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गर्मी का पारा 44 डिग्री के पार पहुंच चुका है और ऐसे मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए लोग प्राकृतिक विकल्प तलाश रहे हैं. गाजीपुर के सकलेनाबाद में बनने वाली पारंपरिक नमकीन लस्सी स्वाद के साथ सेहत का भी ख्याल रखती है. दही, भुना जीरा और काला नमक से तैयार यह देसी ड्रिंक आज भी गर्मियों में लोगों की पहली पसंद बनी हुई है.
गाजीपुर. पूर्वांचल में सूरज आग उगल रहा है और पारा 44 डिग्री के पार है, इस तपती धूप में अगर आप गाजीपुर के सकलेनाबाद से गुजर रहे हैं, तो यहां के होम शेफ राजाराम की नमकीन लस्सी आपकी थकान मिटा सकती है. राजाराम पिछले कई सालों से एक खास तरीके से लस्सी तैयार कर रहे हैं, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है.
राजाराम का कहना है कि वे आज भी वही तरीका अपनाते हैं जो गांवों में बरसों से चला आ रहा है. वे बताते हैं, गांवों में लस्सी को खूब मथकर बनाया जाता है ताकि उसका असली स्वाद निकलकर आए. मैं भी वही करता हूं, कोई मशीन इस्तेमाल नहीं करता. मशीन से दही का वो मलाईदार स्वाद खत्म हो जाता है, हमारी लस्सी का राज बस गाढ़ा दही, घर का भुना जीरा और काला नमक है. राजाराम के मुताबिक, इस सादगी में ही असली ठंडक छिपी है.
इस देसी स्वाद को पोषण के नजरिए से परखने के लिए हमने VLCC सर्टिफाइड न्यूट्रीशनिस्ट निधि पाठक से बात की. निधि इसे सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि समर सर्वाइवल ड्रिंक मानती हैं. वे बताती हैं कि पेट के लिए बेहतर-लस्सी नेचुरल तरीके से बनी होती है, जो पाचन तंत्र को ठीक रखती है और पेट में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाती है.
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एनर्जी और नमक की कमी-गर्मी में पसीने के कारण शरीर में नमक और मिनरल्स कम हो जाते हैं. जीरा और काला नमक इस कमी को तुरंत पूरा करते हैं.
लू से बचाव-दही की तासीर ठंडी होती है, जो भीषण गर्मी में शरीर का तापमान सही रखने और लू से बचाने में मदद करती है.
सकलेनाबाद की ये नमकीन लस्सी आज के दौर में एक मिसाल है, यहां एक तरफ राजाराम का पुराना अनुभव है, तो दूसरी तरफ निधि पाठक की वैज्ञानिक जानकारी. यही वजह है कि लोग इसे किसी भी बाजारू जूस या कोल्ड ड्रिंक से बेहतर मान रहे हैं.