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Bharatpur Desi Torai: भरतपुर में बरसात के मौसम के साथ एक खास देसी सब्जी की मांग बढ़ जाती है. यहां मिलने वाली देसी तोरई सिर्फ बारिश के मौसम में उपलब्ध होती है और अपने अलग स्वाद के कारण लोगों की पसंद बनी हुई है. स्थानीय लोग इसे पारंपरिक तरीके से बनाकर बड़े चाव से खाते हैं. मौसम बदलते ही बाजारों में इसकी आवक शुरू होने के साथ खरीदार भी इसे तलाशने लगते हैं. देसी तोरई का स्वाद सामान्य तौर पर मिलने वाली सब्जियों से अलग माना जाता है. ग्रामीण और स्थानीय खान-पान से जुड़ी यह मौसमी सब्जी भरतपुर की खाद्य संस्कृति की खास पहचान बन चुकी है.

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भरतपुर: भरतपुर में बरसात का मौसम अपने साथ कई तरह की मौसमी सब्जियां लेकर आता है. इन्हीं में एक खास सब्जी है. देसी तोरई जो इन दिनों जिले के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर की सब्जी मंडियों और सड़क किनारे लगने वाली रेड़ियों तक आसानी से नजर आ रही है. बारिश के मौसम में मिलने वाली यह देसी तोरई अपने खास स्वाद और देसी अंदाज के कारण लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है. खास बात यह है.कि इसका स्वाद सामान्य तौर पर बाजार में मिलने वाली तोरई से काफी अलग माना जाता है.

भरतपुर के कई किसान बरसात के मौसम में देसी तोरई की खेती करते हैं.खेतों में तैयार होने के बाद किसान इसे तोड़कर सीधे स्थानीय बाजारों में लेकर पहुंचते हैं. कई किसान और छोटे विक्रेता सड़क किनारे रेड़ी लगाकर भी ताजी देसी तोरई बेचते हुए नजर आते हैं. खेत से सीधे बाजार तक पहुंचने के कारण यह सब्जी काफी ताजी होती है और इसकी मांग भी बनी रहती है.

मौसमी सब्जियों के साथ मिलाकर खाना भी पसंद करते
स्थानीय लोगों के मुताबिक देसी तोरई की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वाद है. सामान्य तोरई की तुलना में इसका स्वाद अधिक देसी और अलग होता है. इसे घरों में कई तरह से तैयार किया जाता है. देसी मसालों के साथ इसकी सब्जी बनाई जाती है. जबकि कुछ लोग इसे दूसरी मौसमी सब्जियों के साथ मिलाकर खाना भी पसंद करते हैं. बारिश के मौसम में गरमागरम देसी तोरई की सब्जी और रोटी का स्वाद लोगों को खास तौर पर पसंद आता है.

देसी तोरई की तलाश करने लगते
ग्रामीण क्षेत्रों में इस सब्जी को लेकर लोगों में पुराना जुड़ाव भी देखने को मिलता है. बरसात शुरू होते ही स्थानीय लोग बाजार में देसी तोरई की तलाश करने लगते हैं. कई परिवारों में मौसम की इस खास सब्जी को पारंपरिक तरीके से बनाकर खाने का चलन है. यही वजह हैकि सीमित समय के लिए उपलब्ध होने के बावजूद इसकी अच्छी मांग बनी रहती है.

इस खास देसी सब्जी का स्वाद लेना पसंद करते
किसानों के लिए भी देसी तोरई की खेती बरसात के मौसम में अतिरिक्त आमदनी का एक अच्छा जरिया बनती है. खेतों में तैयार फसल को किसान स्थानीय स्तर पर ही बेच देते हैं. जिससे उन्हें अपनी उपज के लिए बाजार मिल जाता है. बरसात के साथ आने वाली यह देसी तोरई हालांकि पूरे साल आसानी से उपलब्ध नहीं रहती मौसम खत्म होने के साथ इसकी उपलब्धता भी कम होने लगती है. यही वजह है कि भरतपुर के लोग बरसात के इन दिनों में इस खास देसी सब्जी का स्वाद लेना पसंद करते है.

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Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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