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महुआ के बीज से बनता अनमोल ‘कोड़ी का तेल’! झारखंड में पीढ़ियों से कायम स्वाद

 

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झारखंड के ग्रामीण इलाकों में महुआ के बीज से निकाला जाने वाला कोड़ी का तेल आज भी परंपरा और स्वाद की पहचान बना हुआ है. यह तेल साल में केवल करीब तीन महीने ही मिलता है और महुआ के सूखे बीजों से पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. ग्रामीण इसे पूरी तरह शुद्ध और प्राकृतिक मानते हैं. बरसात के मौसम में इसी तेल में पकौड़े, पूरी और पुआ बनाए जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका स्वाद हल्का कड़वा जरूर होता है, लेकिन यह पेट के लिए हल्का माना जाता है. पीढ़ियों से इस्तेमाल हो रहा यह देसी तेल आज भी ग्रामीण जीवन और झारखंडी खानपान का अहम हिस्सा है.

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