है. कैरेमल को सफेद चीनी (White Sugar) को पिघलाकर बनाया जाता है, जबकि बटरस्कॉच का असली स्वाद ‘ब्राउन शुगर’ (Brown Sugar) और ‘मक्खन’ (Butter) को एक साथ उबालने से आता है. ब्राउन शुगर में मौजूद शीरा (Molasses) जब मक्खन के साथ पकता है, तो इसे एक गहरा, क्रीमी और टोस्टेड फ्लेवर देता है. इसमें थोड़ा सा नमक और वैनिला एसेंस मिलाकर इसके स्वाद को और भी शानदार बनाया जाता है.
‘बटरस्कॉच’ नाम कैसे पड़ा?
इस नाम का सबसे पहला लिखित रिकॉर्ड साल 1817 में इंग्लैंड के यॉर्कशायर (Yorkshire) के डॉनकास्टर (Doncaster) शहर से मिलता है. पुरानी ब्रिटिश इंग्लिश और कुकिंग की भाषा में ‘Scotch’ या ‘Scorched’ शब्द का इस्तेमाल किसी चीज को काटने या निशान लगाने के लिए किया जाता था. जब ब्राउन शुगर और बटर के इस गाढ़े मिक्चर को पकाया जाता था, तो यह ठंडा होने के बाद बहुत सख्त (Hard Candy) हो जाता था. उसे आसानी से बराबर टुकड़ों में तोड़ने के लिए, गर्म रहने के दौरान ही उस पर चाकू से कट्स या निशान लगाए जाते थे (यानी उसे ‘स्कॉच’ किया जाता था). बटर और चीनी के इस कॉम्बिनेशन को ‘स्कॉच’ (काटने) करने की इसी प्रक्रिया की वजह से इसका नाम ‘Butter-Scotch’ पड़ गया.
नाम के पीछे ये भी है कहानी
साल 1817 में डॉनकास्टर के एक कन्फेक्शनर (हलवाई) सैमुअल पार्किंसन (Samuel Parkinson) ने आधिकारिक तौर पर ‘पार्किंसन्स डॉनकास्टर बटरस्कॉच’ बेचना शुरू किया था. उन्होंने इस कैंडी को इतनी सटीकता और लोकप्रियता के साथ बनाया कि ब्रिटिश शाही परिवार (रॉयल फैमिली) तक इसके दीवाने हो गए. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि ‘स्कॉच’ शब्द ‘Scorched’ (हल्का झुलसा हुआ या कैरेमलाइज़्ड) से आया है, क्योंकि चीनी और बटर को तेज आंच पर तब तक पकाया जाता था जब तक कि वह हल्की सी जलकर गहरा भूरा रंग न ले ले.
आज की आइसक्रीम और पुरानी कैंडी में क्या फर्क है?
आज हम जिस बटरस्कॉच को जानते हैं, वह ज्यादातर लिक्विड सिरप, आइसक्रीम या क्रंच (Crunch) के रूप में मिलता है. लेकिन मूल रूप से बटरस्कॉच कोई सॉफ्ट फ्लेवर नहीं, बल्कि एक हार्ड कैंडी (Hard Toffee) थी. आज भी इसके असली स्वाद को बरकरार रखने के लिए प्रीमियम ब्रांड्स ब्राउन शुगर, बटर और हैवी क्रीम का ही इस्तेमाल करते हैं, जबकि सस्ते विकल्पों में आर्टिफिशियल फ्लेवर और कैरेमल क्रंच डाल दिया जाता है.
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मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमन से अपनी ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन(2009) से की, जिसके बाद दैनिक भास्कर सहित कई प्रमुख अख़बारों में मेनस्ट्र…और पढ़ें