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मुनशी नान से हबीब शरबत तक! ये हैं हैदराबाद की 6 फेमस फूड शॉप, पता नोट करें

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Hyderabad Street Food: हैदराबाद का पुराना शहर अपनी ऐतिहासिक विरासत और नवाबी स्वाद के लिए जाना जाता है. यहां की तंग गलियों में मुनशी नान, निम्राह कैफे, मदीना होटल, हाजी साहब की दुकान और हबीब सॉफ्ट ड्रिंक जैसी दशकों पुरानी दुकानें आज भी अपनी परंपरा को जिंदा रखे हुए हैं. सुलेमान उस्मानी की मिठाइयों से लेकर ईरानी चाय, निहारी, कबाब और शरबत तक हर स्वाद में पुराने शहर की तहजीब झलकती है. ये ठिकाने सिर्फ भोजन नहीं बल्कि इतिहास और संस्कृति का अनुभव कराते हैं. हर जगह आज भी लोगों की भीड़ इस स्वाद को जीने आती है.

जब बात मीठे और बेकरी प्रोडक्ट्स की आती है, तो सुलेमान उस्मानी का नाम सबसे ऊपर आता है. रमजान के दौरान यहां की हलीम और पूरे साल मिलने वाली डबल का मीठा और खुबानी का मीठा अपनी शुद्धता के लिए जाने जाते हैं. यहां की मिठाइयों में आज भी वही नजाकत है, जो पुराने वक्त के नवाबों को पसंद आती थी. दुकान पर सुबह से लेकर रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. यहां का स्वाद लोगों को बार बार खींच लाता है और पुराने शहर की मिठास को जीवंत रखता है. हर पीढ़ी इसका आनंद लेती है.

हैदराबाद का पुराना शहर अपनी ऐतिहासिक विरासत और लाजवाब स्वाद के लिए जाना जाता है. यहां की तंग गलियों में दशकों पुरानी दुकानें आज भी पारंपरिक मसालों और खास पकाने के अंदाज से लोगों को आकर्षित करती हैं. मुनशी नान, निम्राह की ईरानी चाय, हलीम, डबल का मीठा और खुबानी का मीठा जैसे व्यंजन यहां की पहचान बन चुके हैं. ये ठिकाने सिर्फ खाने की जगह नहीं, बल्कि हैदराबाद की तहजीब, संस्कृति और नवाबी स्वाद को जिंदा रखते हैं, जहां हर निवाला इतिहास और परंपरा का अहसास कराता है.

मदीना होटल पत्थरगट्टी स्थित यह होटल हैदराबाद की पहचान से जुड़ा है. 1947 के आसपास खुला यह होटल अपनी निहारी और पाया के लिए मशहूर है. कहते हैं कि पुराने शहर की सुबह आज भी यहां की गरमा गरम निहारी और कुल्चे के बिना अधूरी मानी जाती है. इसका पारंपरिक स्वाद और पुराना आर्किटेक्चर आपको बीते दौर की याद दिलाता है. यहां सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ लग जाती है. लोग दूर दूर से इसका स्वाद लेने आते हैं. यह जगह आज भी पुराने हैदराबाद की रसोई संस्कृति को जीवित रखे हुए है. हर बाइट में इतिहास झलकता है.

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हाजी साहब की दुकान नामपल्ली के पास स्थित यह दुकान अपने कबाब और पराठों के लिए विख्यात है. यहां के लखमी और मटन समोसे शाम के वक्त सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. सादगी और स्वाद का ऐसा तालमेल यहां देखने को मिलता है कि शहर के रईस भी अपनी गाड़ियों से उतरकर यहां के कबाबों का लुत्फ लेते नजर आते हैं. गर्मागर्म पराठों के साथ परोसे जाने वाले कबाब यहां की खास पहचान हैं. शाम ढलते ही दुकान पर भीड़ बढ़ जाती है. पुराने हैदराबाद का असली स्वाद यहां हर बाइट में महसूस किया जा सकता है. यह जगह आज भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है.

मुनशी नान 1851 में शुरू हुई यह दुकान नान के मामले में हैदराबाद का सबसे बड़ा नाम है. इसके संस्थापक हुसैन कासमी, निजाम के दरबार में मुनशी थे इसलिए इसका नाम मुनशी नान पड़ा. यहां के चौकोर और पान की शक्ल के नान आज भी लकड़ी के तंदूर में पारंपरिक तरीके से पकाए जाते हैं. मटन करी या हलीम के साथ इस नान का जोड़ बेजोड़ है. इसका स्वाद पुराने हैदराबाद की शाही रसोई की याद दिलाता है. हर दिन यहां ताजा नान तैयार किया जाता है. दूर दूर से लोग इसका स्वाद लेने आते हैं. यह जगह आज भी अपनी परंपरा और स्वाद के लिए जानी जाती है.

निम्राह कैफे चारमीनार के बिल्कुल बगल में स्थित यह कैफे भले ही बहुत बड़ा न हो लेकिन इसका रुतबा बहुत ऊंचा है. यहां की ईरानी चाय और उस्मानिया बिस्किट का स्वाद चखे बिना चारमीनार का दौरा पूरा नहीं होता. सुबह की पहली किरण से लेकर रात के अंधेरे तक यहां लोगों का हुजूम सिर्फ उस एक कप चाय के लिए उमड़ता है जिसकी रेसिपी दशकों से गुप्त है. इसकी चाय की खुशबू दूर तक लोगों को खींच लाती है. पुराने हैदराबाद की कैफे संस्कृति को यह जगह आज भी जिंदा रखे हुए है. हर उम्र के लोग यहां का आनंद लेते हैं. यह जगह शहर की पहचान बन चुकी है.

हबीब सॉफ्ट ड्रिंक पुरानी हवेली रोड पर स्थित यह दुकान अपने शरबत के लिए मशहूर है. खासकर इनका जामुन का शरबत और दूध का शरबत गर्मियों में राहत का दूसरा नाम है. यह कोई फैंसी जूस सेंटर नहीं है बल्कि एक छोटी सी दुकान है जिसने फलों के असली अर्क और पुराने तरीके को बचाकर रखा है. यहां हर शरबत ताजे फलों और पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है. गर्मियों में यहां लोगों की लंबी कतार लगती है. इसका स्वाद आज भी पुराने हैदराबाद की सादगी और ताजगी को महसूस कराता है. यह जगह अपने देसी स्वाद के लिए खूब पसंद की जाती है.

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