Last Updated:

LPG gas Shortage: बीकानेर में ईरान-अमेरिका तनाव और एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों के बीच एक दुकानदार ने देसी तरीका अपनाकर लकड़ी और कोयले की भट्टी पर कचौरी और समोसे बनाना शुरू किया है. कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग स्थित 40 साल पुरानी तंवर परिवार की दुकान पर आज भी पारंपरिक अंदाज में नाश्ता तैयार किया जाता है. दुकानदार जगन्नाथ तंवर के अनुसार, धीमी आंच पर बनी कचौरी ज्यादा कुरकुरी और स्वादिष्ट होती है. यही वजह है कि यहां रोजाना करीब तीन हजार कचौरी और समोसे तैयार होते हैं और दूर-दूर से ग्राहक स्वाद लेने पहुंचते हैं.

ख़बरें फटाफट

बीकानेर. ईरान-अमेरिका तनाव और हॉर्मूज क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक संकट का असर अब भारत के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है. एलपीजी गैस की आपूर्ति और कीमतों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बीकानेर के एक दुकानदार ने देसी तरीका अपनाकर लकड़ी और कोयले की भट्टी पर कचौरी और समोसे बनाना शुरू कर दिया है. खास बात यह है कि इस पारंपरिक तरीके से बने समोसे और कचौरी का स्वाद लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि दूर-दूर से ग्राहक यहां पहुंच रहे हैं. देसी चूल्हे की खुशबू और पारंपरिक मसालों का मेल ही बीकानेर की इस दुकान को खास पहचान दिला रहा है.

बीकानेर के कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग स्थित फड़ बाजार में करीब 40 साल पुरानी तंवर परिवार की दुकान आज भी पुराने अंदाज में चल रही है. यहां रोजाना लकड़ी और कोयले की धीमी आंच पर हजारों कचौरी और समोसे तैयार किए जाते हैं.  दुकानदार जगन्नाथ तंवर ने बताया कि एलपीजी गैस लगातार महंगी पड़ रही है और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते गैस आसानी से उपलब्ध भी नहीं हो पा रही. ऐसे में उन्होंने फिर से पारंपरिक भट्टी का सहारा लिया.

लकड़ी और कोयला भी अब नहीं रहे सस्ते

उन्होंने बताया कि लकड़ी और कोयला भी अब सस्ते नहीं हैं, लेकिन यह आसानी से मिल जाते हैं. वहीं चूल्हे पर बनने वाली कचौरी और समोसे का स्वाद भी गैस पर बने नाश्ते से बेहतर होता है. यही कारण है कि ग्राहकों की पसंद आज भी देसी भट्टी वाली कचौरी बनी हुई है.  तंवर ने बताया कि पहले दुकान पर मिट्टी के तेल वाले स्टोव का इस्तेमाल होता था, लेकिन समय के साथ वह व्यवस्था बंद हो गई. इसके बाद लकड़ी और कोयले की भट्टी लगाई गई. उनका कहना है कि धीमी आंच पर तली गई कचौरी ज्यादा कुरकुरी और स्वादिष्ट बनती है.

रोजाना 3 हजार कचौरी और समोसे होते हैं तैयार

दुकान पर सुबह 6 बजे से काम शुरू हो जाता है. एक बार में बड़ी कढ़ाई में करीब 200 कचौरी और समोसे तले जाते हैं. रोजाना यहां करीब तीन हजार कचौरी और समोसे तैयार किए जाते हैं. मात्र 10 रुपये में मिलने वाली कचौरी का स्वाद लेने के लिए शहर ही नहीं, बाहर से आने वाले लोग भी यहां पहुंचते हैं. समोसे में आलू, मिर्च, अदरक, पुदीना, धनिया और गर्म मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि कचौरी में दाल, काली मिर्च, लौंग और खास मसाले डाले जाते हैं.

About the Author

deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें



Source link

Write A Comment