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Pahadi Chicken Rice Thali Bageshwar: अगर आप भी पहाड़ों की सैर के शौकीन हैं और असली पहाड़ी स्वाद की तलाश में हैं, तो बागेश्वर का गोलना गांव आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है. पिंडारी ग्लेशियर के रास्ते पर पड़ने वाले इस छोटे से गांव ने अपने पहाड़ी चिकन और चावल से सोशल मीडिया पर धूम मचाई है. मात्र 120 रुपये में मिलने वाली यह थाली अपनी स्वाद के लिए इतनी मशहूर हो रही है कि लोग दूर-दराज से सिर्फ इसका स्वाद चखने यहां पहुंच रहे हैं. सिलबट्टे पर पिसे ताजे मसाले और चूल्हे की आंच पर तैयार यह देसी खाना न केवल पर्यटकों का दिल जीत रहा है, बल्कि गांव के युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक बेहतरीन जरिया भी बन गया है.

बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर का गोलना गांव इन दिनों अपने खास पहाड़ी चिकन और चावल की थाली के लिए तेजी से चर्चा में है. मात्र ₹120 प्रति प्लेट में मिलने वाला यह देसी भोजन स्वाद, ताजगी और सादगी का अनोखा मेल पेश करता है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ अब दूर-दराज से आने वाले पर्यटक भी इस खास व्यंजन का स्वाद लेने के लिए यहां पहुंच रहे हैं. यह गांव पिंडारी ग्लेशियर जाने वाले रूट पर पड़ता है,

गोलना गांव में तैयार होने वाला यह पहाड़ी चिकन पूरी तरह पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है. इसमें पहाड़ के स्थानीय मसालों और देसी विधि का उपयोग किया जाता है, जिससे इसका स्वाद सामान्य चिकन से बिल्कुल अलग और ज्यादा लाजवाब हो जाता है. खास बात यह है कि इस भोजन में इस्तेमाल होने वाला चिकन ताजा होता है, ऑर्डर के बाद ही तैयार किया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता बनी रहती है.

पहाड़ी चावल के साथ मिलता है घर जैसा अहसास
इस थाली में गरमा-गरम चिकन के साथ पहाड़ी चावल परोसे जाते हैं, जो अपनी खुशबू और पौष्टिकता के लिए जाने जाते हैं. पहाड़ी चावल हल्के, सुपाच्य और सेहत के लिए बेहतर माने जाते हैं, जिससे यह थाली सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी खास बन जाती है. यहां का खाना बिल्कुल घर जैसा स्वाद देता है. यही वजह है कि जो भी एक बार इस पहाड़ी चिकन को चखता है, वह दोबारा यहां आने से खुद को रोक नहीं पाता है. कई पर्यटक तो इसे अपने सफर का खास अनुभव मानते हैं, सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा कर रहे हैं.

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ग्रामीणों को रोजगार, पर्यटन को मिल रहा विस्तार

इस पहल का एक बड़ा फायदा गांव के लोगों को रोजगार के रूप में भी मिल रहा है. स्थानीय स्तर पर शुरू की गई इस छोटी सी पहल ने अब स्वरोजगार का रूप ले लिया है, जिससे गांव के युवाओं को काम मिल रहा है, उनकी आय बढ़ रही है. इसके साथ ही यह प्रयास ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं. अगर इसी तरह स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा दिया जाए, तो पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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