Makhane ki Rabri: रबड़ी का नाम सुनते ही गाढ़े दूध की लच्छेदार तस्वीर जेहन में उभरती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में एक ऐसी रबड़ी मिल रही है जो स्वाद और सेहत का बेजोड़ मेल है. यहां आम रबड़ी से हटकर ‘मखाने की रबड़ी’ तैयार की जाती है. अपनी शुद्धता और अनोखे बनाने के तरीके के कारण यह रबड़ी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. शाम होते ही इस खास जायके का लुत्फ उठाने के लिए शौकीनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. दरअसल, ओम प्रकाश गोयल अपनी दुकान पर एक विशेष प्रकार की मखाने की रबड़ी बेच रहे हैं, जो शुद्धता और स्वाद की गारंटी है. इसे बनाने के लिए 250 ग्राम मखाने को दो घंटे पानी में भिगोकर साफ किया जाता है और फिर 10 लीटर उबलते हुए दूध में मिलाकर तेज आंच पर पकाया जाता है. जब मखाना पूरी तरह गल जाता है, तो इसमें एक किलो ताजी मलाई, घर का बना शुद्ध खोया, हल्की चीनी और क्रीम मिलाई जाती है. अंत में इलायची पाउडर और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स डालकर इसे तैयार किया जाता है. शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक सजने वाली इस दुकान पर 40 रुपये में 100 ग्राम रबड़ी मिलती है. बिना किसी मिलावट के तैयार होने वाली इस मिठाई का जादू ऐसा है कि दूर-दूर से लोग इसे खाने आते हैं और एक बार चखने के बाद बार-बार लौटकर आते हैं.