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देवघर में सावन के दौरान आलू की फलाहारी जलेबी बेहद लोकप्रिय हो रही है. यह मैदा या उड़द की बजाय उबले आलू, अरारोट और दूध से बनती है. इसे शुद्ध घी में तलकर चाशनी में डुबोया जाता है. व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं और कांवरियों के बीच इसकी भारी मांग रहती है. इसका स्वाद कुरकुरा और अनोखा होता है.
देवघरः सावन का महीना आते ही देवघर की गलियों में भक्ति का रंग चढ़ जाता है. देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए देवघर पहुंचते हैं.मंदिर परिसर से लेकर बाजार और गलियों तक हर तरफ कांवरियों की भीड़ दिखाई देती है.लेकिन सावन की इस भीड़ के बीच देवघर की गलियों में एक ऐसी मिठाई भी खूब चर्चा में रहती है, जिसका स्वाद सालभर नहीं, बल्कि खास तौर पर सावन में लोगों को अपनी ओर खींचता है. यह है आलू की जलेबी. आपने मैदा या उड़द दाल से बनी जलेबी तो खूब खाई होगी, लेकिन देवघर में सावन के दौरान आलू से तैयार होने वाली यह खास जलेबी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है.
दुकानदार तरह-तरह के पकवान करते तैयार
देवघर में सावन के महीने में स्थानीय दुकानदार तरह-तरह के पकवान तैयार करते हैं, जिन्हें कांवरिया और स्थानीय लोग बड़े चाव से खाते हैं. इन्हीं पकवानों में आलू की जलेबी की अपनी अलग पहचान है. खासकर सोमवार के दिन जब कई स्थानीय लोग व्रत रखते हैं, उस समय आलू से बने व्यंजनों की मांग बढ़ जाती है.ऐसे में दुकानों पर तैयार होने वाली गर्मागर्म आलू की जलेबी लोगों को खूब पसंद आती है. बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी देवघर की इस अलग तरह की जलेबी का स्वाद लेना नहीं भूलते.
जानिए आलू जलेबी की आसान रेसिपी
अब बात करते हैं कि आखिर आलू की यह जलेबी तैयार कैसे होती है. इसे बनाने की शुरुआत आलू को अच्छी तरह उबालने से होती है.आलू को करीब एक घंटे तक उबाला जाता है, ताकि वह पूरी तरह नरम हो जाए. इसके बाद उबले हुए आलू को कुछ समय के लिए ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है.आलू ठंडा होने के बाद उसे अच्छी तरह मैश किया जाता है.इसके बाद इसमें अरारोट मिलाया जाता है, जिससे जलेबी को तलने के बाद अच्छा कुरकुरापन मिल सके.इसके बाद आलू और अरारोट के मिश्रण में दूध मिलाकर जलेबी का घोल तैयार किया जाता है. मिश्रण तैयार होने के बाद इसे जलेबी का आकार देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. फिर इसे गर्म शुद्ध घी में सावधानी से डाला जाता है.गर्म घी में तलते ही जलेबी धीरे-धीरे सुनहरी और कुरकुरी होने लगती है.अच्छी तरह सिक जाने के बाद इसे घी से निकालकर सीधे चीनी की गाढ़ी चाशनी में डाला जाता है.कुछ देर चाशनी में रहने के बाद आलू की जलेबी तैयार हो जाती है.
सावन में इस खास जलेबी की रहती डिमांड
इस जलेबी की खासियत यही है कि इसका स्वाद आम जलेबी से थोड़ा अलग होता है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम मिठास लिए यह जलेबी सावन के माहौल में लोगों को खूब भाती है.देवघर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बाबा के दर्शन के साथ यहां के स्थानीय खान-पान का स्वाद लेना भी यात्रा का हिस्सा बन जाता है. यही वजह है कि सावन के दौरान आलू की जलेबी देवघर की गलियों में एक खास आकर्षण बन जाती है और स्थानीय दुकानदारों के लिए भी कमाई का अच्छा जरिया बनती है.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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